राहु कब बना सकता है आपके लिए राजयोग?

Rahu Kab Bana Sakta Hai Apke Liye Rajyog

राहु को एक ऐसा ग्रह माना जाता है जो आकस्मिक परिणाम प्रदान करता है। शुभ हो या अशुभ, वह अपनी दशा में ऐसी स्थितियां पैदा करता है जिसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।

शायद यही वजह है कि सामान्य जन राहु का नाम सुनते ही चिंताग्रस्त हो जाते हैं। अब इस पर अगर राहु की वजह से कुंडली में कोई योग बन जाए तो सोचिए क्या होगा।Rahu Kab Bana Sakta Hai Apke Liye Rajyog

मंगल को क्षत्रीय ग्रह कहा जाता है जो रक्त का प्रतिनिधित्व करता है वहीं राहु बुद्धि को भ्रमित करने वाला ग्रह है।

जातक की कुंडली में राहु के योग का होना शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के होते हैं लेकिन सामान्य व्यक्ति केवल अशुभ योगों के विषय में ही जानता है।

अंग्रेजी में राहु को ड्रैगन हेड भी कहा जाता है, पौराणिक कथाओं में इसे सर्प के सिर वाले ग्रह की आकृति के तौर पर दिखाया जाता है। राहु अगर केतु के साथ मिलकर योग बनाता है तो इसे कालसर्प योग कहा जाता है।

चलिए हम आपको कुछ ऐसे ही अन्य शुभ और अशुभ योगों के बारे में बताते हैं जो राहु की वजह से से बनते हैं।

वैदिक ज्योतिष में राहु को नैसर्गिक पापी ग्रह माना जाता है। इसकी अपनी कोई राशि नहीं होती, ये जिस भी राशि के साथ मिलता है उस राशि के स्वामी के अनुसार फल प्रदान करता है।

किसी जातक की कुंडली में अगर राहु छठे भाव में स्थित होता है और उस कुंडली के केन्द्र में गुरु विराजमान होता है तो यहां अष्टलक्ष्मी नामक शुभ योग बनता है। जिस भी व्यक्ति की कुंडली में यह योग होता है वह व्यक्ति कभी धन के अभाव में नहीं रहता।

इस योग के अनुरूप, राहु अपना नकारात्मक फल त्यागकर शुभ फल देने लगता है और व्यक्ति को अत्याधिक आस्थावान और ईश्वर के प्रति समर्पित बनाता है। इन्हें जीवन में यश और सम्मान हासिल होता है।

राहु द्वारा निर्मित शुभ योगों में लग्नकारक योग का नाम भी शामिल है। यह योग मेष, वृष और कर्क लग्न की कुंडलियों में बनता है, जब राहु द्वितीय, नौवें या दसवें भाव में होता है।

जिस भी व्यक्ति की कुंडली में यह योग बनता है, उस व्यक्ति को राहु के नकारात्मक प्रभाव को नहीं झेलना पड़ता। ऐसे जातकों को राहु शुभ फल देता है, उन्हें दुर्घटना का सामना ना के बराबर करना पड़ता है। इन लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है और वैयक्तिक जीवन भी सुखमय होता है।

जिन जातकों की कुंडली में परिभाषा योग उपस्थित होता है, उन्हें भी राहु की नकारात्मक आकस्मिकता का सामना नहीं करना पड़ता। जिस व्यक्ति की कुंडली के छठे, तृतीय या एकादश भाव के अलावा लग्न में मौजूद राहु पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही होती है तो उसे ताउम्र आर्थिक लाभ मिलता रहता है।

जिस भी जातक की कुंडली में ये योग मिलता है उनके मुश्किल से मुश्किल काम भी आसानी से बनते चले जाते हैं।

राहु और शनि नामक दो पापी ग्रह किसी व्यक्ति की कुंडली के ग्यारहवें और छठे भाव में विराजमान होकर कपट योग का निर्माण करते हैं। ऐसा व्यक्ति कभी भी किसी का विश्वसनीय नहीं बन सकता, वह अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को धोखा देने की प्रवृत्ति रखता है।

जो भी व्यक्ति कपट योग वाले जातक के संपर्क में आता है, उसे पछतावा करने के अलावा और कुछ हाथ नहीं लगता। इस योग वाले जातक कभी सम्मान के हकदार नहीं बन पाते।

राहु द्वारा निर्मित जितने भी योग हैं उनमें यह योग सबसे निचले दर्जे का माना जाता है। जिस भी व्यक्ति की कुंडली में प्रेत बाधा मौजूद होती है। इन लोगों की मानसिक स्थिति कमजोर रहती है। इस वजह से ये लोग कभी-कभी अपना ही नुकसान कर बैठते हैं।

किसी भी जातक की कुंडली में बृहस्पति और राहु की युति से गुरु चांडाल योग का निर्माण होता है। ज्योतिष की भाषा में इसे अशुभ योग करार दिया गया है।

जिस भी व्यक्ति की कुंडली में यह योग होता है उसे राहु के नकारात्मक प्रभाव को भोगना पड़ता है। कुकर्मों के प्रति झुकाव, पैसे की तंगी और ईश्वर से दूरी, इस योग के प्रमुख लक्षण हैं।

उपरोक्त योग शुभ भी हैं और अशुभ भी, इसलिए ये कहना कि राहु सिर्फ नकारात्मक परिणाम ही देता है, पूर्ण सत्य नहीं है।