ताजमहल के नीचे बंद दरवाज़ों का सच क्या हैं ..

पूरी दुनिया मे आज भी ताज महल कुशल कारागिरी का एक बेमिसाल नमूना माना जाता है. जो कि भारतीय, इस्लामी एवं फारसी वास्तुकला का मिश्रण है.ताजमहल को भारत की इस्लामी कला का रत्न भी कहा जाता है.

संगमरमर की सिल्लियों की बडी- बडी पर्तो से ढंक कर बनाई गई इमारतों की तरह न बनाकर इसका सफ़ेद गुम्बद एवं टाइल आकार में संगमरमर से ढंका है.बिच में बना मकबरा अपनी वास्तु श्रेष्ठता में सौन्दर्य के संयोजन की अनूठी करागारी की बेहतरीन मिसाल हैं.

पिछले कई दिनों से ताजमहल सुर्खियों मे बना हुआ हैं ,काफी दिनों मे ताज महल को लेकर कई तरह की बाते सामने आ रही हैं.कई दिनों से वायरल हो रही एक खबर का सच क्या हैं.

ताजमहल का वो कौन सा दरवाज़ा हैं .जिसे खोलने से सरकार भी डरती है.इसके खबर की सच्चाई क्या हैं ,किसी को कुछ पता नहीं .लेकिन वायरल वर्ल्ड में ये खबर नंबर वन में बनी हुई है.

तो जानते हैं की कौनसा वो दरवाज़ा हैं और क्या कहानी हैं उन दरवाज़ों की .वायरल .खबर मे कहा गया हैं  कि, ताज महल का निर्माण साल 1631 में शुरू करवाया गया था,.

शोधकर्ताओं के अनुसार ताजमहल के नीचे हजार से भी अधिक कमरे हैं. उनका मानना है कि ताजमहल जितना ऊपर है उतना ही है धरती के नीचे बनाया गया है.

मुग़ल कालीन समय मे कोई भी किला बनाया जाता था ,तो बाहर निकलने का रास्ता भी बनाया जाता था. ऐसा ही ताजमहल के नीचे भी एक रास्ता है जो कहीं दूर बाहर निकलता है.

लेकिन कहा जाता हैं की सभी तहखानों की तरह उस रास्ते को भी शाहजहां के समय से ही बंद करवा दिया गया था. ताजमहल के नीचे के इन कमरों को ईटो से ही बंद करवाने की बात भी कही जाती हैं .

अगर शोध कर्ताओ की माने तो  इन कमरों को बनाने के पश्चात इन्हें ईटो से ढक दिया गया था .इसका अधिकार केवल सरकार के पास ही होता है. शायद उन दरवाजों के पीछे कोई बड़ा खजाना हो सकता है.

पुरातत्व शास्त्रियों के अनुसार उन दरवाजों के पीछे कुछ ऐतिहासिक दस्तावेज भी हो सकते हैं .जो शायद हमारे इतिहास को भी बदलने की ताकत रखते हो .अब इस खबर में कितनी सच्चाई है इसका पता लगा पाना  काफी मुश्किल काम हैं .