Short Hindi Essay on Diwali | Diwali par Nibandh | दीपावली पर लघु निबंध

Diwali Essay in Hindi, Deepawali par laghu nibandh

प्रस्तावना- भारत में समय-समय पर अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। इन त्योहारों से जीवन में आनंद का संचार होता है। जीवन की नीरसता समाप्त होती है। जीवन में थोड़ा परिवर्तन आता है। दीपावली तो है ही खुशियों का त्योहार।

दीपावली महत्व- दीपावली स्वच्छता का पर्व है। लोग दीपावली के आने से पहले अपने घरों को साफ सुथरा करते हैं। घरों में सफेदी कराते हैं। इससे जीवन में स्वच्छता और सफाई को महत्व मिलता है।Short Essay on Deepawali
वर्षा ऋतु के पश्चात कार्तिक मास में यह पर्व आता है। वर्षा ऋतु में वर्षा के कारण अनेक प्रकार के कीटाणु आदि पैदा हो जाते हैं। सफाई लीपा पोती से और घरों में रंग रोगन करने से कीटाणुओं के नाश में बहुत सहायता मिलती है।

दीपावली कब मनाई जाती है- दीपावली हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है। यह कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनायी जाती है। इससे पहले त्रयोदशी का त्योहार मनाया जाता है। वैद्य लोग इसी दिन धन्वतरि जयन्ती मनाते हैं। इसके दूसरे दिन तर्क चर्तुदशी मनाई जाती है। इस दिन घर की सारी गंदगी को लोग बाहर निकाल देते हैं। इसके अगले दिन मुख्य त्योहार दीपावली मनायी जाती है।
दीपावली मनाने का कारण- इसी दिन राम 14 वर्ष के बनवास के बाद और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या आए थे। राम के अयोध्या आने पर अयोध्यावासी बहुत खुश हुए थे। उन्होंने राम का स्वागत दीपक जला कर किया था। तब से यह पर्व दीपावली के रूप में मनाया जाता है।

दीपावली कैसे मनाई जाती है-इस दिन लोग अपने घरों को खूब सजाते हैं। घर में अनेक प्रकार की मिठाइयाँ लाते हैं। कई लक्ष्मी की मूर्ति अथवा कलेण्डर लाते हैं। दीपक भी लाते हैं। रात होते ही दीपकों से घर का आंगन जगमगा उठता है। आजकल शहरों में दीपकों के स्थान पर बल्बों की लड़ियाँ टिमटिमाती दिखाई देती हैं। लोग अपने घरों के साथ साथ अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों को खूब सजाते हैं।

दीपावली के ही दिन जैन मत के संस्थापक और चैबीसवें तीर्थकर महावीर का निर्वाण हुआ था। आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद सरस्वती का निर्वाण भी दीपावली के दिन हुआ था। इसी दिन सिक्खों के छठे गुरू जी हरगोबिन्द सिंह अमृतसर पधारे थे। इसलिए इस पर्व को सभी लोग अपने अपने तरीके से सोल्लासपूर्वक मनाते हैं।

Diwali Nibandh

दीपावली पर घूत क्रीड़ा- कुछ लोग इस पवित्र पर्व के अवसर पर जुआ खेलते हैं और शराब पीते हैं। उनका विश्वास है कि इस दिन जीत जाने से भविष्य में सदा विजय ही मिलेगी। वे भूज जाते हैं कि जुआ खेलना बहुत हानिकारक है। इससे कई बार घर तबाह हो जाता है। अतः इस कुविचार और कुप्रथा को समूल नष्ट करने का प्रयत्न किया जाना चाहिए।

उपसंहार- हमें दीपावली का त्योहार धूम धाम और श्रद्धा से मनाना चाहिए। किन्तु कुप्रथाओं से बच कर चलना चाहिए। यह पर्व वास्तव में ज्योति पर्व है। हमें ज्ञान रूपी प्रकाश से अपने मन के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। यही इस पर्व का अमर संदेश है।

10 Lines On Diwali In Hindi For Class 4,5 – Diwali par Nibandh

*1. भारत में अनेकों त्यौहार मनाए जाते हैं उन्ही में एक सबसे ज्यादा मनाया जाने वाला त्यौहार है दिवाली |

*2. दिवाली दीपों का त्योहार है बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार है|

*3. भगवान श्री राम ने रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत का निशान छोड़ा था|

*4. 14 साल के वनवास को काट कर राम जी अपने राज्य अयोध्या वापस आए थे और अपनी गद्दी को संभाला था|

*5. रामजी के लौटने की ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने ख़ुशी ख़ुशी घी के दीयों से पूरी अयोध्या नगरी को रोशन कर दिया था।

*6. दिवाली का त्यौहार खुशियों का त्यौहार होता है इस दिन सभी हिंदू धर्म के व्यक्ति दिवाली के त्योहार को मनाने के लिए अपने रिश्तेदारों मित्रों आदि में खुशियां बांटते हैं|

*7. दिवाली के दिन दीप जलाए जाते हैं दिवाली का त्यौहार कार्तिक मास में आता है|

*8. दिवाली का त्यौहार अमावस्या की रात को मनाया जाता है अमावस्या की अंधेरी रात को खत्म करने के लिए दिये जलाना शुभ माना जाता है|

*9. दिवाली से पहले धनतेरस और धनतेरस के बाद छोटी दिवाली आती है छोटी दिवाली के बाद गोवर्धन की पूजा होती है और उसके अगले दिन भैया दूज आता है|

*10. दीवाली की रात को लोग माता लक्ष्मी भगवान गणेश की पूजा कर उनसे धन की कामना करते हैं|

Essay on Diwali for class 6 | दीपावली पर निबंध | Diwali par Nibandh

दीपावली दीपों का त्योहार है। प्रतिवर्ष पूरे भारत सहित विश्व को कोने-कोने में हिन्दू धर्मावलम्बियों द्वारा इस पर्व को पूरे हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार का हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्व है। इसे प्रकाश का त्योहार भी कहा जाता है। प्रतिवर्ष आश्विन मास की अमावश्या को दीप जलाकर और पटाखे छोड़ कर इसका आनंद लेते हैं।

दीपावली क्यों मनाया हटा है इसके पीछे अनेक पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। इनमें से एक प्रसिद्ध कथा है की जब भगवान राम, रावण के वध के पश्चात अयोध्या लौटे तो वो दिन अमावश्या का था। अतः लोगों ने अपने प्रिय राम के स्वागत और अंधेरे को दूर भागने के लिए पूरे अयोध्या को दीपों से प्रज्वलित कर दिया था। अतः ये प्रथा तब से चलने लगी। एक अन्य मान्यता के अनुसार इसी दिन धन और संपन्नता की देवी लक्ष्मी, राजा बाली के चंगुल से आजाद हुई थी। चंद कलेंडर के अनुसार इस दिन को हिन्दू कलेंडर की प्रारम्भिक तिथि अर्थात पहली तारीख भी मानी जाती है। अतः लोग इन मान्यताओं के अनुसार पूरे हर्षोउल्लास के साथ देश-विदेश के विभिन्न भागों में दीपावली मानते हैं।

दीपावली के आने से कुछ दिनों पूर्व से ही लोग अपने घरों की साफ सफाई और रंग रोगन के कार्य में लग जाते हैं। इसके पश्चात लोग घरों पर विभिन्न प्रकार के बल्ब और रंगीन बल्ब से अपने घर बाहर सजाते हैं। घरों में रंगोलियां बनाई जाती है। अनेक प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। हर घर में गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा बिठाई जाती है। फूलों से घरों के प्रवेश द्वार को सजाया जाता है। दुकानदार अपने-अपने दुकानों में भी पूजन करते हैं। लोगों द्वारा सहर्ष जुआ खेला जाता है। घरों को दिये जलाकर प्रकाशित किया जाता है। बच्चे-बूढ़े सभी पटाखे छोड़ते हैं। पूरा दिन और रात सुहावना होता है।

वैसे तो दीपावली जब भी आती है लोगों में उत्सुकता और अपने घरों को नए रूप में सजाने की बेचैनी सहज ही देखी जा सकती है, लेकिन हर वर्ष देश के विभिन्न भागों में कोई न कोई दुर्घटना जरूर हो जाती है। लोगो की नासमझी और सही तरीके से पटाखे नहीं छोड़ने के कारण कई लोग पटाखों से घायल हो जाते हैं। कई बार तो खलिहान, घरों और दुकानों में पटाखों से आग लग जाती है। बच्चों को तो सबसे अधिक खतरा होता है। पटाखों के अत्यधिक प्रयोग से वातावरण भी प्रदूषित हो जाता है।

अतः हमें पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों से ही इस रोचक पर्व का आनंद लेना चाहिए। पटाखों के प्रयोग के समय सावधानी बरतना चाहिए। जब भी बच्चे पटाखों का प्रयोग करें, साथ में बड़े लोगों को उनका मार्गदर्शन करना चाहिए। हमें दिये, बत्ती और मिठाइयों के साथ जहां तक संभव हो इस पर्व को मनाने चाहिए।

Diwali Essay in Hindi class 7 – Diwali par Nibandh

दिवाली जिसे हम दीपावली के नाम से भी जानते हैं। दिवाली को रोशनी का उत्सव भी कहा जाता है। दिवाली हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है। दिवाली को हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है।

दिवाली असत्य पर सत्य की विजय और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। दिवाली को मनाने के पीछे एक धार्मिक कथा है। यह कथा भगवान राम की कथा है। भगवान राम श्री कृष्ण के ही अवतार है।

भगवान राम रावन का वद करने के बाद सीता माता और अपने छोटे भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। और इस दिन अयोध्या के लोगों ने उनका स्वागत करने के लिए अपने घरों को दीये लगाकर सजाया था।

उसी दिन को हम दिवाली के रूप में मनाते हैं। दीपावली के दिन रात को माता लक्ष्मी जो की धन कि देवी है उनकी पूजा की जाती है। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा भी की जाती है।

लोगों की ऐसी मान्यता है कि दिवाली के दिन अगर आप कोई नयी वस्तु खरीदते हैं। तो आपके घर में लक्ष्मी माता का आगमन होता है। और यही कारण है कि दिवाली में हर कोई किसी ना किसी चीज की खरीदी करता है।

दिवाली के दिन बाजारों में काफी भीड़ हो जाती है। क्योंकि दिवाली के दिनों में सभी लोग और बच्चे कपड़े, पटाखे और मिठाईयां बाजार से खरीदते हैं। दिवाली के दिन सभी नए खरीदे हुए कपड़ों को पहनकर तैयार होते हैं।

दिवाली के दिनों में सभी लोग अपने घरों को रंग बिरंगी लाइट लगाकर सजाते हैं। दिवाली आने से पहले लोग अपने घर को साफ करते हैं और घरों पर नया रंग चढ़ाते हैं। दिवाली के दिन शाम में सभी अपने घर पर श्री लक्ष्मी माता की आराधना करते हैं।

इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा होने के बाद सभी अपने घरों से बाहर निकलकर पटाखे फोड़ते हैं। इस दिन सभी एक दूसरे को प्रसाद और उपहार बांटते हैं। दिवाली के इस पावन दिन सभी माता लक्ष्मी से धन और जीवन में खुशियों की मांग करते है।

अंधकार पर प्रकाश की विजय का यह त्यौहार लोगों के बीच प्रेम और स्नेहा लेकर आता है। दिवाली के इन दिनों सभी घरों में रंग बिरंगी रंगोलियां बनाई जाती है। इन दिनों सुबह 5:00 बजे उठकर दीपक जलाए जाते हैं।

और रात को पटाखों की आतिशबाजी की जाती है। बुराई पर अच्छाई की जीत का यह त्यौहार समाज में सदभावना, उल्लास, भाईचारे और आपसी प्रेम का संदेश फैलाता है। दिवाली के पहले दिन को धनतेरस या फिर धन त्रयोदशी कहते हैं।

इस दिन को लक्ष्मी माता की पूजा की जाती है। लोक लक्ष्मी माता को प्रसन्न करने के लिए अपने घर मैं उपस्थित धन को लक्ष्मी माता के आगे रखते हैं। दिवाली के दूसरे दिन को नारक चतुर्दशी या फिर उसे छोटी दीपावली भी कहते हैं।

इस दिन को इसलिए मनाते हैं क्योंकि इस दिन भगवान श्री कृष्णा ने राक्षस नरकासुर का वध किया था। छोटी दिवाली के दिन सुबह को काली माता की पूजा भी की जाती है। तीसरा दिन जोकि दिवाली का मुख्य दिन होता है।

इस दिन माता लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। यही वह दिन है जिस दिन सभी लोग अपने परिवारजनों और मित्रों में मिठाइयां और उपहार बांटकर पटाखों की आतिशबाजी करते हैं। दीवाली के चौथे दिन को गोवर्धन पूजा की जाती है।

दिवाली के इस चौथे दिन सभी लोग भगवान श्री कृष्णा की आराधना करते हैं। इसके बाद दिवाली के पांचवे दिन भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है। वैसे कहा जाए तो दिवाली त्योहारों का संग्रह है।

भाई दूज भाई और बहन के प्रेम के लिए समर्पित त्यौहार है। दिवाली भारत देश का एक प्रमुख सांस्कृतिक त्योहार है। दिवाली त्योहार को हिंदू, मुस्लिम, सीख, ईसाई और अन्य धर्म के लोग एक साथ मिलकर मनाते है।

यह हमारे देश की अनेकता में एकता को दर्शाता है। दिवाली के दिनों बच्चों से लेकर बड़ों तक में एक अलग ही उत्साह होता है।

Diwali Essay in Hindi Class 8 – Diwali par Nibandh

दिवाली त्योहार को हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता है। दिवाली हिंदुओं का एक बड़ा त्यौहार है जो कि उनका धार्मिक और सामाजिक पर्व है। दिवाली किस दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या वापस आए थे।

इस दिन अयोध्या के लोगों ने दिए जलाकर उनका स्वागत किया था। दीपावली का अर्थ है दीपों की कतार। दिवाली त्यौहार आने से पहले लोग अपने घर दार की साफ सफाई करते है।

इन दिनों बाजार में सबसे ज्यादा खरेदी और बिक्री की जाती है। दिवाली के दिनों में नए कपड़े और चीजों को खरीदते हैं। दिवाली के दिनों में सब लोग अपना घर साफ करते हैं जिस वजह से सभी तरफ सफाई दिखाई देती है।

इस दिन सभी अपने घर के साथ-साथ अपने ऑफिस, दुकान को भी साफ करते हैं। दिवाली के दिनों में लोग अपने घर और दफ्तर को सजाकर रखते हैं। दिवाली त्योहार पूरे 5 दिन तक चलता है।

दिवाली का पहला दिन धनतेरस का होता है। इस दिन रात को सभी के घरों में तेरह दिए जलाए जाते है। इस दिन गौ माता की भी पूजा की जाती है। दिवाली के दूसरे दिन लोग दिन निकलने से पहले उठकर स्नान करते हैं और फिर भगवान की पूजा करते हैं।

दिवाली का तीसरा दिन बहुत ही उत्साह से भरा हुआ दिन होता है। यह दिवाली का प्रमुख दिन होता है। इस दिन सभी के घर में सफाई और सजावट तथा दिए लगाकर रोशनी की जाती है।

इस दिन सभी के घरों में माता लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना की जाती है और फल मिठाई का प्रसाद चढ़ाया जाता है। इस दिन सभी लोग नए खरीदे हुए कपड़े पहनते हैं और पटाखे जलाकर आतिशबाजी का आनंद उठाते हैं।

इस दिन सभी व्यापारी नए बही खातों की पूजा करते हैं। दिवाली के चौथे दिन गोवर्धन की पूजा की जाती है। और उसके अगले दिन भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है। भाई दूज दिवाली के पांचवें दिन को मनाया जाता है।

यह भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। इस दिन सभी बहने अपने भाई की आरती उतारती है। उसे अच्छा खाना खिला कर उपहार देती है। दिवाली के इन 5 दिनों में जितने भी त्योहार आते हैं उन्हें सभी लोग मिलजुल कर मनाते हैं।

दिवाली त्योहार आपसी मेलजोल बढ़ाने का वैभवशाली त्यौहार है। इस त्यौहार का और एक फायदा यह भी है कि सभी तरफ साफ-सफाई की जाती है और हमारा परिसर स्वच्छ रहता है। दिवाली के दिनों में सभी के मन के गिले-शिकवे दूर हो जाते हैं।

Hindi Essay on Diwali class 9 – Diwali par Nibandh

दीपावली का अर्थ है – दीपों की पंक्तियां। दीपावली के दिन प्रत्येक घर दीपों की पंक्तियों से शोभायमान रहता है। दीपों, मोमबत्तियों और बिजली की रोशनी से घर का कोना-कोना प्रकाशित हो उठता है। इसलिए दीपावली को रोशनी का पर्व भी कहा जाता है।

दीपावली कार्तिक माह की अमावस को मनाई जाती है। रोशनी से अंधकार दूर हो जाता है। इसी तरह मन में अच्छे विचारों को प्रकाशित कर हम मन के अंधकार को दूर कर सकते हैं।

यह त्योहार अपने साथ ढेरों खुशियां लेकर आता है। एक-दो हफ्ते पूर्व से ही लोग घर, आंगन, मोहल्ले और खलिहान को दुरुस्त करने लगते हैं। बाजार में रंग-रोगन और सफेदी के सामानों की खपत बढ़ जाती है। ठंडे मौसम की हल्की-सी आहट से तन-मन की शीतलता बढ़ जाती है।

दीपावली का दिन आने पर घर में खुशी की लहर दौड़ जाती है। बाजार में मिट्टी के दीपों, खिलौनों, खील-बताशों और मिठाई की दुकानों पर भीड़ होती है। दुकानदार, व्यापारी अपने बहीखातों की पूजा करते हैं और कई इसी दिन नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत भी करते हैं।

संध्या के समय घर-आंगन और बाजार जगमगा उठते हैं। पटाखों की गूंज और फुलझड़ियों के रंगीन प्रकाश से चारों ओर खुशी का वातावरण उपस्थित हो जाता है। घर-घर में पकवान बनाए जाते हैं। बच्चों की स्कूल की छुट्टियों से इस त्योहार का मजा दोगुना हो जाता है।

रात्रि में पटाखे चलाए जाते हैं। लगभग पूरी रात पटाखों का शोरगुल बना रहता है। दीपावली की बधाइयों के आदान-प्रदान का सिलसिला चल पड़ता है।

दीपावली के दिन भारत में विभिन्न स्थानों पर मेले लगते हैं। दीपावली एक दिन का पर्व नहीं अपितु पर्वों का समूह है। दशहरे के पश्चात ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती है। लोग नए-नए वस्त्र सिलवाते हैं। दीपावली से दो दिन पूर्व धनतेरस का त्योहार आता है। इस बाजारों में चारों तरफ चहल-पहल दिखाई पड़ती है।

बर्तनों की दुकानों पर विशेष साजसज्जा व भीड़ दिखाई देती है। धनतेरस के दिन बरतन खरीदना शुभ माना जाता है अतैव प्रत्येक परिवार अपनी-अपनी आवश्यकता अनुसार कुछ न कुछ खरीदारी करता है। इस दिन तुलसी या घर के द्वार पर एक दीपक जलाया जाता है। इससे अगले दिन नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली होती है। इस दिन यम पूजा हेतु दीपक जलाए जाते हैं।

दीपावली से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाएं : Importance of Diwali

इस दिन भगवान राम, लक्ष्मण और माता जानकी 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे और उनके आने की खुशी में नगरवासियों ने घर-घर घी के दीये जलाए थे। तभी से इस त्योहार की शुरुआत हुई।

लक्ष्मी पूजा के दूसरे दिन “गोवर्धन पूजा” मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने इन्द्र को पराजित किया था।

दीपावली का पर्व अकेले भारत में ही धूमधाम से नहीं मनाया जाता बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में दीप पर्व अपनी छटा बिखेरता है। जिन देशों में हिंदुओं और सिखों की बड़ी आबादी है, वहां तो रोशनी का जलसा देखते ही बनता है।

श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी, मॉरीशस, केन्या, तंजानिया, दक्षिण अफ्रीका, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो, नीदरलैंड्स, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में दीपावली मनाई जाती है।

जैसे-जैसे भारतीय प्रवासियों की संख्या बढ़ रही है वैसे-वैसे दीपावली मनाने वाले देशों की संख्या भी बढ़ रही है। कनाडा के ओंटारियो स्थित मिसिसागा में रहने वाली अंजलि बक्शी ने फोन पर कहा ‘यहां तेज आवाज वाले पटाखे छोड़ने पर रोक है। यहां अलग-अलग केंद्र हैं, जहां हम लोग अपने त्योहार मनाने के लिए एकत्र होते हैं। इस दिन हम अपने घरों को रोशनी से सजाते हैं और शाम को दीपावली उत्सव के लिए इकट्ठे हो जाते हैं। कई बार तो हमने भारतीय दूतावास में भी दीपावली मनाई है।

नेपाल के काठमांडो में पिछले कई सालों से रह रहे अजय कारकी ने फोन पर बताया कि यहां दीपावली को स्वान्ति कहा जाता है। यह पर्व यहां पांच दिन मनाया जाता है। परंपरा वैसी ही है जैसी भारत की है। थोड़ी भिन्नता भी है। पहले दिन कौवे को, दूसरे दिन कुत्ते को भोजन कराया जाता है। लक्ष्मी पूजा तीसरे दिन होती है। इस दिन से नेपाल संवत शुरू होता है इसलिए व्यापारी इसे शुभ दिन मानते हैं।

कारकी ने बताया कि चौथा दिन नए साल के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन महापूजा होती है और बेहतर स्वास्थ्य की कामना की जाती है। पांचवा दिन भाई टीका होता है, जब बहनें भाइयों का तिलक करती हैं।

श्रीलंका में तमिल समुदाय के लोग इस दिन तेल स्नान के बाद नए कपड़े पहनते हैं और ‘पोसई’ (पूजा) कर बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। शाम को पटाखे छोड़े जाते हैं।

मलेशिया में हिंदू सूर्य कैलेंडर के सातवें माह में दीपावली मनाई जाती है। सिंगापुर में इस दिन सरकारी छुट्टी रहती है। वहां की दीपावली देखकर लगता है जैसे ‘नन्हे भारत’ में दीपावली मनाई जा रही है। वहां ‘हिन्दू एंडाउमेंट बोर्ड ऑफ सिंगापुर’ कई सांस्कृतिक आयोजन करता है।

कैरेबियाई देशों में त्रिनिदाद और टोबैगो में बड़ी संख्या में भारतीय बसे हैं और वहां खूब धूमधाम से दीपावली मनाई जाती है। लोग घरों में पूजा करते हैं और रोशनी से घर जगमगा उठते हैं।

ब्रिटेन में भी दीप पर्व मनाया जाता है और लीसेस्टर में तो बहुत बड़ा आयोजन होता है। अमेरिका में वर्ष 2009 में पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में दीवाली का परंपरागत दीया जलाया था।

व्हाइट हाउस में दीवाली मनाने की शुरुआत जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने की थी, लेकिन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने निजी तौर पर खुद कभी उत्सव में भाग नहीं लिया। उनके प्रशासन के शीर्ष अधिकारी आयोजन में भाग लेते थे।

ऑस्ट्रेलिया में भी दीपावली की धूम रहती है और मेलबोर्न में तो श्री शिवविष्णु मंदिर में दीपावली की रौनक देखते ही बनती है। न्यूजीलैंड में भी रह रहे भारतीय रोशनी का पर्व मनाते हैं।

Diwali Essay in Hindi class 10 – Diwali par Nibandh

हमारी भारतीय परंपरा में पर्वों का एक अलग ही महत्व रहा है। जिसे प्राचीन काल से हमारे पूर्वजों और वर्तमान परिवेश में हम सब के द्वारा मनाया जाता है और शायद यही कारण है कि आज के दौर में भी संपूर्ण विश्व द्वारा भारत को एक अलग नजरिया से देखा जाता है। भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख पर्वों में से एक है – दीपावली जिसके बारे में आज हम आपको विस्तृत जानकारी देने वाले हैं।

अन्य कई पर्वों के तरह ही दीपावली भी हमारे भारतवर्ष के इस पवित्र भूमि पर हिंदुओं द्वारा मनाए जाने वाले प्रमुख त्यौहार है। दीपावली का त्यौहार विशेषकर वैश्य-वर्ग का माना जाता है। यह वैश्यो का त्योहार विशेष रूप से इसलिए माना जाता है, कि वैश्य-वर्ग का कार्य था – कृषि और व्यवसाय। कृषि कार्य इस समय समाप्त-सा माना जाता है। क्योंकि खरीफ, भदई का काम पूरा हो चुका होता है। रबी की बुआई समाप्त हो चुकी होती है। व्यवसायियों को नए माल के लिए बाहर जाना पड़ता है तथा कृषकों से उनके माल की ढुलाई में सहायता मिलती है। क्योंकि वे खाली रहते हैं। कतिपय किसान कुछ थोड़ा-बहुत व्यवसाय भी करते हैं।

इस त्यौहार को मनाकर कर सभी अपने अपने कार्यों में लग जाते हैं। परंतु अगर हम आज के परिवेश का बात करें तो भारत के लगभग सभी जातियों, धर्मों और संप्रदायों के लोग भारत वर्ष के इस महान पर में दिल खोल कर भाग लेते हैं।

दीपावली का पर्व कब मनाया जाता है?

दीपावली का यह महापर्व वर्षा और शरद ऋतु के संधिकाल का मंगलमय पर्व माना जाता है। यह पर्व कार्तिक माह के पंद्रहवें दिन अर्थात अमावस्या के दिन मनाया जाता है। ज्वार, बाजरा, मक्का, धान, कपास आदि इसी ऋतु की देन है। इन फसलों को खरीफ की फसल कहते हैं। शरद ऋतु के आरंभ होने के कारण मौसम अत्यंत सुहावना होता है। वातावरण में चारों ओर उल्लास और आनंद दिखाई देता है।

दीपावली मनाए जाने के पीछे की पौराणिक कथाएं।

यह बात तो हम सभी भारतवर्ष के लोग पहले से ही अच्छी तरह जानते हैं कि, हमारे भारतवर्ष के इस तपोभूमि पर ऐसा कोई भी पर्व नहीं है। जिनके मनाए जाने के पीछे कोई धार्मिक कथा हो ही नहीं। हमारे इस देश के पवित्र भूमि पर जो भी छोटे से छोटे और बड़े से बड़े पर मनाए जाते हैं। उनके मनाए जाने के पीछे कोई न कोई धार्मिक कथा अवश्य ही जुड़ी होती है दीपावली के मनाए जाने के पीछे भी अनेक पौराणिक कथाएं हमारे समाज में प्रचलित – एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि, जब महाराजा श्री रामचंद्र जी 14 वर्ष का बनवास जीवन बिता कर लंकापति रावण का वध करके अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वापस अपने नगर अयोध्या में पदार्पण किए और अयोध्या के सिंहासन पर आरूढ़ हुए तो उनके आगमन और विजय के उपलक्ष्य में उस समय अयोध्या वासियों ने संपूर्ण अयोध्या नगरी को दीपमालाओं से प्रकाशित करके अपने प्रसन्नता को व्यक्त किया।

उसी स्मृति में तब से लेकर आज तक इस पर्व को दीपावली के रूप में मनाया जाता है। दूसरी कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि, द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण द्वारा जब नकासुर का वध किया गया तथा नारी उद्धार किए तो लोग इस स्मृति में ही इस पर्व को मनाते हैं। तीसरी कथा के अनुसार माना जाता है कि, वामन का रूप धारण कर जब भगवान विष्णु ने दैत्यराज बलि की दानशीलता की परीक्षा लेकर उनके अहंकार को मिटाया था। तभी से ही भगवान विष्णु की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है।

चौथी कथा के अनुसार ऐसी मान्यता है कि, इस दिन भगवान ने राजा बलि को पाताल लोक का इंद्र बनाया था। तब इन्द्र ने बड़ी प्रसन्नता पूर्वक दीप जलाकर अपनी खुशी को प्रकट किया कि, मेरा स्वर्ग का सिंहासन बच गया। तब से लेकर आज तक इसी याद में इस पर्व को दीपावली के रूप में मनाया जाता है।

पांचवी कथा के अनुसार कहा जाता है कि, इसी दिन समुंद्र मंथन के समय क्षीरसागर से लक्ष्मी जी प्रकट हुई थी और भगवान को अपना पत्नी स्वीकार की थी। छठी कथा के अनुसार मान्यता है कि, इसी दिन राजा विक्रमादित्य ने अपने संवत् की रचना की थी। बड़े-बड़े विद्वानों को बुलाकर मुहूर्त निकलवाया था कि, नया संवत चैत सुदी प्रतिपदा से चलाया जाए।

जैन धर्म के अनुआयी भी दीपावली को एक पवित्र उत्सव मानते हैं। उनके मतानुसार 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर ने इसी दिन पृथ्वी पर अपना अंतिम ज्योति फैलाई थी और वह मृत्यु को प्राप्त हो गए। यही कारण है कि, जैन संप्रदाय में इस तिथि का स्थान महत्वपूर्ण है। आर्य समाज भी इस तिथि का स्थान महत्वपूर्ण है।

क्योंकि इसी दिन आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद सरस्वती का मृत्यु हुआ था। सिखों के छठे गुरु हरगोविंद सिंह भी इसी दिन कारावास से मुक्त हुए थे। इस प्रकार इन महापुरुषों की स्मृति को अमर बनाने के लिए भी यह त्यौहार बहुत उल्लास के साथ मनाया जाता है।

भारत के विभिन्न जगहों पर दीपावली की तैयारी

दीपावली आने के कुछ समय पहले से ही हमारे देश के शहरों, नगरों, गांव के घरों एवं गली-मुहल्ले में साफ सफाई शुरू हो जाती है। अतः सारा सामान अपने-अपने घर-आंगन, मकान- दलाल आदि की साफ-सफाई, पुताई-रंगाई शुरू कर देते हैं। छोटे-बड़े, गरीब-अमीर सभी तरह के लोग दीपावली के स्वागत की तैयारी में लग जाते हैं। और इस बात को तो हम पहले से ही जानते हैं कि दीपावली अमावस्या के दिन मनाया जाता है। लेकिन एक तरह से कहा जाए तो दीपावली का यह त्यौहार पांच दिनों तक चलता है।

पहला दिन गोवत्स द्वादशी आती है। यह त्यौहार कार्तिक कृष्ण पक्ष द्वादशी को आता है। इस दिन गायों, बैलो, और बछड़ों की सेवा की जाती है। इस दिन प्रातःकाल स्नानादि करके गाय, बैल एवं बछड़े का पूजन किया जाता है। फिर उनको गेहूं के बने पदार्थ खिलाए जाते हैं। इस दिन गाय आदि का दूध, गेहूं की बनी वस्तुएं, कटे फल आदि नहीं खाए जाते हैं। इसके बाद गोवत्स द्वादशी की कथा सुनकर ब्राह्मणों को फल दान दिया जाता है।

दूसरे दिन धनतेरस अथवा धन्वंतरि जयंती आती है। यह त्योहार दीपावली (Essay on Diwali in Hindi) आने की पूर्व सूचना देता है। यह कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस दिन घर मे लक्ष्मी का आवास मानते है। इस दिन ही धन्वन्तरी वैद्य समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए धनतेरस को धन्वन्तरी जयंती भी कहते हैं।
इस दिन कोई भी वस्तु खरीदना शुभ माना जाता है।

तीसरे दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी) अथवा छोटी दीपावली का उत्सव मनाया जाता है। श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध के कारण यह दिवस नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। यह कार्तिक वदी चौदस के दिन ही मनाई जाती है। इस दिन लोग सुबह उठकर आटा, तेल, हल्दी, से उबटन करते हैं। फिर स्नान करते हैं। भोजन करने से पहले एक थाली में चौमुख दीपक और छोटे दीपक रख लेते हैं। उनमें तेल और बत्ती डालकर जलाते हैं फिर रोली, खील, गुड़, अबीर, गुलाल, फूल आदि से पूजा करते हैं।

शाम को पहले उद्योगों की गद्दी की पूजा करते हैं। फिर घर पर पूजा करते हैं। पूजन के पश्चात सब दीपक को घर के अलग-अलग प्रत्येक स्थान पर रख देते हैं।

चौथे दिन अमावस्या होती है। जो दीपावली उत्सव का प्रधान दिन होता है। लोग दिन से ही अपने घरों की सजावट आदि करने में अस्त-व्यस्त रहते हैं। रात्रि के समय में सभी नए नए वस्त्र धारण करते हैं और अधिष्ठात्री मां लक्ष्मी देवी और रिद्धि-सिद्धि के स्वामी गणेश जी की श्रद्धा पूर्वक पूजा अर्चना करते हैं। तथा पूजा-अर्चना के बाद लोग अपने घर को दीपमालाओ से सजाते हैं। सजाने के सामग्री में छोटे-छोटे मिट्टी के दीप, मोमबत्ती, कागज के कैंडल आदि होते हैं। मकान के छतो-छज्जो और मुंडेर पर दीपों की माला सजाई जाती है। दीपक की पंक्तियां एक आकर्षक दृश्य उपस्थित करती है। बच्चे के साथ-साथ बड़े भी पटाखे और रंग-बिरंगी फुलझड़ियां छोड़ते हैं।

हर जगह रोशनी ही रोशनी दिखाई देती है। रोशनी की जगमगाहट से सबके चेहरे पर खुशी की लहर छा जाती है। सारा वातावरण धूम-धड़ाके से गुंजायमान हो जाता है। इस प्रकार अमावस्या की रात रोशनी की रात में बदल जाती है। लोग घर से बाहर निकलते हैं और अपने आस-पड़ोस के घर जाकर अपने से बड़ों को प्रणाम कर आशीर्वाद लेते हैं और एक दूसरे को मिठाइयां पूरी- पकवान आदि खिलाते हैं। मिठाइयां खाते-खिलाते रात के कुछ घंटे बीत जाते हैं।

ऐसी मान्यता है कि इस रात लक्ष्मी घर में प्रवेश करती है। इस कारण लोग रात को अपने घर के दरवाजे खुले रखते हैं। इस दिन दीपोत्सव के द्वारा सभी लोग सुख समृद्धि और आनंदमय जीवन की कामना करते हैं। जिससे कि अभावों का अंधेरा मिट जाए और माता लक्ष्मी घर में चले आवे।

रिद्धि-सिद्धि के स्वामी गणेश जी सभी प्रकार के विघ्न बाधाओं को दूर करें। कोई हजारो रंग-बिरंगी बत्तियां के जगमगाते आलोक से धन और ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी की राह को आलोकित करता है। तो कोई मिट्टी के टिमटिमाते दिए से इस प्रकार हम कह सकते हैं कि भारतवर्ष के महापर्व में दीपावली (Essay on Diwali in Hindi) नामक यह त्योहार जनसाधारण की जीवन यात्रा में एक सुख पुराव है।

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है। यह पूजा श्रीकृष्ण के गोवर्धन धारण करने की स्मृति में मनाई जाती है। स्त्रियां गोबर से गोवर्धन की प्रतिमा बनाती है। रात्रि को उनकी पूजा होती है। किसान अपने-अपने अपने बैलों को नहलाते हैं और उनके शरीर पर मेहंदी एवं रंग लगाते हैं। इस दिन अन्नकूट भी मनाया जाता है।

गोवर्धन पूजा के अगले दिन भैया दूज का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनके लिए मंगल कामना करती है। कहा जाता है कि इस दिन यमुना ने अपने भाई युवराज के लिए कामना की थी। तभी से यह पूजा चली आ रही है। इसीलिए इस पर्व को “यम द्वितीया” भी कहते हैं और इसे दीपावली की आखिरी दिन के रूप में मनाया जाता है।

दिवाली का महत्व । Importance of Diwali in Hindi

दरअसल दीपावली का पर्व कई रूपों में उपयोगी है। इसी बहाने टूटे-फूटे घरों, दुकानों, फैक्ट्रियों आदि की सफाई-पुताई हो जाती है। वर्षा ऋतु में जितने कीट-पतंगे उत्पन्न होते हैं। सब के सब मिट्टी के दिए पर मंडरा कर नष्ट हो जाते हैं। इस प्रकार सारी गंदगी दूर हो जाती है पर्यावरण शुद्ध हो जाता है।

दीपावली के इस महापर्व का आवाहन् है – ‘आइये मिट्टी के दीए जलाएं, घर आंगन जगमगाए, प्रकाश का पर्व मनाऍ और अंधकार को दूर भगाएं, इस तिमिर से संत्रस्त नहीं होना है, हिम्मत परास्त नहीं होना है, यह रात भर का मेहमान है, किंतु हम दिए जलाकर इसके अस्तित्व को नकारते चले, इस शैतान को को मारते चले, पौ फटते ही प्रकाश फैलेगा, क्षितिज पर सूरज निकलेगा और अंधकार भाग चलेगा।’

Pradushanmukt Diwali Essay in Hindi | Pollution Free Diwali Essay – Diwali par Nibandh

दीपावली पर हर वर्ष अरबों रुपये के पटाखे चलते हैं। इससे वातावरण प्रदूषित होता है। जहरीली गैसों से लोग गंभीर बीमारियां की चपेट में आते हैं।

हम इस त्योहार को दीयों से ज्यादा पटाखों के त्योहार के रूप में मनाते हैं। एक अनुमान के अनुसार पटाखों की वजह से हर वर्ष 13 हजार से अधिक लोग हादसों का शिकार होते हैं। पटाखों का कम से कम उपयोग करने और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में पटाखों पर पूर्ण पाबंदी की जरूरत है।

पटाखे तमिलनाडु के शिवाकाशी शहर में तैयार होते हैं। पटाखे बनाने के मसाले में 75 प्रतिशत पोटाशियम, 10 प्रतिशत कोयला, 10 प्रतिशत गंधक और 5 प्रतिशत शीशे समेत अन्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है।

पटाखों के चलने से जहरीली गैस सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्रोजन मोनो आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड व कार्बन डाई आक्साइड निकलती है। इनका वातावरण में 6 से 8 घंटे तक असर रहता है। इसकी गैस व शोर से रक्तचाप, दिल के दौरे, सांस, फेफडे़, अस्थमा, खांसी, चमड़ी और एलर्जी समेत अन्य गंभीर बीमारियां जन्म लेती हैं। इससे आंख, नाक व कान की समस्याएं पैदा होती हैं। छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं ज्यादा प्रभावित होती हैं।

एक अनुमान के अनुसार हर वर्ष पटाखों के लिए 350 टन कागज का उपयोग किया जाता है जो कि लगभग 20 हजार वृक्षों की कटाई से मिलता है।

दीपावली दीपों का त्यौहार है। बेशक दीप जलाएं। घर बाहर दीप जलना बहुत रमणीय लगता है। लेकिन दीपों के साथ-साथ लोग पटाखे भी जलाते हैं। पटाखों का कुछ पल का मजा वातावरण में जहर घोल देता है। इनमें मौजूद नाइट्रोजन डाइआक्‍साइड, सल्फर डाइआक्साइड जैसे हानिकारक प्रदूषक अस्थमा व ब्रान्‍काइटिस जैसी सांसों से संबंधी समस्याओं को जन्म देती हैं। लेकिन कुछ मापदंडों को अपनाकर, आप इन हानिकारक प्रदूषकों से बच सकते हैं।

दीपावली खुशियों एवं रोशनी का त्यौहार है लेकिन दीपावली के दौरान छोड़े जाने वाले तेज आवाज के पटाखे पर्यावरण के साथ जन स्वास्थ्य के लिये खतरा पैदा कर सकते हैं। दीपावली के दौरान पटाखों एवं आतिशबाजी के कारण दिल के दौरे, रक्त चाप, दमा, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है और इसलिये दमा एवं दिल के मरीजों को खास तौर पर सावधानियां बरतनी चाहिये।

अगर आपको दमा या सांसों से संबंधी समस्या हैं, तो घर के अंदर ही रहें और धुंए से बचने का प्रयास करें। ऐसे में अगर आपको बाहर जाना ही है, तो अपनी दवाएं साथ रखें और मास्क लगाकर बाहर जायें।
दीपावली का समय आते ही लोग घर की साफ-सफाई में जुट जाते हैं और घर के बेकार सामानों को बाहर फेंक देते हैं। इनमें कुछ ऐसे सामान भी होते हैं, जो अजैविक होते हैं और वातावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे सामानों को इधर-उधर ना फेंकें।

  • पटाखों से निकलने वाली आवाज अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण फैलाती हैं और यह स्वास्‍थ्‍य के लिए भी हानिकारक होती है। दीपावली में सबसे ज्यादा इस्तेमाल में लाये जाने वाले ‘लक्ष्मी बम’ से 100 डेसिबेल(ध्वनि नापने की इकाई) आवाज आती है और 50 डेसिबेल से तेज़ आवाज़ के स्तर को मनुष्य के लिए हानिकारक माना जाता है। शायद आप नहीं जानते, अचानक बहुत तेज आवाज सुनने से व्यक्ति बहरा भी हो सकता है और इस कारण हृदय के मरीजों में दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
  • चिकित्सकों का कहना है कि पटाखों का शोरगुल और प्रदूषण सभी के लिए नुकसानदायक होता है। अधिक रोशनी और शोरगुल वाले पटाखों के कारण लोगों की आंखों में अंधता और कानों में बहरापन आ सकता है। इसलिए पटाखों से दूरी बनाकर रखें।

ऐसे में प्रदूषण रहित दीपावली मनाना ही समय की सबसे बड़ी मांग है।