दिल्ली.संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर देश भर में विवाद हो रहे हैं लेकिन इतिहासकारों का इस बारे में कुछ अलग ही है कहना.

वरिष्ठ इतिहासकार इरफान हबीब ने दावा किया है कि जिस पद्मावती के अपमान को मुद्दा बनाकर करणी सेना और दूसरे संगठन हंगामा मचा रहे हैं, वैसा कोई कैरेक्टर असलियत में था ही नहीं, क्योंकि पद्मावती पूरी तरह से एक काल्पनिक चरित्र है.मशहूर गीतकार और शायर जावेद अख्तर ‘पद्मावती’ की कहानी को ऐतिहासिक नहीं मानते.

वरिष्ठ इतिहासकार इरफ़ान हबीब के अनुसार ‘पद्मावती’ का इतिहास में 1540 से पहले कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता. इस किरदार को 1540 में रचा गया. किसी भी इतिहासकार ने 1540 से पहले इसका उल्लेख नहीं किया.

ये चीजें पूरी तरह से काल्पनिक हैं.हबीब ने कहा कि जायसी ने राजस्थान को आधार बनाकर एक रोमांटिक उपन्यास लिखा क्योंकि राजस्थान एक रोमांटिक जगह थी.

उन हालात के हिसाब के पद्मावती का किरदार सटीक था इसलिए उन्होंने उसे वास्तविक बनाकर पेश किया. लेकिन इस आधार पर इतिहास में कोई बदलाव करना मुश्किल है.

इरफान हबीब ने के अनुसार मशहूर लेखक मलिक मोहम्मद जायसी ने पद्मावती का किरदार रचा था. ये एक काल्पनिक किरदार है. जायसी ने इसे आधार बनाकर बहुत प्रसिद्ध उपन्यास लिखा था.

पद्मावती और जोधाबाई की तरह ही अनारकली भी एक काल्पनिक चरित्र है, इस कहानी को सबसे पहले लखनऊ के एक उपन्यासकार ‘अब्दुल हलीम शरार’ (1860-1926) ने अपनी कल्पना के सहारे लिखा था..

बाद में इसी कहानी में बदलाव करके नाट्य लेखक ‘सय्यद इम्तियाज़ अली ताज’ (1900–1970) ने 1922 में वो नाटक लिखा जिसको अनगिनत बार स्टेज पर मंचित किया गया.

और फिल्मों का ज़माना आने पर इसी कहानी पर सुपरहिट ‘मुग़ले आज़म’ समेत भारत पाकिस्तान में कई फिल्में बनीं. यही नहीं शेक्सपियर द्वारा लिखा गया एक ट्रेजेडी ड्रामा था ‘रोमियो जूलिएट’ इसमें कोई सच्चाई नहीं थी, वो एक मनगढंत कहानी भर थी जो काफी पॉपुलर हो गई. लेकिन कई लोग अनभिज्ञता के चलते हक़ीक़त समझते हैं.