शब्द एवं शब्द विचार – परिभाषा भेद और उदाहरण

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शब्द विचार की परिभाषा :

शब्द विचार किसे कहते हैं? ; बालक, कलम, किताब में ये सभी वर्णों के व्यवस्थित समूह है ।इनको बोलने से किसी वस्तु का ज्ञान होता है, अर्थात उनका एक अर्थ होता है। मकल, कलवा, इत्यादि शब्दों का कोई अर्थ नहीं है, इसलिए इन्हें हम शब्द नहीं कह सकते।

शब्द की परिभाषा :

वर्णों का वह सार्थक समूह जिससे किसी अर्थ की प्राप्ति हो, शब्द कहलाता है। जैसे, पेड़, पत्ते, फूल, विद्यालय इत्यादि ।

दो या दो से अधिक वर्णो से बने ऐसे समूह को ‘शब्द’ कहते है, जिसका कोई न कोई अर्थ अवश्य हो। दूसरे शब्दों में- ध्वनियों के मेल से बने सार्थक वर्णसमुदाय को ‘शब्द’ कहते है।

शब्दों का एक विशाल समुद्र है ।उन शब्दों का अपना अलग स्वरूप और गुण होता है। साम्यता के आधार पर शब्दों को चार भागों में बांटा गया है-

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शब्द के भेद:

1. अर्थ के आधार पर
2. बनावट के आधार पर
3. प्रयोग के आधार पर
4. उत्पत्ति के आधार पर

SHABD VICHAR

अर्थ के आधार पर शब्द के भेद-

अर्थ के आधार पर शब्दों के दो भेद हैं-

सार्थक शब्द- ऐसे शब्द जिनका कोई अर्थ होता है और जो शब्दकोश की शोभा बढ़ाते हैं उसे सार्थक शब्द कहते हैं, जैसे, गुलाब, आदमी, नौकर, कांटे इत्यादि ।

निरर्थक शब्द – वैसे शब्द जिसका उच्चारण करने से कोई अर्थ स्पष्ट नहीं होता उसे निरर्थक शब्द कहते हैं, जैसे- नीपा, सालगी,किबात इत्यादि।

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बनावट के आधार पर शब्द के भेद :

बनावट के आधार पर शब्दों के तीन भेद है-

रूढ़ शब्द- जो शब्द परंपरा से हमारी भाषा में प्रयोग किए जाते रहे हैं और जिसे तोड़ने पर कोई सार्थक अर्थ नहीं प्रकट होता उसे रूढ़ शब्द कहते हैं जैसे लोटा खटिया जल कल नल इत्यादि|

यौगिक शब्द – यौगिक का अर्थ होता है योग के द्वारा एक किया हुआ अर्थात दो शब्दों को जोड़कर एक शब्द बनाया गया हो। अतः दो शब्दों को जोड़कर नए बने शब्द को योगिक शब्द कहते हैं। इन दोनों शब्दों को अलग अलग करने पर एक सार्थक अर्थ निकलता है, जैसे, मालगाड़ी, विद्यालय, पाठशाला, रसोईघर इत्यादि। उपर्युक्त शब्द दो शब्दों के मिलने से बना हैं तथा उनको अलग करने पर दोनों का एक सार्थक अर्थ निकलता है।

योगरूढ़ शब्द – योगरूढ़ शब्द में उपर्युक्त दोनों शब्दों का प्रभाव देखने को मिलता है। वैसे शब्द जो दो शब्दों के योग से तो बने हो लेकिन अपने शाब्दिक अर्थ को छोड़कर परंपरा रूप से एक नये अर्थ का बोध कराते आ रहे हो उसे योगरूढ़ शब्द कहते हैं, जैसे- “नीलकंठ, दशानन, कमल नयन।

यद्यपि ये सभी शब्द दो शब्दों के मिलने से बने हैं तथापि अपने शाब्दिक रूप में प्रयुक्त नहीं होते बल्कि समाज में इनका एक विशेष अर्थ है, जैसे नीलकंठ का अर्थ होता है शिव, दशानन का अर्थ होता है रावण, कमलनयन रामचंद्र के लिए प्रयुक्त होता है। योगिक और रूढ़ शब्दों के प्रभाव के कारण इसे योगरुढ शब्द कहते हैं।

प्रयोग के आधार पर शब्द के भेद –

प्रयोग के आधार पर शब्दों को दो भागों में बांटा गया है-

विकारी शब्द- विकार का अर्थ होता है जिसमें परिवर्तन हो अर्थात वह ऐसे शब्द जिनके ऊपर का लिंग और वचन का प्रभाव पड़ता है उसे विकारी शब्द कहते हैं जैसे, “सीता कल स्कूल जाएगी” ( यहां लिंग स्त्रीलिंग है,काल भविष्य काल है और उसी के अनुसार क्रिया और वचन का प्रयोग हुआ है। जैसे ही सीता की जगह राम, कल की जगह आज का प्रयोग करेंगे वैसे ही क्रिया प्रभावित होगी

जैसे “राम आज स्कूल जा रहा है।“

विकारी शब्द के चार भेद हैं – संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया और विशेषण।

अविकारी शब्द- ऐसे शब्द जिनके ऊपर काल लिंग और वचन का प्रभाव नहीं पड़ता है उसे अविकारी शब्द कहते हैं। अर्थात काल वचन एवं लिंग में परिवर्तन के बाद भी इनके रूप में परिवर्तन नहीं होता ।

अविकारी शब्द के चार भेद हैं : संबंध बोधक, क्रिया विशेषण, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।
संबंध बोधक, क्रिया विशेषण, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।

उत्पत्ति के आधार पर शब्द के भेद –

उत्पत्ति का अर्थ होता है शब्दों का उद्भव कैसे हुआ अर्थात शब्दों के जन्म का स्रोत कहां से आया।

उत्पत्ति के आधार पर शब्दों के चार भेद हैं-

तत्सम शब्द- तत्सम शब्द सम शब्द में तत उपसर्ग लगकर बना है। तत् का अर्थ होता है उसके और सम का अर्थ होता है समान।
भारत में संस्कृत भाषा सभी भाषाओं की जननी रही है ।जो शब्द संस्कृत भाषा से मिलते जुलते हैं अर्थात उसके समान होते हैं उसे तत्सम शब्द कहते हैं, जैसे, पुरुष, पुस्तक, पृथ्वी, क्षेत्र, कार्य,वृत्त, जननी, जनक माता-पिता इत्यादि। सरल शब्दों में- हिंदी में संस्कृत के मूल शब्दों को ‘तत्सम’ कहते है।

तद्भव शब्द-तद्भव शब्द भव शब्द में तद् उपसर्ग लगाकर बना है ।तद का अर्थ होता है उससे और भव का अर्थ होता है उससे उत्पन्न। वैसे शब्द जो संस्कृत भाषा से उत्पन्न हुए हैं उसे तद्भव शब्द कहते हैं ।प्राचीन काल में यह शब्द संस्कृत भाषा की शोभा बढ़ाते थे, परंतु कालांतर में वे टूटकर हिंदी भाषा में एक नए स्वरूप में प्रयोग होने लगे। जैसे रात्रि का अर्थ है रात

दधि का तद्भव है दही
घृत का तद्भव है घी
चंद्रमा का तद्भव है चांद
मृत्यु- मौत
जागृत –जगा (हुआ)
दुग्ध – दूध
अग्नि -आग
कर्म – काम
कर्ण- कान ।

ये शब्द संस्कृत से सीधे न आकर पालि, प्राकृत और अप्रभ्रंश से होते हुए हिंदी में आये है। इसके लिए इन्हें एक लम्बी यात्रा तय करनी पड़ी है। सभी तद्भव शब्द संस्कृत से आये है, परन्तु कुछ शब्द देश-काल के प्रभाव से ऐसे विकृत हो गये हैं कि उनके मूलरूप का पता नहीं चलता।

तद्भव के प्रकार-

तद्भव शब्द दो प्रकार के है – (i)संस्कृत से आनेवाले और (2)सीधे प्राकृत से आनेवाले।

हिंदी भाषा में प्रयुक्त होनेवाले बहुसंख्य शब्द ऐसे तद्भव है, जो संस्कृत-प्राकृत से होते हुए हिंदी में आये है।
निम्नलिखित उदाहरणों से तद्भव शब्द के रूप स्पष्ट हो जायेंगे:

संस्कृतप्राकृततद्धव हिंदी
अग्निअग्गिआग
कृतःकओकिया
चतुर्थचडत्थचौथा
चत्वारिचतारीचार
चत्वारिचत्तारिचार
नवनअनया
पुष्पपुप्फफूल
प्रियप्रियपिय, पिया
मध्यमज्झमें
मयामईमैं
मयूरमऊरमोर
वचनवअणबैन
वत्सवच्छबच्चा, बाछा

देशज शब्द वैसे शब्द जो स्थानीय स्तर पर और क्षेत्रीय स्तर पर प्रयोग में लाए जाते हैं और किसी क्षेत्र विशेष की पहचान होते हैं उसे देशज शब्द कहते हैं ।

क्षेत्र परिवर्तन के बाद उसके स्वरूप में अंतर आने लगता है, जैसे खटिया, डिबिया, लोटा, कुर्सी, चारपाई, बिंदी,  कंघी, अंगोछा, लिट्टी, चोखा, डोसा, चमचम,  कचौड़ी पकौड़ी, समोसा, कढ़ी, भात, चावल,।

ये स्थानीय बोली से प्रभावित होते हैं लेकिन परिस्थितियों के अनुसार हिंदी भाषा में प्रयोग किए जाने लगे हैं इसलिए इन्हें देशज शब्द कहते हैं। देशज का शाब्दिक अर्थ होता है देश में उत्पन्न।

विदेशज शब्द भारत पर अलग-अलग समय में विभिन्न संस्कृतियों और शासकों का प्रभाव रहा है ।जिन जिन राजवंशों ने भारत पर आक्रमण किया उन लोगों के साथ वहां की संस्कृति और व्यवहार के साथ-साथ भाषा भी हमारी संस्कृति में रच बस गई। इन्हीं भाषाओं को विदेशज शब्द कहते हैं। हिंदी शब्दकोश में विदेशी शब्दों का एक विशाल भंडार है ।कुछ शब्द तो ऐसे हैं जिनका हिंदी रूप खो सा गया है और विदेशी रूप वाला शब्द प्रचलन में आ गया है।

विदेशी शब्दों के उदाहरण निम्न है-

अंग्रेजी भाषा- कॉलेज, पेंसिल, रेडियो, टेलीविज़न, डॉक्टर, लेटर बॉक्स, पेन, कॉपी इत्यादि।,
फारसी- आदमी, जमींदार, जमीन, कागज, फर्ज, कर्ज, बीमार,इत्यादि।
अरबी- औलाद अमीर, कत्ल, कलम, दरबार, नमक नमूना, इत्यादि,।
तुर्की – कैची, चाकू, तोप, बारूद, लाश,  दारोगा ।
फ्रांसीसी- पुलिस, कार्टून, इंजीनियर इत्यादि,।
पुर्तगाली- अचार, आलपिन, कारतूस, गमला, चाबी इत्यादि।
चीनी – तूफान, लीची, चाय, पटाखा।
यूनानी- टेलीफोन टेलीग्राम।
जापानी- रिक्शा, फेंगशुई सायोनारा इत्यादि।

शब्द विचार – विशेष तथ्य:

1.वर्णों का सार्थक समूह जो एक विशेष अर्थ देते हैं उसे शब्द कहते हैं|
2.शब्दों को उत्पत्ति प्रयोग बनावट और अर्थ के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।

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