Advertisement

आखिर क्यों आना पड़ा शिवपाल यादव को अखिलेश के समर्थन में

उत्तर प्रदेश में राजनीति में नए नए उलटफेर होते दिखाई दे रहे हैं. अभी हाल ही तक जहाँ समाजवादी पार्टी में चाचा शिवपाल सिंह यादव और भतीजे अखिलेश यादव के बीच पार्टी और सरकार में वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी हुई थी वहीँ अचानक हुए बदलाव में चाचा शिवपाल सिंह यादव अखिलेश के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सफलता का मन्त्र अलापते नजर आ रहे हैं. हुआ यूँ कि मंगलवार को समाजवादी पार्टी अध्यक्ष शिवपाल यादव ने कहा कि सारा यादव परिवार एक है और समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश चुनाव (UP election) में जनता के मध्य “काम बोलता है” का नारा लेकर जाएगी.

shivpal yadav akhilesh uttarpradesh election samajvadi party काम बोलता हैशिवपाल यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने पिछले ५ साल में उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व विकास देखा है और आगामी उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में जनता समाजवादी पार्टी को फिर से सत्तासीन करेगी.

Advertisement

अभी हाल ही तक यादव कुनबे में घमासान मचा हुआ था. यहाँ तक कि “नेता जी’ मुलायम सिंह यादव भी चाचा -भतीजे में सुलह करवाने में नाकाम रहे थे. मंच पर चाचा शिवपाल यादव और भतीजे अखिलेश यादव में तकरार इतनी बढ़ी कि शिवपाल यादव ने अखिलेश यादव के हाथ से माइक ही छीन लिया और उन्हें अपनी बात रखने से रोक दिया.

खैर, अभी तक अखिलेश यादव को गैर-तजुर्बेकार बताने वाले शिवपाल सिंह यादव ने अखिलेश यादव द्वारा किये गए विकास को उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की जीत का आधार बताते हुए अब जनता के बीच”काम बोलता है” का नारा लेकर खुद जाने का फैसला किया है.

Advertisement

बता दें कि जहाँ अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी की सरकार में मुख्यमंत्री हैं वही शिवपाल सिंह यादव को जमीन से जुड़ा नेता माना जाता है और उनकी पार्टी कैडर पर जबरदस्त पकड़ है.

रजत जयन्ती समारोह से ही संकेत मिलने लगे थे कि भले ही मुलायम सिंह यादव शिवपाल यादव का समर्थन  करते दिखाई दिए हों, दरअसल इस झगड़े में जीत अखिलेश यादव के ही हाथ लगी है. और अब प्रोफ. रामगोपाल यादव के निलंबन ख़त्म होने और मात्र २५ दिनों में पार्टी में वापसी को देख कर इस में कोई संदेह बाक़ी नहीं रहा है क्योंकि रामगोपाल यादव को अखिलेश यादव का सबसे खास शुभचिंतक माना जाता है. कहा जाता है कि अखिलेश यादव के अधिकांश नीतिगत फैसलों के पीछे रामगोपाल यादव का ही दिमाग होता है.

Advertisement

लेकिन, चाचा-भतीजे के बीच इस वर्चस्व की लड़ाई को पार्टी को नुकसान होता दिख रहा है. खास कर मुसलमानों के बीच यह संकेत गया है अपने ही घर की महाभारत में उलझी समाजवादी पार्टी आने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ शायद जीत हासिल न कर सके. इस से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि भारी संख्या में मुस्लिम मतदाता बहुजन समाज पार्टी की और जा सकता है.

माना जा रहा है कि यूपी में  इस वक़्त चुनावी रेस में बसपा पहले और भाजपा दूसरे स्थान  पर चल रही है.

Advertisement