Short Hindi Essay on Varsha Ritu वर्षा ऋतु पर लघु निबंध

Advertisement

Varsha Ritu par laghu nibandh

प्रस्तावना- परिवर्तन जीवन में आनंद घोल देता है। परिवर्तन के बिना जीवन में नीरसता आ जाती है। मन ऊबने लगता है। इसलिए जीवन में परिवर्तन अनिवार्य है। प्रकृति नदी भी परिवर्तन को पसंद करती है। यही कारण है कि यहाँ एक के बाद एक छः ऋतुएँ क्रम में आती रहती हैं और प्रकृति तथा जीवन में अपनी शोभा बिखेरती रहती हैं।Short Essay on Varsha Ritu

ऋतु परिवर्तन आवश्यक- ऋतु परिवर्तन जीवन की आवश्यकता है। इसके बिना एकांगी बन जाता है। सच्चाई तो यह है कि इसके बिना जीवन का काम ही नहीं चलता। ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की किरणों से धरती तपने लगती है। पहाड़ आग की तरह जल उठते हैं, नदी नाले सूख जाते हैं। गर्मी के कारण पशु-पक्षी त्राहि-त्राहि करने लगते हैं। सारी धरती वर्षा की फुहार के लिए बचैन हो उठती है। ऐसी स्थिति में प्रकृति नए जीवन के संचार के लिए वर्षा अत्यन्त आवश्यक हो जाती है। भारत में तो कृषि वर्षा पर ही निर्भर है।

Advertisement

वर्षा ऋतु से आया परिवर्तन-वर्षा ऋतु में आकाश में काले-काले बादल बड़े सुन्दर लगते हैं। बादल कई बाद इतने नीचे झुक आते हैं लगता है ये हमें चूमने लगेंगे। पहाड़ों में तो बादल पाँवों को छूते दिखाई देते हैं। बादल गर्जते हैं। बिजली चमकती है। वर्षा ऋतु की पहली फुहार मन को मोह लेती है। चारों ओर का वातावरण सुहावना हो जाता है। हवा में ठंडक महसूस होने लगती है। पेड़ पौधों पर हरियाली दिखाई देने लगती है। चरागाहों में हरे हरे अंकुर उगने लगते हैं। तालाब पानी से भर जाते हैं। चारों ओर घास ही घास दिखाई देने लगती है। रास्ते तक घास से ढक जाते हैं। मोर घनघोर बादलों की गर्जना सुन नाचते लगते हैं।

Advertisement

वर्षा के लाभ-वर्षा के अनेक लाभ हैं। इस पर हमारा सारा जीवन निर्भर है। वर्षा न आए तो खेती न हो पाए। पीने को पानी न मिले। वर्षा से कोने कोने की दुर्गंध साफ हो जाती है। जलवायु पवित्र और सुहावनी हो जाती है। वर्षा से जंगलों की उपजाऊ मिटृी बहकर खेतों में आ जाती है। इससे फसल बहुत अच्छी होती है।

Advertisement
youtube shorts kya hai

वर्षा से हानि- वर्षा से लाभ हैं तो हानि भी है। अधिक वर्षा से कच्चे मकान गिर जाते हैं। कई बार बाढ़ आ जाती है। इससे फसलें भी नष्ट हो जाती हैं। मक्खी मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। कई बार कुछ बीमारियाँ भी फैल जाती हैं।

उपसंहार- हर वस्तु के दो पहलू हुआ करते हैं। कोई भी चीज केवल लाभदायक हो, उससे कोई हानि न हो, यह कभी नहीं होता। इसी प्रकार वर्षा से थोड़ी बहुत हानि तो होती ही है, लाभ भी बहुत है। इसीलिए इसका हर जगह स्वागत होता है। इसके बिना जीवन मरण बन जाता है, इसीलिए तो वर्षा को ऋतुओं की रानी कहा जाता है।

Advertisement
Advertisement