Deepawali par laghu nibandh

प्रस्तावना- भारत में समय-समय पर अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। इन त्योहारों से जीवन में आनंद का संचार होता है। जीवन की नीरसता समाप्त होती है। जीवन में थोड़ा परिवर्तन आता है। दीपावली तो है ही खुशियों का त्योहार।

दीपावली महत्व- दीपावली स्वच्छता का पर्व है। लोग दीपावली के आने से पहले अपने घरों को साफ सुथरा करते हैं। घरों में सफेदी कराते हैं। इससे जीवन में स्वच्छता और सफाई को महत्व मिलता है।Short Essay on Deepawali
वर्षा ऋतु के पश्चात कार्तिक मास में यह पर्व आता है। वर्षा ऋतु में वर्षा के कारण अनेक प्रकार के कीटाणु आदि पैदा हो जाते हैं। सफाई लीपा पोती से और घरों में रंग रोगन करने से कीटाणुओं के नाश में बहुत सहायता मिलती है।

दीपावली कब मनाई जाती है- दीपावली हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है। यह कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनायी जाती है। इससे पहले त्रयोदशी का त्योहार मनाया जाता है। वैद्य लोग इसी दिन धन्वतरि जयन्ती मनाते हैं। इसके दूसरे दिन तर्क चर्तुदशी मनाई जाती है। इस दिन घर की सारी गंदगी को लोग बाहर निकाल देते हैं। इसके अगले दिन मुख्य त्योहार दीपावली मनायी जाती है।
दीपावली मनाने का कारण- इसी दिन राम 14 वर्ष के बनवास के बाद और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या आए थे। राम के अयोध्या आने पर अयोध्यावासी बहुत खुश हुए थे। उन्होंने राम का स्वागत दीपक जला कर किया था। तब से यह पर्व दीपावली के रूप में मनाया जाता है।

दीपावली कैसे मनाई जाती है-इस दिन लोग अपने घरों को खूब सजाते हैं। घर में अनेक प्रकार की मिठाइयाँ लाते हैं। कई लक्ष्मी की मूर्ति अथवा कलेण्डर लाते हैं। दीपक भी लाते हैं। रात होते ही दीपकों से घर का आंगन जगमगा उठता है। आजकल शहरों में दीपकों के स्थान पर बल्बों की लड़ियाँ टिमटिमाती दिखाई देती हैं। लोग अपने घरों के साथ साथ अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों को खूब सजाते हैं।

यह भी पढ़िए  पाश्चात्य संस्कृति - भारतीय संस्कृति निबंध Essay on Indian vs western culture in Hindi

दीपावली के ही दिन जैन मत के संस्थापक और चैबीसवें तीर्थकर महावीर का निर्वाण हुआ था। आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद सरस्वती का निर्वाण भी दीपावली के दिन हुआ था। इसी दिन सिक्खों के छठे गुरू जी हरगोबिन्द सिंह अमृतसर पधारे थे। इसलिए इस पर्व को सभी लोग अपने अपने तरीके से सोल्लासपूर्वक मनाते हैं।

दीपावली पर घूत क्रीड़ा- कुछ लोग इस पवित्र पर्व के अवसर पर जुआ खेलते हैं और शराब पीते हैं। उनका विश्वास है कि इस दिन जीत जाने से भविष्य में सदा विजय ही मिलेगी। वे भूज जाते हैं कि जुआ खेलना बहुत हानिकारक है। इससे कई बार घर तबाह हो जाता है। अतः इस कुविचार और कुप्रथा को समूल नष्ट करने का प्रयत्न किया जाना चाहिए।

उपसंहार- हमें दीपावली का त्योहार धूम धाम और श्रद्धा से मनाना चाहिए। किन्तु कुप्रथाओं से बच कर चलना चाहिए। यह पर्व वास्तव में ज्योति पर्व है। हमें ज्ञान रूपी प्रकाश से अपने मन के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। यही इस पर्व का अमर संदेश है।

हिंदी वार्ता से जुडें फेसबुक पर-अभी लाइक करें

 
Ritu
ऋतू वीर साहित्य और धर्म आदि विषयों पर लिखना पसंद करती हैं. विशेषकर बच्चों के लिए कविता, कहानी और निबंध आदि का लेखन और संग्रह इनकी हॉबी है. आप ऋतू वीर से उनकी फेसबुक प्रोफाइल पर संपर्क कर सकते हैं.