Samvad Lekhan तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था पर दो मित्रों के बीच का संवाद- संवाद लेखन

Tatkaleen shiksha vyvashta par do mitraon ke beech ka samvad- Samvad Lekhan

शांति : उर्मिला मैं तो आजकल की शिक्षा व्यवस्था से बहुत परेशान हो गई हूँ ।

उर्मिला : क्यों क्या हो गया शांति ?

शांति : देखो ना कल मेरी बेटी ने बड़े खुश होते हुए मुझे विज्ञान की कॉपी दिखाई। मैंने देखा तो उसकी अध्यापिका ने उसे टेस्ट में दस में से दस नम्बर दिए हुए थे ।

उर्मिला : तो इसमें परेशान होने वाली बात क्या है ? इसमें तो कोई भी अभिभावक खुश ही होंगे ।

शांति : खुश तो होंगे लेकिन, जब मैंने उससे पूछा की तुम मुझे इसे सरल भाषा में समझाओ तो उसको कोई जवाब ही नहीं सूझा । तब मुझे लगा कि इसने समझ कर नहीं बल्कि रट कर लिखा है । यही मेरी परेशानी का कारण है ।

उर्मिला : तुम सही कह रही हो शांति आजकल की पढाई में सिलेबस निपटाना और टेस्ट लेना ही रह गया है । बच्चे बस अच्छे नम्बर ला-लाकर पास होते रहें तो विद्यालय और अभिभावक इसी में खुश हैं । बच्चों को समझ आ रहा है या नहीं किसी को इससे मतलब नहीं ।

शांति : अभी तो वह रट कर नम्बर ले आई लेकिन कुछ समय में भूल भी जाएगी कि उसे क्या पढ़ा था । लेकिन यदि समझ कर लिखा होता तो वह उसे हमेशा याद रहता और वही होती असली शिक्षा और यही बात मैंने उसे समझाई भी है जिससे आगे से वह रट कर नहीं बल्कि समझ कर पढ़े ।

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