PoK के ओसामा को सुषमा स्वराज ने दिया ट्यूमर के इलाज के लिए वीजा, पाक अड़ा रहा था अड़ंगे

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नई दिल्ली: भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ओसामा अली नमक पाकिस्तानी युवक को लिवर में ट्यूमर के इलाज के लिए बिना वीजा के ही भारत आने की अनुमति देने का एलान किया है. श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा की यह मानवता का मामला है और इसे राजनीतिक और कूटनीतिक मामलों से हैट कर देखा जाना चाहिए. यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज के अनुशंसा पत्र की कोई आवश्यकता नहीं है। पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए सुषमा ने कहा कि पकिस्तान ने वहां गैरकानूनी तरीके से कब्जा किया हुआ है।

Sushma Swaraj visa to POK osama ali treatment in indiaआपको बता दें कि बीमार युवक ओसामा अली पाक-अधिकृत कश्मीर (पोक) का रहने वाला है और वह अपने इलाज के लिए भारत आना चाहता है. आरोप है कि पाक-अधिकृत कश्मीर के युवक को भारत में इलाज से पकिस्तान की निगेटिव पब्लिसिटी होती और इसका कश्मीर में भारत के पक्ष में सन्देश जायेगा इसलिए पकिस्तान इस युवक को भारत में इलाज की अनुमति नहीं दे रहा था.

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भारत-पकिस्तान के बीच तय प्रक्रिया के तहत सरताज अजीज को इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन को लेटर लिखकर देना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इस के चलते ओसामा को वीजा नहीं मिल पा रहा था। सुषमा स्वराज ने मानवीय आधार पर सरताज अजीज के पत्र के बिना ही ओसामा को वीजा देने का फैसला करके न केवल अपनी सदाशयता का प्रदर्शन किया है बल्कि पकिस्तान को एक कुटनीतिक मात भी दी है.

इससे पहले भी सुषमा स्वराज बीमार पाकिस्तानी और अन्य विदेशी नागरिकों के मामले में दयालु रुख दिखाती रहीं हैं. कुछ दिन पहले सुषमा ने पाकिस्तान की कैंसर पीड़ित युवती फैजा तनवीर के मेडिकल वीजा मामले को लेकर पाकिस्तान को खूब खरी-खोटी सुनाई थी।

दरअसल सच तो यह है कि भारत और पाकिस्तान के जनता जहाँ बात बात पर एक दूसरे के प्रति दुश्मनी से भरपूर हो उठती है वहीँ जैसे ही कोई भावुक या मानवीय मुद्दा सामने आता है तो दोनों देश अलग हुए भाइयों के परिवारों की तरह मिलने को उत्सुक दिखाई देने लगते हैं. यह एक ऐसे मुहब्बत और नफरत के सिलसिले की दास्तान है जिसे याद रखना और निभाना अब विभाजन की त्रासदी से उपजे इन दोनों देशों की मजबूरी सा बन गया है.

खैर यही उम्मीद की जा सकती है कि दोनों देशों के अवाम यानी जनता पिछली दुश्मनी को भूल कर आगे बढे और राजनीतिकों के उकसावे में आ कर बेवजह एक दूसरे के खून की प्यासी न बन जाए.

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