रोचक बच्चों की कहानी – उपकार का फल Rochak bachchon ki Kahani

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Rochak bachchon ki Kahani – Upkar ka fal

प्राचीन काल में कश्मीर के राजा के तीन पुत्र थे। तीनों वीर और बुद्धिमान थे। राजा बूढ़ा हुआ तो राजपाट देने के लिए राजकुमारों की परीक्षा लेनी चाही। मंत्रियों से विचार विर्मश करके राजा ने तीनों राजकुमारों को धन देकर विदेश जाकर धन कमाने को कहा और कहा कि जो राजकुमार धन का सही सदुपयोग करेगा, वही राजा बनेगा।

Rochak bachchon ki Kahani - Upkar ka falबस फिर क्या था, तीनों राजकुमार एक जहाज पर बैठकर धन कमाने के लिए विदेश के लिए रवाना हो गए। काफी दूर जाने पर तीनों उतरकर अलग अलग रास्तों पर चल दिए। चलते समय तीनों ने उसी स्थान पर वापस मिलने का वायदा किया। दो बड़े राजकुमार तो बड़े बड़े शहरों में चले गए। लेकिन छोटे राजकुमार ने वहीं रहकर समुन्द्र की लहरों का आनंद लेने की बात सोची। वहीं टहलते हुए उसे एक दिन एक साधु के दर्शन हुए। साधु के पूछने पर उसने सारा हाल साधु को कह सुनाया। साधु बोला, ”बेटा, इस तट पर अनाज का ढेर लगवा दे। प्रतिदिन कुछ हिस्स समुन्द्र में फेंकता जा। सारा अनाज खत्म हो जाए तो देखना क्या फल मिलता है। लेकिन यहीं प्रतीक्षा करते रहना।“ इतना कहकर साधु न जाने कहां विलीन हो गया। छोटे राजकुमार ने साधु का कहना मानकर वहीं तंबू गाड़कर रहना शुरू कर दिया।

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उसने ढेर सारा अनाज मंगवाकर समुन्द्र के किनारे एकत्र कर लिया। धीरे धीरे करके उसने सारा अनाज समुन्द्र में फेंक दिया। एक दिन ऐसा आया कि राजकुमार के पास अनाज खरीदने के लिए एक फूटी कौड़ी भी नहीं बची। दुखी होकर वह सोचने लगा कि काश वह साधु की बात न मानता। उसका घर जाने का मन करने लगा। लेकिन फिर सोचा क्यों न साधु की बात मानकर देखा जाए? शायद कोई चमत्कार हो जाए।

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उधर समुन्द्र में रोज रोज अनाज मिलने से समुन्द्र की सारी मछलियां आने लगी थीं। उनके साथ उनका राजा भी आता था। जब राजकुमार ने अनाज फेंकना बंद कर दिया तो मछलियों के राजा ने अपनी प्रजा से कहा कि पिछले छह महीने से तो हमें आसानी से अनाज मिलता रहा लेकिन अब बंद क्यों हो गया। लगता है राजकुमार के पास धन खत्म हो गया है।

”हां महाराज, यही लगता है।“ मछलियां बोल पड़ीं।

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”तो तुम लोग उसे समुन्द्र से मोती निकालकर क्यों नहीं देतीं?“ खैर अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। आज रात को हम सारी मछलियां एक एक मोती राजकुमार को दे आएंगी।

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रात होने पर मछलियों ने राजकुमार के तंबू के पास मोतियों का ढेर लगा दिया। पानी में आने जाने से एक विशेष प्रकार की सरसराहट से राजकुमार की नींद खुली तो उसने जब मोतियों का ढेर लगा देखा तो उसे दुख होने लगा कि उसने अकारण ही मन में पता नहीं क्या क्या सोच लिया था। अब उसने फिर से मछलियों को पहले से ज्यादा अनाज देना शुरू कर दिया। बड़े राजकुमारों के आने से पूर्व उसने एक एक मोती को एक एक उपले में छिपा दिया ताकि वह उसकी कमाई को न देख पाएं। कुछ समय बाद दोनों राजकुमार भी वहां पहुंच गए। एक ने कपड़े का व्यवसाय कर खूब धन एकत्र किया था और दूसरे ने दुकान खोलकर। छोटे राजकुमार की कमाई के नाम पर उपले देखकर उन्होंने उसका बहुत मजाक बनाया।

अगले दिन तीनों राजकुमार अपना अपना सामान लादकर अपने देश को लौट गए। देश पहंुचने पर उनका बहुत स्वागत हुआ। बड़े राजकुमारों की कमाई की दरबारियों ने खूब प्रशंसा की, पर छोटे राजकुमार के उपले देखकर सब हंसने लगे। लेकिन जब उसने राजा को सारी असलियत के बारे में बताया तो सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। सब छोटे राजकुमार की जय जयकार करने लगे और कहने लगे यही हमारा राजा बनने के लायक है और फिर छोटे राजकुमार को राजा बना दिया गया।

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