Rahim ke dohe या रहीम दुख सुख सहत, बड़ लोग सह सांति।

Rahim ke dohe in Hindi:

या रहीम दुख सुख सहत, बड़ लोग सह सांति।
उवत चंद जेहि भांति सों, अथवत ताही भांति।।

Ya rahim dukh such sahat, bad log sah saanti
Uvat chand jehi bhaanti soun, athavt taahee bhaanti

रहीम के दोहे का अर्थ:

प्रायः देखा जाता है कि मुनष्य को जरा सा दुख घेर ले तो वह रात-दिन कराहता है और निसहाय होकर बैठ जाता है। इसी प्रकार सुख का समय आ जाए तो मनुष्य फूला नहीं समाता और इतराता फिरता है। उसे लगता है, मानो सुख उसका दास है और उसे छोड़कर अब कहीं नहीं जाएगा। जबकि वह निरंतर कभी दुख से मलिन पड़ता है तो कभी सुख से खिल उठता है।

इस कुत्सित मानवीय प्रवृत्ति की भत्र्सना करते हुए रहीम कहते हैं कि सुख दुख धूप छाया की भांति हैं, इनसे पल-पल में हर्षित अथवा प्रभावित नहीं होना चाहिए। दुर्बल मानसिकता वाले ही सुख-दुख से प्रभावित होते हैं, जबकि दृढ़ मानसिकता वाले ऐसे बड़े लोग होते हैं, जो शांति व धैर्य से सुख-दुख सहते हैं। उनके हाव-भाव में किसी भी अवसर पर अतिरेक के दर्शन नहीं होते। वह चांद की भांति उदित होते हैं और चांद की भांति अस्त। उनकी तारम्यता व गति न कभी मंद पड़ती है और न कभी तीव्र। उनकी जीवन नौका भवसागर की समलहरों में सहज गति से तैरती हैं।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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