Advertisements

सोने के अंडे देने वाली मुर्गी – दादी नानी की कहानी

किसी दम्पति के पास एक अदभुत मुर्गी थी। ‘अदभुत’ इसलिए कि वह प्रतिदिन सोने का एक अंडा देती थी। ऐसी जादुई मुर्गी पाकर वे बहुत प्रसन्न थे तथा अपने को भाग्यशाली समझते थे। सोने का अंडा बेच बेचकर उन्होंने बहुत सा धन इकट्ठा कर लिया था।

सोने के अंडे देने वाली मुर्गी - दादी नानी की कहानी

Advertisements

एक दिन उन्होंने सोचा कि मुर्गी प्रतिदिन एक अंडा देती है। इसका अर्थ यह हुआ कि इसके पेट में बहुत से अंडे होंगे। अगर सभी अंडे उन्हें एक साथ मिल जाएं तो वे शहर के सबसे धनी व्यक्ति बन जाएंगे।

‘लेकिन अंडे एक साथ मिलें कैसे?’ वे मन ही मन सोचने लगे।

Advertisements

अचानक एक दिन उन्होंने एक योजना बना डाली। दूसरे दिन दोनों ने मिलकर एक चाकू से मुर्गी का पेट चीर डाला और भीतर सोने के अंडे खोजने लगे। मगर वे मूर्ख सोने के अंडे खोजते खोजते परेशान हो गए, पर अंडे नहीं मिले। मिलते भी कैसे? मुर्गी के पेट में अंडे थे ही नहीं। उन लालचियों को प्रतिदिन एक सोने का अंडा मिलता था, वह भी उनके लालच के परिणामस्वरूप मिलना बंद हो गया। मुर्गी पेट चीरे जाने के कारण तड़प-तड़प कर मर गई।

शिक्षा –  लालच का फल बुरा होता है।

Advertisements
Advertisements