समय का सदुपयोग पर लघु निबंध (Hindi essay on Use of Time)

किसी कवि ने समय के महत्व को बतलाते हुए ठीक ही कहा है-

मनुष्य नहीं बलवान है, समय होत बलवान।

भीलन ने गोपिन लूटी, वही अर्जुन वही वाण।।

वास्तव में समय सर्वाधिक बलवान और प्रभावशाली है। समय के अपार प्रभाव के कारण ही भीलों ने गोपियों को देखते देखते ही लूट लिया और अर्जुन की वीरता के प्रतीक धनुष और उनके बाण एक भी काम नहीं आया। अतएव समय मनुष्य की शक्ति और क्षमता से कहीं अधिक बढ़कर श्रेष्ठ और प्रभावशाली है

समय का सदुपयोग जीवन में उन्नति प्राप्त करने के लिए सबसे बड़ा आधार है। समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निरन्तर विकास करते जाता है। वह जो कल था, आज नहीं है और आज जो है, वह कल नहीं रहेगा। इतना निश्चित है कि समय का सदुपयोग करके हम न केवल अपनी उन्नति करते हैं, अपितु अपने साथ साथ ही उन्नति चाहते हैं और करते हैं। यही कारण है कि समय का उपयोग करने वाले व्यक्ति का जीवन प्रेरणादायक और आकर्षक होता है। समय का सदुपयोगी यह भली भाँति जानता है कि बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता है। इसलिए उसके सामने जो भी समय आता है, उसका वह अधिक से अधिक लाभ और उपयोग करके अपनी शक्ति और प्रभाव को बढ़ाते चलता है।

काल अर्थात् समय की महत्वता कौन नहीं जानता है? काल ही विश्व का विधायक एवं विनाशक है। इसमें किसी प्रकार से ठहराव नहीं है। सृष्टि के आदिकाल से यही क्रम चलता आ रहा है और अंतकाल तक चलता रहेगा। कोई इसे रोक नहीं सकता है। जिन्होंने काल की गति पहचानने में भूल या देर की, उन्हें नाना प्रकार के धोखे खाने पड़ते हैं।

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समय का सदुपयोग हमारे जीवन की सफलता का उद्गम है। निश्चित है कि यदि हम समय के एक एक अंश का उपयोग उचित रूप से करें, तो सफलता हमें चूमती फिरेगी। इसके लिए चाहिए कि मनुष्य काल विभाजन कर ले। वह यह तय कर ले कि उसे किस समय क्या करना चाहिए। जिसे वह पूर्ण मनोयोग के साथ कर सके। विद्यार्थियों को इस विषय में विशेष सावधानी रखनी होगी। उन्हें हर काम समय के हिसाब से करना चाहिए। यदि पढ़ने के समय सोते हैं और सोने के समय मटरगश्ती करते हैं तो इससे उनकी बहुत बड़ी हानि हो जायेगी। उनका समस्त जीवन अंधकारमय और कष्टमय हो जाता है और उन्हें दर दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। इसलिए समय का सदुपयोग करना अत्यन्त आवश्यक है।

इसी तरह समय के दुरूपयोगियों को नाना प्रकार की मुसीबतें झेलते हुए यह जीवन सफर करना महा कठिन हो जाता है। इसलिए यह अत्यन्त आवश्यक है कि जीवन में नियमता लाकर इसे सब प्रकार से सार्थक एवं सुखद बनाने के लिए समय को अपने कार्य के हिसाब से बाँट लेना चाहिए। अमुक समय से लेकर अमुक समय तक यह करना है और अमुक समय वह कार्य करना है। यह सुव्यवस्थित तौर पर तय करके कार्य में तन मन और दिल से लग जाना चाहिए। फिर तरक्की अरबी घोड़े के समान तेजी से दौड़ती हुई सामने आ जायेगी। किसी प्रकार की लापवराही तो स्वयं के लिए एक भयानक शत्रु के रूप में होकर केवल हानि एवं विनाशकारी हो जायेगी। अगर समय का विभाजन एवं उसकी उपयोगिता जल्दी ही उबाऊ व थकाने वाली होती है, तो इसका अर्थ यह है कि समय का विभाजन एवं चुनाव गलत हुआ है। उबाऊपन और थकावट से बचने के लिए अपेक्षित मनोरंजन की आवश्यकता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सिनेमा, रेडियो, कसरत, टेलीविजन, समाचार पत्र, सभा, पर्यटन आदि इसके लिए यथोचित सार्थक सिद्ध होते हैं।

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आज के युग में समय का उपयोग बहुत ही अधिक बढ़ गया है। केवल शिक्षित ही नहीं, अपितु अशिक्षित वर्ग भी इसके मूल्य एवं प्रभाव को भली भाँति समझ गया है। समय के अधिक से अधिक उपयोग करने से ही अनुमानित धन वैभव की प्राप्ति हो सकती है। अब मानव को धन तो किसी प्रकार सन्तुष्टि न होने से वह समय के अति उपयोग से भी कभी थकावट नहीं होती, क्योंकि उसे अब विश्वास हो गया है कि सोचा हुआ काम तुरन्त करने से ही पूरा हो सकता है अन्यथा एक क्षण में कब, क्या हो जायेगा, यह कौन जानता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि समय के महान सदुपयोगी रातों-रात, दिनों दिन धन सुविधा से फलते फूलते जा रहे हैं। इसलिए समय का समुचित एवं यथोचित उपयोग न केवल सफलता की ही कुंजी है, अपितु ऐसा बहुमूल्य धन है। जिेस खोने पर पुनः प्राप्त करना सर्वथा असंभव होता है।

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Ritu
ऋतू वीर साहित्य और धर्म आदि विषयों पर लिखना पसंद करती हैं. विशेषकर बच्चों के लिए कविता, कहानी और निबंध आदि का लेखन और संग्रह इनकी हॉबी है. आप ऋतू वीर से उनकी फेसबुक प्रोफाइल पर संपर्क कर सकते हैं.