समय लाभ सम लाभ नहिं, समय चूक नहिं चूक – Rahim Ke Dohe

रहीम के दोहे Rahim ke dohe in hindi with meaning

समय लाभ सम लाभ नहिं, समय चूक नहिं चूक।Rahim ke dohe
चतुरन चित रहिमन लगी, समय चूक की हूक।।

Samay labh sam labh nahin, samay chook nahin chook
Chaturan chit rahiman lagi, samay chook ki chook

अर्थात (Meaning in Hindi): अवसरों की कमी नहीं, अवसर चारों ओर बिखरे पड़े हैं, जो इनका सदुपयोग करता है, वह सफलताएं अर्जित करता है। अतः हमेशा जागरूक रहना चाहिए। अवसर चूकने वाला कभी सफल नहीं होता। वह सदैव सिर धुनता है और अपनी असफलता के लिए भाग्य को दोष देता है।

रहीम कहते हैं कि समय जैसा लाभप्रद और कुछ नहीं। इसी प्रकार समय को चूकने से बड़ी और कोई चूक नहीं। यदि समझदार व्यक्ति समय चूक जाए तो उसे यों प्रतीत होता है, मानों चित्त में चूक की हूक शूल की भांति चुभ गई है।


रहिमन रहिला की भली, जो परसै चित लाय।
परसत मन मैलो करे, सो मैदा जरि जाय।।

Rahiman rahila ki bhali, jo parsai chit lay
Parsat man maila kare, so maida jari jay

अर्थात (Meaning in Hindi): इस दोहे में सम्मान के महत्व को रेखांकित किया गया है। सम्मान के साथ जो कुछ मिल जाए, भले ही अकिचंन पदार्थ हो, उसे पाकर सुखद अहसास होता है। किंतु निरादर सहित दी गई मूल्यवान निधियों को स्पर्श करने की इच्छा तक नहीं होती।

रहीम कहते हैं कि यदि मन लगाकर आदर से चने भी परोसे जाएं तो भले और स्वादिष्ट लगते हैं। इसके विपरित यदि कोई मन मैला करके सामने मैदे के स्वादिष्ट व्यंजन भी परोस दे तो वे भी जले हुए प्रतीत होते हैं।


रहिमन जो तुम कहत थे, संगति ही गुन होय।
बीच उखारी रमसरा, रस काहे ना होय।।

Rahiman jot um kahat the, sangati hi gun hoy
Beech ukhari ramsaraa, ras kahe n ahoy

अर्थात (Meaning in Hindi): रहीम ने अपने पदों में सुसंगत की अधिकतर सराहना की है। उनका यही विचार है कि व्यक्ति के जीवन पर संगत का व्यापक प्रभाव पड़ता है। व्यक्ति जैसी संगति में वास करता है, वैसा ही उसके व्यक्तित्व का निर्माण होता है। अच्छी संगति का असर अच्छा होता है और बुरी संगति का बुरा। किंतु इस पद में रहीम ने अपने इसी विचार का प्रतिवाद किया है।

रहीम स्वयं से कहते हैं, तुम तो कहते थे कि जो जैसी संगति में होगा, वह वैसा ही गुण ग्रहण करेगा, किंतु यह अंतिम सत्य नहीं है। यदि ऐसा होता तो ईख के खेत में उगने वाले सरकंडे में भी रस जरूर होता। उस पर ईख की संगति का प्रभाव क्यों नहीं पड़ता।


रहिमन ओछे नरन सों, बैर भलो ना प्रीति।
काटे चाटै स्वान के, दोऊ भांति विपरीति।।

Rahiman ochhe naran soun, bair bhalo na preeti
Kaate chaate swan ke, doun bhaanti vipreeti

अर्थात (Meaning in Hindi): हमारा कौन बैरी है और कौन मित्र, यह हम भलीभांति जानते हैं। दोनों खुलकर अपने व्यवहार का प्रदर्शन करते हैं। किंतु ओछे आदमी का कोई विश्वास नहीं होता। वह कब मित्र के वेश में अपनी दुश्मनी निभा जाए, कहा नहीं जा सकता।

इस बारे में सतर्क करते हुए रहीम कहते हैं, ओछे पुरूषों से हमेशा सावधान रहना चाहिए। उनके मनोभावों को समझ पाना कठिन है। अतः न उनसे मित्रता भली है और न दुश्मनी। वे न प्रीति के योग्य होते हैं और न बैर के। उनके और कुत्ते के व्यवहार में कोई अंतर नहीं होता। कुत्ते का काटना-चाटना दोनों ही खतरनाक हैं। वह चाटते-चाटते कब काट लेगा, कोई नहीं जानता।


रहिमन अति न कीजिये, गहि रहिये निज कानि।
सैजन अति फूले तऊ, डार पात की हानि।।

Rahiman ati na keejiye, gahi rahiye nij kaani
Saijan ati foole tau, daar paat kee hani

अर्थात (Meaning in Hindi): अति हमेशा हानिकाकर होती है। गुब्बारे में आवश्यकता से अधिक हवा भरी जाए तो उसका फूटना निश्चित है। दवा-दारू के सेवन में अति की जाए तो व्याधियों का षिकार होते देर नहीं लगती। सर्वाधिक नाशक है अहंकार की अति। यह किसी अन्य का अपकार नहीं करती, स्वयं अहंकारी इससे बरबाद होता है। अतः सदैव मर्यादा का पालन करना चाहिए।

रहीम कहते हैं, अति कभी नहीं करनी चाहिए। अति करने से सिवाय हानि के कुछ और प्राप्त नहीं होता। अपनी सीमाओं में रहने में ही सुरक्षा है, सीमा का अतिक्रमण नई समस्याओं को आमंत्रित करता है। अति के बजाय मर्यादा का पालन करना चाहिए। मर्यादा का उल्लंघन करने से स्थिति सहजन के फूल जैसी हो सकती है। सहजन फूलने में जब अति करता है तो अपने ही पेड़ की डालियों व पत्तियों को हानि पहुंचाता है।