राकेश मारिया, 1981 बैच के आई पी इस ऑफिसर, और पूर्व मुंबई पुलिस कमिशनर ने शीना बोरा हत्या मामले में जिस तरह से पर्सनल रूचि दिखाई, उससे उनका जाना तय ही था। यह केस दरअसल राकेश मारिया के पर्सनल और प्रोफेशनल मामलों को मिक्स करने का क्लासिक उदाहरण बन गया था। आज तक किसी भी मेट्रो शहर के पुलिस चीफ ने इस तरह का इंटरेस्ट किसी केस में नहीं लिया होगा जैसा कि राकेश मारिया इस केस में ले रहे थे।

राकेश मारिया की पीटर मुखर्जी से दोस्ती किसी से छुपी नहीं है। खासकर पेज 3 पार्टियों में आने जाने वाले जानते हैं कि दोनों के ताल्लुकात बहुत घनिष्ठ रहे हैं।

लेकिन इस मामले में राकेश मारिया ने पर्सनल रूचि को एक नए स्टार तक पहुंचा दिया जब उन्होंने मुख्य अभियुक्त से खुद १२ घंटे तक लॉक उप में पूछताछ की. ऐसेकभी देखा और सुना नहीं गया है पुलिस कमिशनर रैंक का अधिकारी ऐसी पूछताछ करे जो कि साधारणतया एक जूनियर रैंक का जांच अधिकारी का काम है। इतना ही नहीं , मारिया इस केस की मीडिया के सामने लगातार इस तरह ब्रीफिंग कर रहे थे जैसे कि शीना बोरा मर्डर केस को सोल्व करना उनकी सबसे बड़ी प्रार्थमिकता हो।

राकेश मारिया ललित मोदी से मेलजोल के कारण भी राजनीतिक आकाओं के निशाने पर थे पर क्यूंकि ललित मोदी मामले से बहुत से बड़े राजनेताओं का नाम भी जुड़ा हुआ था इसलिए मरिया उस समय तो बच गए किन्तु शीना बोरा हत्या कांड उनके लिए नुकसानदेह साबित हुआ और उन्हें जाना ही पड़ा।

इस मामले में ऐसा क्या खास था कि राकेश मारिया इस में इतनी व्यक्तिगत रूचि रहे थे? आखिर क्यों मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से उनकी आलोचना करनी पड़ी कि बेहतर हो अगर वो इतनी ही रूचि अन्य हाई प्रोफाइल मामलों में भी दिखाएं।

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