मेरा प्रिय नेता – सुभाषचन्द्र बोस पर लघु निबंध Short Essay on Mera Priye Neta Subash Chander Bose in Hindi

Mera Priye Neta Subash Chander Bose par laghu nibandh

प्रस्तावना- नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का नाम कौन सा ऐसा भारतीय है जिसने न सुना हो। वे तो ऐसे नेता थे जिन्होंने भारत माता को पराधीनता के चंगुल से छुड़ाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया है। वे ही मेरे सर्वप्रिय नेता थे।

जन्म और परिचय- सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 26 जनवरी सन् 1897 ईसवीं को उड़ीसा में कटक नामक स्थान पर हुआ था। उनके पित उच्च कोटि के वकील थे। उनका नाम श्रीजानकी दास था। उन्होंने कटक में ही प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की थी। उच्च शिक्षा प्रेसीडेंसी कालेज से प्राप्त करने के बाद आप आई.सी.एस. की परीक्षा पास करने के लिए इंग्लैंड चले गए। बी.ए. में आप विश्वविद्यालय में सर्वप्रथम घोषित किए गए थे। आई.सी.एस. की परीक्षा भी आपने विशेष योग्यता के साथ उत्तीर्ण की थी।

आप चाहते तो आई.सी.एस. की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सुख सुविधा की जीवन गुजार सकते थे, पर आपके मन में तो देश भक्ति की भावना भरी हुई थी। अपने सुख सुविधा की जीवन छोड़ देश को स्वतन्त्र कराने के लिए त्याग और बलिदान का रास्ता चुना।

राजनीति में प्रवेश- सन् 1921 में गांधी जी ने असहयोग आन्दोलन आरम्भ किया। सुभाषचन्द्र बोस ने भी इस आन्दोलन मे सक्रिय भाग लिया था। सन् 1930 के नमक आन्दोलन का नेतृत्व आप ने ही किया था।

भारत में जब प्रिंस आफ वेल्स आए तो उनके विरोध में प्रदर्शन किया। सरकार ने आपको इस प्रदर्शन में भाग लेने पर छः मास का कारावास का दंड दिया। कारावास से मुक्त होने पर उन्होंने बंगाल में बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए दिन रात एक कर दिया। सरकार ने सुभाषचन्द्र बोस को राजनीतिक गतिविधियों में तेजी से भाग लेने पर गिरफतार कर लिया और उन्हें मांडले जेल में भेज दिया।

कंग्रेस की अध्यक्ष- सुभाषचन्द्र बोस जनता में बहुत प्रिय हो गए। उन्हें हरपुरा में अखिल भारतीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुन लिया गया। किन्तु उन्होंने गांधी जी और जवाहर लाल नेहरू इत्यादि नेताओं से सहयोग न मिल पाने के कारण त्याग पत्र दे दिया।

कंग्रेस की नीतियों में उन्हें विश्वास नहीं रहा। इसलिए उन्होंने ‘फारवर्ड’ नामक संस्था की स्थापना की।

जर्मनी गमन- आपके उग्र विचारों से डर कर सरकार ने आपको घर पर ही नजर बंद कर दिया। आपने भेष बदल लिया और जियाउदीन नाम रखकर पेशावर होते हुए काबुल चले गए। काबुल से आप जर्मनी चले गए। हिटलर ने उन्हें सहायता का वचन दिया। इसके बाद वे जापान गए। जापान ने भी उन्हें सहायता का वचन दिया।

आजाद हिन्द फौज का गठन- सुभाषचन्द्र बोस ने आजाद हिन्द फौज का गठन किया। यहाँ आपने फौज का गठन करने के लिए चंदा इक्ट्ठा किया। लोगों ने तन, मन और धन से सुभाषचन्द्र बोस की सहायता की। महिलाओं ने अपने मंगल सूत्र तक उनके चरणों में रख दिए।

नेता जी का नारा- नेता जी ने देशवासियों को ललकारते हुए कहा था कि ‘तुम मुझे खून दो’ मैं तुम्हें आजादी दूंगा। देश के दुर्भाग्य से जापान की हार हो गई और आजाद हिन्द फौज के सैनिकों को गिरफतार कर लिया गया।

मृत्यु- 23 अगस्त सन् 1945 को विमान दुर्घटना में सुभाषचन्द्र बोस का स्वर्गवास हो गया।

उपसंहार- सुभाषचन्द्र बोस के निधन से भारत को अपार क्षति हुई। सुभाषचन्द्र बोस जैसा वीर, निर्भीक राष्ट्र नेता मर कर भी अमर हो जाता है। उनका आज भी भारतवासी बड़े आदर और श्रद्धा से नाम लेते हैं।