रहीम के दोहे Dohe Rahim

रहिमन नीचन संग बसि, लगत कलंक न काहि।Rahim ke dohe
दूध कलारी कर गहे, मद समुझै सब ताहि।।

Rahiman neechan sang basi, lagat kalank na kaahi
Doodh kalaari kar gahe, mad samujhai sab taahi

अर्थात (Meaning in Hindi): नीच संगत में बैठकर कलंक न लगे, ऐसा हो ही नहीं सकता। बड़े-बड़े सयाने कोयले की कोठरी में जाकर कालिख से नहीं बच सके, अतः नीच संगत में उठने बैठने पर कलंक लगना स्वाभाविक है। जिसे नीच के साथ देखा जाता है, उसे भी लोग नीच ही मानते हैं।

रहीम कहते हैं, नीचों की संगत बड़ी अशुभ होती है। इनके सान्निध्य में देखकर अच्छों-अच्छों को कलंकित मान लिया जाता है। यदि कलारी (शराब बेचने वाले) हाथ में दूध की मटकी लेकर भी जा रहा होगा तो सब यही समझेंगे कि वह शराब लेकर जा रहा है।


रहिमन तीन प्रकार ते, हित अनहित पहिचानि।
पर बस परे परोस बस, परे मामिला जानि।।

Rahiman teen prakar te, hit anhit pahichaani
Par bas pare paros bas, pare mamila jaani

अर्थात (Meaning in Hindi): मनुष्य के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि उसका हितैषी कौन है और शत्रु कौन? इस प्रकार वह अपने हितो की रक्षा करने में सक्षम होता है। रहीम की दृष्टि में तीन ऐसे प्रमुख कारण हैं, जिनके माध्यम से मनुष्य अपने हितकारी व अहितकारी को पहचानने में सफल हो सकता है।

रहीम कहते हैं, जब मनुष्य दूसरे के वश में होता है या दूर किसी के पड़ोस में रहता है अथवा उसे सांसरिक कष्टों (मामले-मुकदमे) का सामना करना पड़ता है, तब उसे इस बात का पता चलता है कि कौन उसका सहायक है और कौन उसे मुसीबत में देखकर हंसता है। ये तीन प्रमुख कारण हैं, जिससे हितकारी व अहितकारी की पहचान होती है।

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रहिमन एक दिन वे रहे, बाच न सोहत हार।
वायु जो ऐसी बह गई, बीचन परे पहार।।

Eahiman ek din ve rahe, baach na sohat haar
Vayu jo aisi bah gai, beechan pare pahaar

अर्थात (Meaning in Hindi): संबंधों का ताना बाना बड़ा नाजुक होता है। जब संबंधों में आत्मीयता होती है तो पारस्परिक निकटता इतनी अभेद्य होती है कि एक तिनके को भी बीच में प्रवेश करने की जगह नहीं मिल पाती। इसके विपरीत संबंधों में दरार पड़ जाए तो प्रतीत होता है कि बीच में खाई बन गई है, जिसका ओर छोर तक नजर नहीं आता।

रहीम अपने पुराने समय को याद करते हुए कहते हैं, वे भी कैसे सुखद दिन थे, जब हमारे संबंध मधुर थे, हम दोनों की बीच एक हार तक की दूरी नहीं थी। लेकिन समय का कोई भरोसा नहीं। ऐसी विपरीत हवा बही की जीवन ही पहाड़ बन गया। संबंधों में ऐसी दरार पड़ गई कि जीने का सुख जाता रहा।


असमय परे रहीम कहि, मांगि जात तजि लाज।
ज्यों लछमन मांगन गए, पारासर के नाज।।

Asamay pare rahim kahi, maangi jat taji laaj
Jyon lachhman maanagn gaye, paarasar ke naaj

अर्थात (Meaning in Hindi): जब कुसमय आए तो अकड़ना नहीं चाहिए। भूखों मरने की स्थिति में यह अकड़ काम नहीं आती। ऐसे समय में यदि मांगना भी पड़े तो झिझकना नहीं चाहिए। मैं ऊंची जाति का हूं, मांगने से मेरी जाति भ्रष्ट हो जायेगी, यह सोचकर न मांगने वाला भूख, रोग और कुंठा से मृत्यु को प्राप्त होता है। हमेशा समयानुसार काम करना चाहिए। कुसमय में जीवन बचा रहा तो सुसमय को लाने का प्रयास किया जा सकता है। जीवन ही नहीं रहा तो कैसी भी आशा नहीं रह जाती।

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रहीम कहते हैं, यदि कुसमय से ग्रस्त होना पड़े तो अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए कुछ भी करना अषोभनीय नहीं है। यदि मांगने का समय आए तो न अपनी जाति को आड़े देना चाहिए और न ही लज्जा का बोध करना चाहिए। भूख और अभाव की पीड़ा मृत्यु समान होती है, अतः मांगने से हिचकना कैसा? कुसमय में लक्ष्मण ने भी तो पाराशर से अनाज मांग कर पेट की भूख का शमन किया था।


छोटने सों सोहैं बड़े, कहि रहीम यह लेख।
सहसन को हय बांधियत, लै दमरी की मेख।।

Chhotane soun sohain bade, kahi rahim yah lekh
Sahsan ko hay baandhiyat, lai damri kee mekh

अर्थात (Meaning in Hindi): सिर्फ बड़े की ही महत्व नहीं है, छोटे का भी अपना महत्व है। लघु आकार को इसलिए तिरस्कृत नहीं करना चाहिए वह लघु है। कभी कभी छोटे से ही बड़े की रक्षा होती है। तलवार का आकार छोटा होता है किंतु वार बड़ा। तभी तो वह अपने से बड़े आकार के शत्रु को एक ही बार में धराशायी कर देती है।

रहीम कहते हैं, छोटे की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। वस्तुतः छोटों से ही बड़े शोभित होते हैं। घोड़ा सैकड़ों में बिकता है। व्यापारी उसे हाट में बेचने आते हैं। किंतु इसी घोड़े को व्यापारी छोटे से एक दमड़ी के खूंटे से बांधकर निश्चिंत हो जाते हैं।

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आमिर
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