हमारा विद्यालय पर लघु निबंध | My School Essay in Hindi

Hamara Vidhyalaya par laghu nibandh

भूमिका- मुझे कई विद्यालयों में पढ़ने का अवसर मिला है। प्रायः प्रत्येक विद्यालय अच्छा ही था, जिस विद्यालय में मैं आजकल पढ़ रहा हूँ, वह हर दृष्टि से बहुत अच्छा है। मेरे विद्यालय का नाम महर्षि दयानंद आदर्श विद्यालय है।

मेरा विद्यालय गुड़गाँव के सेक्टर 35 में स्थित है। यह बहुत विस्तृत है। यह नगर से दूर Short Essay on Hamara Vidhyalaya in Hindiअत्यन्त शान्त वातावरण में स्थित है। यहाँ के शान्त वातावरण में बैठकर पढ़ने का बहुत आनंद आता है। इसके चारों ओर दूर दूर तक फैली हरियाली बहुत अच्छी लगती है।

भवन- विद्यालय का भवन बहुत ही शानदार है। इसमें एक बहुत बड़ा हाल है। यहाँ 500 से भी अधिक छात्र एक साथ बैठकर प्रार्थना सभा में भाग लेते हैं। इस भवन में हाल के अतिरिक्त 40 के लगभग कमरे हैं। सभी कमरे विशाल, हवादार और प्रकाश वाले हैं। सभी विषयों की प्रयोगशाला के लिए अलग अलग कक्ष हैं। अध्यापक कक्ष भी अत्यन्त सुन्दर है। लड़के और लड़कियों के लिए दो अलग अलग कमरे हैं। इन कमरों में मध्यान्तर में लड़के और लड़कियां बैठकर खाना खाते हैं।

प्राचार्य कक्ष- प्राचार्य महोदय के लिए एग अलग कक्ष है। इस कक्ष में बैठे बैठे ही प्राचार्य महोदय सारे विद्यालय में चल रही घटनाओं को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। इस कक्ष में कक्षा समय सारिणी और अध्यापक समय सारिणी भी दीवार पर लटकी दिखाई देती है। इस कक्ष में अनेक महापुरूषों के चित्र भी दीवार पर सजे खड़े हैं।

पुस्तकालय- हमारे विद्यालय में एक विशाल पुस्तकालय भी है। इस में विभिन्न विषयों की पुस्तकें हैं। इस पुस्तकालय में हिन्दी अंग्रेजी के दैनिक समाचार पत्र और कई महत्वपूर्ण मासिक अर्धवार्षिक और वार्षिक पत्रिकाएँ भी आती हैं। हमारे विद्यालय में विद्यालय पत्रिका भी छपती है। इस ‘पत्रिका’ के कई अंक स्थान स्थान पर पड़े दिखाई देते हैं। पुस्कालयाध्यक्ष बहुत ही परिश्रमी और अच्छे व्यक्ति हैं।

अध्यापक- हमारे विद्यालय के अध्यापक बहुत ही परिश्रमी विद्वान और छात्रों के हित का ध्यान रखने वाले हैं। ये हमें बहुत ही परिश्रम और लगन से पढ़ाते हैं। वे हमें लिखित कार्य का भी अभ्यास कराते हैं। हमारे लिखित कार्य को सावधानीपूर्वक देखते हैं और हमारी अशुद्धियों की ओर हमारा ध्यान दिलाते हैं। इससे हमें शुद्ध भाशा सीखने और उसका शुद्ध प्रयोग करने में सहायता मिलती है।

अनुशासन- हमारे विद्यालय में सभी अनुशासनपूर्वक रहते हैं। सभी कार्य नियत समय पर होता है। अध्यापक समय पर घंटी बजते ही अपनी कक्षाओं में जाते हैं और समय से पहले वे कभी अपनी कक्षा को नहीं छोड़ते। यहाँ का अनुशासन कमरों तक ही सीमित नहीं है। खेल के मैदान में भी हम अनुशासन का पालन करते हैं।

खेल- हमारे विद्यालय में खेल कूद को भी बहुत महत्व दिया जाता है। सभी विद्यार्थियों के लिए किसी न किसी खेल में भाग लेना अनिवार्य है। हमारे स्कूल के विद्यार्थी खेल में बहुत रूचि लेते हैं। हमारे विद्यालय के खिलाड़ी कई खेलों में पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं।

परिणाम- हमारे विद्यालय का परिणाम बहुत अच्छा रहता है। प्रायः हमारे विद्यालय का परिणाम शत प्रतिशत रहता है। परिणाम के अच्छा रहने, अनुशासन अच्छा होने तथा खेलों का भी अच्छा प्रबंध होने के कारण शहर के सभी अभिभावक इस विद्यालय में अपने बच्चों को प्रवेश दिलाना चाहते हैं।

उपसंहार- इस प्रकार हमारा विद्यालय हर प्रकार से अच्छा है। सुन्दर विशाल भवन, अच्छा खुला वातावरण, अनुशासन, अच्छे अध्यापक सभी ने मिलकर विद्यालय को आदर्श विद्यालय बना दिया है। विद्यालय की चहुँमुखी उन्नति के श्रेय वास्तव में हमारे प्रधानाचार्य महोदय को है।

My School Essay in Hindi – Mera Vidyalaya par Nibandh

मेरे विद्यालय का दोमंजिला भवन बहुत विस्तृत हैं. यह नगर के श्रेष्ट विद्यालयों में से एक हैं. इसका परीक्षाफल प्रतिवर्ष बहुत अच्छा रहता हैं. इस विद्यालय के भवन में लगभग ४० कमरें हैं. जो बहुत ही सुंदर हैं ये कमरे विद्यार्थियों को बहुत पसंद हैं. इन कमरों में विद्युत् वायु प्रकाश की उचित व्यवस्था हैं.

विद्यालय के प्रांगण में एक सुंदर सी फुलवाड़ी हैं. जिसकी हरी भरी घास रंग बिरंगे फूल और लहलहाती लताएं विद्यालय में आने वालों का मन मोह लेती हैं. विद्यालय के मध्य एक बहुत बड़ा मैदान हैं. जहाँ हमारी प्रार्थना होती हैं और खेल के समय अध्यापक बच्चों को खेल खिलाते हैं.

मेरे विद्यालय में लगभग दो हजार छात्र एवं छात्राएं विद्या का अध्ययन करते हैं. यह विद्यालय प्रथम कक्षा से 12 वीं कक्षा तक हैं. मेरे विद्यालय में लगभग साठ अध्यापक तथा अध्यापिकाएं कार्यरत हैं. ये सभी प्रशिक्षित तथा अपने विषय के पूर्ण ज्ञाता हैं. मेरे विद्यालय में एक प्रधानाचार्य तथा एक उप प्रधानाचार्य हैं जो बहुत अनुशासनप्रिय हैं. प्रधानाचार्य तथा उप प्रधानाचार्य जी के कमरों के साथ विद्यालय का कार्यालय भी हैं.

एक बड़े कमरे में पुस्तकालय तथा तीन बड़े बड़े कमरों में विज्ञान की प्रयोगशालाएं स्थित हैं. मेरे विद्यालय के सभी अध्यापक व अध्यापिकाएं बहुत ही दयालु तथा विद्यार्थियों की हितैषी हैं वे विद्यार्थियों की कठिनाइयों को सुलझाने का प्रयास करते हैं. विद्यार्थी भी अपने गुरूजनों का बहुत सम्मान करते हैं.

विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम विद्यालय में चलाए जाते हैं. जैसे स्काउटिंग, रेडक्रोस, एनसीसी वाद विवाद प्रतियोगिता, नाटक, लोक नृत्य आदि. इसके अतिरिक्त कुछ खेल भी खिलवाएं जाते हैं. जैसे वालीवाल, क्रिकेट, फुटबाल, हॉकी आदि. प्रत्येक वर्ष मेरा विद्यालय मेरा विद्यालय खेल कूद व भाषण प्रतियोगिता में कोई न कोई पुरस्कार प्राप्त कर लेता हैं. स्वच्छता और अनुशासन तो मेरे विद्यालय की मुख्य विशेषताएं है. यहाँ विद्यार्थी अनुशासन, आज्ञाकारिता और सद्व्यवहार की शिक्षा ग्रहण करते हैं.

इन सब विशेषताओं के कारण मुझे अपने विद्यालय पर गर्व हैं. यह सारे नगर में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता हैं.

Mera Vidyalaya Essay in Hindi – 500 words

मेरे स्कूल की इमारत:- मेरा स्कूल बहुत ही सुंदर और आकर्षित है मुझे मेरा स्कूल बहुत पसंद है मेरे स्कूल में 50 कमरे हैं हर कमरे में व्यवस्थित है मेरे स्कूल में 60 काबिल शिक्षक है ,30 सहायक ,1 प्रधानाचार्य और 10 गेट कीपर है। मेरे स्कूल के प्रत्येक कमरे में फर्नीचर सुसज्जित हैं और प्रत्येक कमरा हवादार है ,प्रधानाचार्य जी का कमरा विशेष रूप से सजा हुआ है उसमें महात्मा गांधी जी और अन्य नेताओं की फोटो भी लगी है उनका कमरा बहुत ही आकर्षित है इसके अलावा स्टॉफ रूम , पुस्तकालय, कंप्यूटर रूम और प्रयोगशाला इत्यादि है सभी में उत्तम व्यवस्था है मेरे स्कूल में पीने के पानी और टॉयलेट की भी उचित व्यवस्था है।

मेरे स्कूल का पुस्तकालय:- मेरे स्कूल के पुस्तकालय में नवीन और प्राचीन पुस्तकों का अच्छा संग्रह है यह साहित्य से लेकर पाक कला इतिहास विज्ञान भूगोल सभी विषय की पुस्तक उपलब्ध है यह कई प्रकार के साहित्यकारों की पुस्तकें हैं जैसे मुंशी प्रेमचंद शेक्सपियर इत्यादि चित्रकला बागवानी के विभिन्न प्रकार की पुस्तकें उपलब्ध है मेरे स्कूल के पुस्तकालय मुझे बहुत प्रिय है।

मेरे स्कूल का खेल का मैदान:– मेरे स्कूल का खेल का मैदान स्कूल के बीचो-बीच है जिसमें हम फुटबॉल क्रिकेट सभी खेल खेलते हैं हमारे स्कूल में सालाना खेल प्रतियोगिता रखी जाती है जिसमें जीतने वाली टीम को पुरस्कृत भी किया जाता है मुझे मेरे स्कूल की खेल के मैदान में खेलना बहुत पसंद है साथ ही मैं खेल के वार्षिक महोत्सव में भी खुशी-खुशी हिस्सा लेता हूं हमें खेल सिखाने के लिए खेलों के शिक्षक निर्धारित किए गए हैं जो बहुत ही अच्छे तरीके से हमें खेलों का ज्ञान प्रदान करते हैं।
मेरे स्कूल का बगीचा:– मेरे स्कूल का बगीचा बहुत ही सुंदर है इसमें रंग बिरंगे फूल लगते हैं जिनकी खुशबू हर जगह फैलती है जो मन को प्रफुल्लित कर देती है मेरे स्कूल में स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए नीम इत्यादि के वृक्ष लगाए गए हैं जो स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने के साथ ही शुद्ध हवा प्रदान करते है मेरे स्कूल के बगीचे की सुंदरता की देखभाल करने के लिए माली लगाए गए हैं जो नियमपूर्वक उसकी देखरेख करते हैं मुझे मेरे स्कूल का बगीचा बहुत अच्छा लगता है।
मेरे स्कूल के शिक्षक:- एक विद्यार्थी के जीवन में शिक्षक का महत्वपूर्ण स्थान होता है मेरे स्कूल के शिक्षक धैर्य और प्यार से हमें पढ़ाते हैं मेरे स्कूल के शिक्षक बहुत काबिल शिक्षक हैं मेरे स्कूल के शिक्षकों के पास सभी सवालों के जवाब होते हैं जिन सवालों की संका हमें होती हैं वह हमें बहुत ही समझदारी और विश्वास से सभी विषयों का ज्ञान देते मुझे मेरे सभी शिक्षक अति प्रिय है।

मेरे स्कूल की कार्यप्रणाली और अनुशासन:– मेरा स्कूल सुबह प्रातः काल 7:00 से 1:30 बजे तक का है हमें स्कूल से घर तक छोड़ने के लिए बस की व्यवस्था प्रदान की गई है सुबह की प्रार्थना के साथ ही स्कूल की शुरुआत होती है मेरा स्कूल अनुशासनप्रिय है इसका पालन ना करने वाले छात्र के लिए दंड का प्रावधान है, भले ही अनुशासन का पहला पाठ हमें परिवार से प्राप्त होता है पर एक स्वस्थ समाज के निर्माण में मेरे स्कूल की भूमिका भी अनुशासनप्रिय माहौल के रूप में नहीं निभा रहा है .

मेरा मेरे स्कूल के प्रति कर्तव्य:- मेरा स्कूल मुझे शिक्षा के साथ ही समाज का एक अच्छा नागरिक बनने में मेरी मदद करती है तो मेरा कर्तव्य भी है कि मैं मेरे स्कूल के शिक्षक शिक्षिकाओं का सम्मान करु और पूरी लगन,मेहनत और परिश्रम से शिक्षा ग्रहण करके अपने स्कूल का नाम रोशन करू।

उपसंहार
एक कहावत है अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता कहने का आशय है कि एक अकेले व्यक्ति चाहे वह छोटा बच्चा ही क्यों न हो जब तक उसकी उंगली पकड़कर उसे रहा नहीं दिखाई जाए तब तक वह आगे नहीं बढ़ सकता और वही आगे बढाने का काम स्कूल करता है वह हमें ज्ञान और शिक्षा देता है और हमारे भविष्य का निर्माण करता है। मुझे मेरे स्कूल पर गर्व है। मेरे स्कूल के शिक्षक शिक्षिकाओं के साथ ही उन सभी को मैं शत-शत नमन करता हूं जो मेरे भविष्य के निर्माण करता है।

My School Essay in Hindi class 10

प्रस्तावना
विद्यालय को प्राचीन काल से ही मंदिर का स्थान दिया गया है। प्राचीन काल में बालक 6, 8 अथवा 11 वर्ष की अवस्थाओं में गुरुकुलों (विद्यालयों) में ले जाए जाते थे और गुरु के पास बैठकर ब्रह्मचारी के रूप में शिक्षा प्राप्त करते थे। गुरु उनके शारीरिक और बौद्धिक संस्कारों को पूर्ण करता हुआ, उन्हें सभी शास्त्रों एवं उपयोगी विद्याओं की शिक्षा देता तथा अंत में दीक्षा देकर उन्हें विवाह कर गृहस्थाश्रम के विविध कर्तव्यों का पालन करने के लिए वापस भेजता। वर्तमान के विद्यालय, प्राचीन काल के गुरुकुलों से बहुत अलग अवश्य हैं किन्तु आज भी विद्यालयों को मंदिरों का और अध्यापकों को भगवान् का दर्जा दिया जाता है।

विद्यालय स्थल
मेरा विद्यालय बहुत सुंदर है और मुझे मेरा विद्यालय बहुत अच्छा लगता है। मेरा विद्यालय मेरे घर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसलिए हमारे विद्यालय से एक पीले रंग की स्कूल बस रोज़ सुबह 8 बजे समय पर मेरे घर के सामने मुझे लेने आती है और मेरी माता जी रोज मुझे बस में बिठा कर स्कूल भेजती हैं।

मेरा विद्यालय शहर की भीड़भाड़ से दूर एकांत स्थल पर है। प्राचीन काल से ही विद्यालयों के लिए ऐसे स्थान को उपयुक्त समझा जाता था, जहाँ पर किसी प्रकार का शोर न हो, क्योंकि पढ़ाई के लिए शांति की आवश्यकता होती है। मेरा विद्यालय बहुत बड़ी जगह में फैला हुआ है, इसके चारों ओर ऊँची-ऊँची दीवारें हैं।

विद्यालय इमारत
मेरे विद्यालय की इमारत चार मंजिला है। जो अंग्रेज़ी के L आकार में निर्मित की गई है। विद्यालय में 80 कमरे हैं। प्रत्येक कमरे में हवादार खिड़कियाँ हैं। इन कमरों की चपरासी द्वारा रोज सफाई की जाती है जिससे हम स्वच्छ माहौल में पढ़ाई कर पाते है। मेरे विद्यालय में कक्षा 6 से कक्षा 12 तक की पढ़ाई होती है। मैं कक्षा आठ में पढ़ता हूँ। मेरी कक्षा विद्यालय के द्वितीय मंजिल पर है।

विद्यालय परिसर
मेरे विद्यालय के पीछे की ओर एक बहुत बड़ा मैदान है। जिसमें हम सभी विद्यार्थी खेल-कूद का आनंद लेते हैं। यही पर हमारा प्रार्थना स्थल है जहां पर हम सुबह प्रार्थना करते है और अपने दिन की शुरुआत करते हैं। विद्यालय के मैदान के चारों ओर बड़े-बड़े वृक्ष लगे हुए हैं और छोटी-छोटी घास लगी हुई है। विद्यालय परिसर में कई छोटी-छोटी वाटिकाएँ भी हैं, जिनमें रंग-बिरंगे फूल खिले होते है। इससे हमारे विद्यालय का वातावरण बहुत ही अच्छा रहता है और यह देखने में भी बहुत सुंदर लगता है।

विद्यालय की सुख-सुविधाएँ
(i) विद्यालय में प्रवेश करते ही माँ सरस्वती का मंदिर है जहाँ हम रोज जाकर प्रार्थना करते हैं और माँ सरस्वती का आशीर्वाद लेकर अपनी पढ़ाई शुरू करते हैं।
(ii) मेरे विद्यालय में कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के विषयों को हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों माध्यमों में पढ़ाया जाता है।
(iii) विद्यालय में जल की व्यवस्था के लिए चार वाटर कूलर लगे हुए हैं जिससे हमें गर्मियों में ठंडा पानी मिलता है और साधारण पानी के लिए पानी की छ: बड़ी टंकियाँ हैं।
(iv) मेरे विद्यालय के दोनों तरफ छात्र छात्राओं के लिए अलग-अलग 10 शौचालयों की व्यवस्था है।
(v) विद्यालय में एक बड़ी लाइब्रेरी है, जिसमें हम हर रोज जाकर समाचार, पत्र पत्रिकाएँ एवं कहानियों की किताबें पढ़ते हैं।
(vi) हमारे विद्यालय में 100 कंप्यूटरों का एक बड़ा कक्ष है, जिसमें हर दिन हमारी एक कक्षा कंप्यूटर से संबंधित होती है।
(vii) मेरे विद्यालय में शिक्षकों के बैठने के लिए एक स्टाफ रूम की व्यवस्था भी है, जिसमें सभी शिक्षक बैठकर आपस में विचार विमर्श करते है।
(viii) मेरे विद्यालय में प्रत्येक कक्षा में विद्यार्थियों के बैठने के लिए टेबल और कुर्सी की व्यवस्था की गई है और गर्मियों में हवा के लिए प्रत्येक कक्षा में चार पंखे लगे हुए है।
(ix) हर कक्षा के बाहर छोटा कूड़ादान रखा गया है, जिसमें विद्यार्थी अपनी कक्षा का कूड़ा डालते हैं। इससे विद्यालय में गंदगी नहीं फैलती।
(x) प्रत्येक कक्षा में एक बड़ा ब्लैक बोर्ड है जहाँ पर हमारे अध्यापक-अध्यापिकाएँ आकर हमें किसी भी विषय के बारे में लिखकर समझाते है।
(xi) विद्यालय में एक तरणताल भी है, जहाँ छात्र तैराकी करते और सीखते हैं।
(xii) विद्यालय में एक विशाल सभागार भी है, जहाँ पर उत्सवों और रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
(xiii) हमारा विद्यालय गरीब छात्रों के लिए वर्दी और पुस्तकों का भी उचित प्रबंध करता है। योग्य छात्रों को छात्रवृत्ति भी दी जाती है।

विद्यालय में अनुशासन
अनुशासन किसी भी व्यक्ति की सफलता में अहम् भूमिका निभाता है। जब बच्चा छोटा होता है तो वह पहले परिवार से तथा बाद में विद्यालय में जाकर अनुशासन के महत्त्व को समझता है। अनुशासन की दृष्टि से हमारा विद्यालय बहुत कठोर है। विद्यालय में यदि कोई विद्यार्थी अनुशासन का उल्लंघन करता है तो उसे कड़ा दंड दिया जाता है। प्रतिदिन वर्दी, नाखून और दाँतों का निरिक्षण किया जाता हैं। प्रत्येक विद्यार्थी के घर पर उसके अनुशासन की मासिक रिर्पोट भेजी जाती है।

विद्यालय के विविध अध्यापक-अध्यापिकाएँ व् विविध विषय
हमारे विद्यालय में कुल 50 अध्यापक-अध्यापिकाएँ है, जो कि प्रत्येक कक्षा में अलग-अलग विषय पढ़ाते हैं। सभी अध्यापक-अध्यापिकाएँ अपने-अपने विषयों में विद्वान है जिस कारण हमें हर विषय सरलता से समझ में आ जाता है।

हमारे विद्यालय में प्रत्येक सप्ताह योगा की कक्षा भी होती है जिसमें योगा करना सिखाया जाता है तथा योगा के महत्त्व को समझाया जाता है। हमें अपने स्वास्थ्य को कैसे अच्छा रखना है, यह भी बताया जाता है। योगा से हमारे तन-मन में चुस्ती और स्फूर्ति बनी रहती है, जिससे हमारा पढ़ाई में मन लगा रहता है।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक
हमारे विद्यालय के प्रधानाध्यापक बहुत ही शांत और अच्छे व्यक्तित्व के व्यक्ति हैं। वह हमें हमेशा कुछ नया करने की सलाह देते हैं और रोज प्रार्थना में हमें एक शिक्षाप्रद कहानी सुनाकर हमें शिक्षा का महत्व बताते है। उन्होंने जब से विद्यालय का कार्यभार संभाला है, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और साथ ही विद्यालय की प्रतिष्ठा भी बढ़ गई है।

विद्यालय में प्रतियोगिताएँ
हमारे विद्यालय में प्रत्येक सप्ताह कोई ना कोई प्रतियोगिता होती रहती है, जैसे – चित्र-कला, वाद-विवाद, कविताएँ आदि की प्रतियोगिताएँ होती रहती है। जिसमें सभी विद्यार्थी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। हमारे विद्यालय में कुछ बड़ी संस्थाओं द्वारा भी प्रतियोगिताएँ रखी जाती है, जिसमें विद्यार्थियों को इनाम के तौर पर कभी-कभी कुछ शुल्क भी दिया जाता है।
हमारे विद्यालय का मैदान बड़ा होने के कारण खेलकूद की जिला स्तरीय प्रतियोगिताएँ हमारे विद्यालय में ही होती है। इसमें हमारे विद्यालय के विद्यार्थी भी भाग लेते हैं। मेरे विद्यालय में हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, क्रिकेट, कबड्डी आदि की प्रतियोगिताएँ होती है।

विद्यालय के समारोह
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है कि विद्यार्थियों का शारीरिक, मानसिक विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक विकास भी हो। इसके लिए हमारे विद्यालय में हर साल 15 अगस्त, 26 जनवरी और वार्षिक उत्सव पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते है। जिनमें सभी विद्यार्थी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन हमारे विद्यालय में एन.सी.सी. के विद्यार्थी परेड करते हैं, इसके बाद हमारे विद्यालय के प्रधानाचार्य हमारे देश का तिरंगा झंडा फहराते हैं, फिर हमारे देश का राष्ट्रगान गाया जाता है और इसके पश्चात देशभक्ति गीतों पर तरह-तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम होते है।
विद्यालय के वार्षिकोत्सव के दिन भी बहुत सारे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। इसके साथ ही स्कूल में अलग-अलग गतिविधियों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय आए विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए जाते है।

विद्यालय का परीक्षा-परिणाम
हमारे विद्यालय का परिणाम हर वर्ष शत-प्रतिशत ही रहता है, जिसके कारण हमारा विद्यालय हमारे शहर का जाना-माना विद्यालय बन गया है। विद्यालय के परीक्षा-परिणाम के शत-प्रतिशत रहने का कारण यहाँ के शिक्षकों का विद्वान और अच्छे व्यक्तित्व का होना भी है, जो विद्यार्थियों के सभी प्रश्नों को धैर्य के साथ सुनते हैं तथा उनका समाधान करते हैं। अध्यापकों के साथ-साथ बच्चों और उनके अभिभावकों की मेहनत के कारण भी विद्यालय का परीक्षा परिणाम हर वर्ष शत-प्रतिशत रहता है।

उपसंहार
किसी भी राष्ट्र की सर्वोत्तम निधि उस राष्ट्र के बच्चों को कहा जाता है। राष्ट्र के विकास के लिए आवश्यक है कि बच्चों का सर्वांगीण विकास अच्छे से हो और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय एक उपयुक्त जगह है। जहाँ पर बच्चा पढ़-लिख कर सुसंस्कृत और सभ्य नागरिक बनता है और देश की प्रगति में अपना सहयोग देता है। विद्यालय और शिक्षा का एक व्यक्ति के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। अतः हम सभी को चाहिए कि हम प्रत्येक बच्चे को विद्यालय और शिक्षा के समीप लाएँ ताकि वह देश की प्रगति में अपना अथाह सहयोग प्रदान करे।

मेरी पाठशाला पर निबंध – My School essay in Hindi (500 words)

मेरा स्कूल बहुत भव्य है, जिसमें तीन मंजिला प्रभावशाली ढंग से संरचित इमारत और शहर के केंद्र में स्थित है। यह मेरे घर से लगभग 3 किमी दूर स्थित है और मैं बस से स्कूल जाता हूँ। मेरा स्कूल राज्य के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में से एक है जहाँ मैं रहता हूँ। यह बिना किसी प्रदूषण, शोर और धूल के बहुत शांतिपूर्ण जगह पर स्थित है।

स्कूल की इमारत के दोनों सिरों पर दो सीढ़ियाँ हैं जो हमें हर मंजिल तक ले जाती हैं। इसमें पहली मंजिल पर अच्छी तरह से सुसज्जित और बड़ी लाइब्रेरी, अच्छी तरह से इंस्ट्रूमेंटेड साइंस लैब और एक कंप्यूटर लैब है। भूतल पर एक स्कूल सभागार है जहाँ सभी वार्षिक कार्य, बैठकें, पीटीएम, नृत्य प्रतियोगिताएं होती हैं।

प्रधान कार्यालय, क्लर्क कक्ष, स्टाफ रूम और सामान्य अध्ययन कक्ष भूतल पर स्थित हैं। स्कूल की कैंटीन, स्टेशनरी की दुकान, शतरंज का कमरा और स्केटिंग हॉल भी भूतल पर स्थित हैं। मेरे स्कूल में स्कूल प्रिंसिपल ऑफिस के सामने दो बड़े सीमेंटेड बास्केटबॉल कोर्ट हैं, जबकि फुटबॉल का मैदान इसके साइड में है।

मेरे स्कूल में एक छोटा सा हरा-भरा बगीचा है, जो हेड ऑफिस के सामने, रंग-बिरंगे फूलों और सजावटी पौधों से भरा है, जो पूरे स्कूल परिसर की शोभा बढ़ाते हैं। मेरे विद्यालय में लगभग 1500 छात्रों ने प्रवेश लिया है। वे हमेशा किसी भी अंतर-स्कूल प्रतियोगिताओं में उच्च रैंक करते हैं।

मेरे विद्यालय के अध्ययन मानदंड बहुत ही रचनात्मक और नवीन हैं जो किसी भी कठिन मामले को बहुत आसानी से समझने में हमारी मदद करते हैं। हमारे शिक्षक हमें बहुत ईमानदारी से सिखाते हैं और हमें व्यावहारिक रूप से सब कुछ बताते हैं।

मेरा स्कूल किसी भी कार्यक्रम में इंटर-स्कूल सांस्कृतिक गतिविधियों और खेल गतिविधियों जैसे पहले स्थान पर है। मेरा स्कूल वर्ष के सभी महत्वपूर्ण दिन मनाता है जैसे कि खेल दिवस, शिक्षक दिवस, अभिभावक दिवस, बाल दिवस, स्कूल वर्षगांठ दिवस, संस्थापक दिवस, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, क्रिसमस दिवस, मातृ दिवस, वार्षिक समारोह, हैप्पी न्यू ईयर , महात्मा गांधी जन्मदिवस, आदि भव्य तरीके से।

हम सह-पाठयक्रम गतिविधियों जैसे तैराकी, स्काउटिंग, एनसी, स्कूल बैंड, स्केटिंग, गायन, नृत्य इत्यादि में भाग लेते हैं। अनुचित व्यवहार और अनुशासनहीन गतिविधियों वाले छात्रों को स्कूल के मानदंडों के अनुसार कक्षा शिक्षक द्वारा दंडित किया जाता है।

हमारे प्रिंसिपल हमारे चरित्र गठन, शिष्टाचार, नैतिक शिक्षा, अच्छे मूल्यों को प्राप्त करने और दूसरों का सम्मान करने के लिए मीटिंग हॉल में रोजाना 10 मिनट तक हर छात्र की कक्षाएं लेते हैं। हमारे स्कूल का समय बहुत ही रोचक और सुखद है क्योंकि हम रोजाना बहुत सारे रचनात्मक और व्यावहारिक काम करते हैं।

कहानीकार, गायन, कविता पाठ, हिंदी और अंग्रेजी में वार्तालाप का हमारा मौखिक मूल्यांकन दैनिक आधार पर कक्षा शिक्षक द्वारा लिया जाता है। तो, मेरा स्कूल दुनिया का सबसे अच्छा स्कूल है।