Short Hindi Essay on my favorite teacher मेरा प्रिय अध्यापक पर लघु निबंध

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Mera Priya Adhyapak par laghu nibandh

प्रस्तावना- किसी समाज और राष्ट्र की भविष्य उसके विद्यार्थियों पर निर्भर करता है क्योंकि आज का विद्यार्थी ही कल का नागरिक है। उसका विकास ही देश और समाज का विकास है। उनके विकास का दायित्व अध्यापक पर है। अध्यापक ही छात्रों का सम्यक् विकास कर सकता है। अतएव एक आदर्श अध्यापक ही उसके अशोभनीय और अहितकर दोषों को दूर कर सकता है। मैं अध्यापक के महत्व और गरिमा को समझता हूँ।

अध्यापकों के प्रति श्रद्धा- मैं जानता हूँ कि श्रद्धावान् व्यक्ति ही ज्ञान प्राप्त कर सकता है। श्रद्धावन को ही गुरू का सच्चा प्रेम प्राप्त होता है। इसलिए मैं अपने सभी अध्यापकों के प्रति आदर और श्रद्धा रखता हूँ। मुझे भी सभी अध्यापकों से प्रेम है परन्तु मुझे अपने हिन्दी अध्यापक सब से प्रिय हैं।Short Hindi Essay on my favorite teacher

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आदर्श अध्यापक- एक आदर्श अध्यापक की योग्यताएँ और विशेषताएँ मेरे प्रिय गुरूवर में विद्यमान हैं। वे अपने विषय के उच्च कोटि के विद्वान् हैं। उनकी पहुँच हिन्दी के विविध क्षेत्रों में समान रूप से हैं। वे एक श्रेष्ठ लेखक और कवि भी हैं। वे अपने शिष्यों से बहुत प्रेम करते हैं और सदा उनकी सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। उनके चेहरे पर सदा मुस्कान की झलक दिखाई देती है। क्रोध तो कभी उन्हें आता ही नहीं।

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बहुमुखी व्यक्ति के धनी- मेरे हिन्दी अध्यापक बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी हैं। वे प्रायः हिन्दी सम्मेलनों और कवि दरबारों में आमन्त्रित किए जाते हैं। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी हैं। उनकी बहुत सी रचनाएँ अत्यन्त लोकप्रिय हैं। उनके लेख समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में भी प्रकाशित होते रहते हैं।

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उनके पढ़ने का ढंग भी अत्यन्त ही प्रभावकारी और निराला है। गद्या हो या पद्य, सभी रचनाओं का वे शुद्ध और मधुर स्वर में वाचन करते हैं। उनसे हमें बहुत प्रेरणा मिलती है। कविता वाचन के समय तो वे मग्न हो जाते हैं और उनका वाचन प्रेरणादायक होता है।

सरल स्वभाव- मेरे प्रिय शिक्षक सरल प्रकृति के धनी हैं। उनकी वेशभूशा एक आदर्श अध्यापक के अनुकूल हैं। वे भारतीय पहनावा, रहन सहन, बोल चाल, खान पान और आचार व्यवहार के कटृर समर्थक हैं। हमें उनसे भारतीय परम्परा और संस्कृति के विषय में बातचीत करते हुए बहुत आनंद आता है।

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उपसंहार- आधुनिक भारत में ऐसे विद्वान् परिश्रमी, सहदय, मधुरभाषी और जन हितैषी अध्यापकों की बहुत आवश्यकता है। ऐसे अध्यापक ही भारत के सुन्दर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। मेरी कामना है कि वे शत-शत वर्ष जिएँ और अपने विद्यार्थियों तथा समाज का कल्याण करते रहें।

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