श्री कृष्ण ने राधा को दिया था एक वरदान जिससे आज भी भरती है महिलाओं की सूनी गोद

Sri Krishna Ne Radha Ko Diya Tha Ek Varadan Jisse Aaj Bhi Bharti Hai Mahilaon Ki Suni God

जब स्त्री मातृत्व ग्रहण कर एक बच्चे को जन्म देती है, तभी वास्तविक रूप में उसका अस्तित्व और जिम्मेदारी पूर्ण होती है। लेकिन कई ऐसी स्त्रियां भी हैं जो इस पूर्णता से अछूती रह जाती है, लाख चाहने के बाद भी वह मां बनने का सुख प्राप्त नहीं कर पाती।

ऐसी स्थिति में वे मानसिक और भावनात्मक तौर पर तो टूट ही जाती हैं साथ ही उसका विवाहित जीवन भी तलवार की नोंक पर आ जाता है।

इसके अलावा हमारा समाज जो एक महिला से यही अपेक्षा करता है कि वह अपना हर कर्तव्य पूरा करेगी, वह भी उस महिला को सम्मान नहीं दे पाता जो मां बनने का कर्तव्य पूर्ण नहीं कर पाती।Sri Krishna Ne Radha Ko Diya Tha Ek Varadan Jisse Aaj Bhi Bharti Hai Mahilaon Ki Suni God

माना जाता है अगर कोई नि:संतान दंपति एकसाथ अहोई अष्टमी यानि कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्य रात्रि मथुरा में स्थित राधा कुंड में स्नान करता है तो जल्द ही उसके घर बच्चे की किलकारियां गूंजने लगती हैं।

मान्यतानुसार यहां स्नान करने वाली महिलाएं अपने केश खोलकर राधा जी से संतान का वरदान मांगती हैं और राधा जी उन्हें यह वरदान देती भी हैं।

इस स्थान से जुड़ी एक पौराणिक कहानी भी प्रचलित है। कथा के अनुसार एक बार गोवर्धन पर्वत के पास में गाय चराने के दौरान अरिष्टासुर नामक राक्षस ने बछड़े का रूप धरकर भगवान कृष्ण पर हमला कर दिया।

कृष्ण जी के हाथों उस बछड़े का वध करने की वजह से कान्हा पर गौहत्या का पाप लग गया। इस पाप के प्रायश्चित के तौर पर श्रीकृष्ण ने अपनी बांसूरी से कुंड बनवाया और तीर्थ स्थानों के जल को वहां एकत्रित किया।

इसी तरह राधारानी ने भी अपने कंगन की सहायता से कुंड खोदा और सभी वहां भी तीर्थ स्थान के जल एकत्रित हुए।

जब दोनों कुंड तीर्थ स्थानों के जल से भर गए तब कृष्ण और राधा ने महारास किया, दोनों एक दूसरे के साथ बहुत प्रसन्न थे।

राधा से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि जो भी नि:संतान दंपत्ति अहोई अष्टमी की रात यहां स्नान करेगा उसे सालभर के भीतर ही संतान की प्राप्ति अवश्य होगी।

कृष्ण और राधा कुंड की एक विशेषता और है। जहां कृष्ण कुंड का पानी दूर से देखने पर कृष्ण जी के रंग की तरह सांवला दिखाई देता है, वहीं राधा कुंड का पानी उन्हीं की तरह श्वेत वर्ण का दिखता है।

कृष्ण और राधा का प्रेम सदियों से अमर हैं और हमेशा अमर ही रहेगा। उनकी प्रेम लीलाओं से पौराणिक इतिहास महकता है। ये उनकी ही तो लीला है जो नि:संतान दंपत्तियों की गोद भी वे भर देते हैं।