किस समय राखी नहीं बांधनी चाहिए और क्यों?

Rakhi bandhne ka sahi samay kaun sa hai?

भाई बहन के अमिट प्यार का त्यौहार रक्षाबंधन आने वाला है. इस दिन भाई की कलाई पर राखी बांध कर बहन अपना स्नेह दिखाती है वहीँ भाई इस प्रेम के बदले जीवन भर बहन की रक्षा का वचन देता है. देखा जाये तो भारत में मनाये जाने वाले सैकड़ों त्योहारों में यह त्यौहार सबसे अनोखा है. लेकिन क्या आप जानते हैं राखी के बांधने का भी एक शुभ समय है जिस समय के अलावा राखी नहीं बंधी जानी चाहिए? अगर आप नहीं जानते तो आइये हम आपको बताते है की राखी किस समय बांधनी चाहिए.

raksha bandhan rakhiश्रवण नक्षत्र वर्ष में श्रावण की पूर्णिमा के दिन पूर्ण चंद्रमा से संयोग करता है। यही कारण है कि इसी नक्षत्र में रक्षा बंधन मनाया जाता है। 27 नक्षत्रों में एक श्रवण नक्षत्र को अति शुभ माना गया है, क्योंकि इसके आराध्य भगवान विष्णु हैं।
श्रवण नक्षत्र सभी प्रकार के अवरोधों को समाप्त कर सभी कार्यों को शुभ माना जाता है। भद्रा में राखी क्यों नहीं बांधी जाती है, ये बहुत कम लोग जानते हैं।

दरअसल, पंचाग के पांच भागों में से एक भाग करण भी होता है, जो शुभ व अशुभ दोनों ही प्रकार का होता है। ज्योतिष के अनुसार इस कारण का निवास पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल में होता है। जब चंद्रमा मेष, वृषभ, मिथुन और वृष्चिक राशि में आता है, तब भद्रा का अशुभ प्रभाव हमारे किए गए कार्यों पर होता है। जिससे हमें कार्यों का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है।
कन्या, तुला, धनु या मकर राशि में जब चंद्रमा होता है, तब भद्रा का वास पाताल में होता है यानी इस कारण का अशुभ प्रभाव मनुश्यों के कार्यों पर नहीं पड़ता है।

भद्रा को अशुभ मानने के पीछे हमारे शास्त्रों में एक कथा भी है। इस कथा के अनुसार एक बार राक्षसों ने देवताओं को युद्ध में हरा दिया। तब शिवजी ने क्रोध किया व उनके गुस्से से एक स्त्री प्रकट हुई, तो प्रेत की सवारी करती थी। उसने सभी दैत्यों का संहार कर दिया और देवताओं को विजय प्राप्त हुई।

विजयी होने के बाद देवताओं ने प्रसन्न होकर उसका नाम ‘भद्रा’ रखा और उसको ज्योतिष करणों में स्थान दिया। वह एक तरह की तामसिक शक्ति थी व प्रेत उसकी सवारी थी। इसलिए भद्राकाल में शुभ काम नहीं किए जाते हैं। यही कारण है कि भद्रा में राखी भी नहीं बांधी जाती है।