तत्सम तद्भव शब्द (Tatsam – Tadbhav Shabd in Hindi)

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तत्सम तद्भव शब्द (Tatsam – Tadbhav Shabd in Hindi)

इस लेख में विद्यार्थियों के लिए तत्सम और तद्भव शब्दों की विस्तार से जानकारी दी गई है।

तत्सम शब्द की परिभाषा –

तत्सम शब्द तत्+सम शब्दों से बना है। तत् का अर्थ होता है “उसके” और सम का अर्थ होता है “समान”। यहाँ “उसके” का अर्थ है “संस्कृत भाषा” अर्थात जो शब्द हिन्दी भाषा में संस्कृत भाषा से ज्यों के त्यों प्रयोग होते हैं उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं, जैसे – पुस्तक, क्षेत्र, अग्नि, रात्रि, कार्य इत्यादि। अगर आसान शब्दों में कहा जाए तो हिंदी में संस्कृत के मूल शब्दों को ‘तत्सम शब्द’ कहते हैं।

तद्भव शब्द की परिभाषा –

तद्भव शब्द भव शब्द में तद् उपसर्ग लगाकर बना है। तद् का अर्थ होता है “उससे” और भव का अर्थ होता है उससे “उत्पन्न”। वैसे शब्द जो संस्कृत भाषा के मूल शब्दों से बिगड़ कर यानी मूल शब्दों में परिवर्तन आने से उत्पन्न हुए हैं, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं।

समय और परिस्थिति के साथ संस्कृत के जिन शब्दों का मूल रूप न रह कर परिवर्तित रूप प्रचलन में आ गया है उन्हीं परिवर्तित शब्दों को तद्भव शब्द कहा जाता है। जैसे – रात्रि का तद्भव शब्द है “रात”। ऐसे अनेकों तद्भव शब्द आजकल हिन्दी में आ गए हैं जैसे – धरती (धरित्री), पहर (प्रहर), पत्थर (प्रस्तर) आदि।

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तत्सम शब्दों का प्रयोग लिखित हिन्दी में अधिक होता है किन्तु तद्भव शब्दों का प्रयोग बोलने की हिन्दी में अधिक होता है। साथ ही हिन्दी की बोलियों में अधिकांशतः तद्भव शब्दों का ही प्रयोग होता है। बोलियों के अनुसार एक ही तत्सम शब्द के एक से अधिक तद्भव रूप भी प्रचलन में आ गए हैं जैसे – कृष्ण (तत्सम) – किसन, कान्हा (तद्भव), त्वरित (तत्सम) – तुरंत, तुरत (तद्भव)।

शब्द विचार की सम्पूर्ण जानकारी के लिए विस्तार से पढ़िये:

शब्द एवं शब्द विचार – परिभाषा भेद और उदाहरण

तत्सम और तद्भव शब्दों के उदाहरण

पाठकों के लिए 500 से अधिक तत्सम – तद्भव शब्दों के उदाहरण निम्नलिखित हैं:-

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अ से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
अंक – आँक
अंगरक्षक – अँगरखा
अंगुलि – ऊँगली
अंगुष्ठ – अंगूठा
अंचल – आँचल
अंजलि – अँजुरी
अंध – अँधा
अकस्मात – अचानक
अकार्य – अकाज
अक्षत – अच्छत
अक्षर – अच्छर / आखर
अक्षि – आँख
अक्षोट – अखरोट
अगणित – अनगिनत
अगम्य – अगम
अग्नि – आग
अग्र – आगे
अग्रणी – अगाडी / अगुवा
अच्युत – अचूक
अज्ञान – अजान / अनजाना
अट्टालिका – अटारी
अद्य – आज
अन्धकार – अँधेरा
अन्न – अनाज
अमावस्या – अमावस
अमूल्य – अमोल
अमृत – अमिय
अम्बा – अम्मा
अम्लिका – इमली
अर्क – आक
अर्द्ध – आधा
अर्पण – अरपन
अवगुण – औगुण
अवतार – औतार
अश्रु – आँसू
अष्ट – आठ
अष्टादश – अठारह

तत्सम – तद्भव शब्द for class 10
तत्सम – तद्भव शब्द for class 9
तत्सम – तद्भव शब्द for class 8
तत्सम – तद्भव शब्द for class 7
तत्सम – तद्भव शब्द for class 6
तत्सम – तद्भव शब्द for class 5

आ से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
आदित्यवार – इतवार
आभीर – अहीर
आमलक – आँवला
आम्र – आम
आम्रचूर्ण – अमचूर
आरात्रिका – आरती
आलस्य – आलस
आशीष – असीस
आश्चर्य – अचरज
आश्रय – आसरा
आश्विन – आसोज

इ, ई से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
इक्षु – ईख
इष्टिका – ईंट
ईप्सा – इच्छा
ईर्ष्या – इरषा

उ, ऊ, ऋ से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
उच्च – ऊँचा
उच्छवास – उसास
उज्ज्वल – उजला
उत्साह – उछाह
उदघाटन – उघाड़ना
उपरि – ऊपर
उपालम्भ – उलाहना
उलूक – उल्लू
उलूखल – ओखली
उष्ट्र – ऊँट
ऊष्ण – उमस
ऋक्ष – रीछ

ए, ऐ, ओ, औ से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
एकत्र – इकट्ठा
एकादश – ग्यारह
ओष्ठ – ओँठ

क से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
कंकण – कंगन
कच्छप – कछुआ
कज्जल – काजल
कटु – कडवा
कण्टक – काँटा
कदली – केला
कन्दुक – गेंद
कपाट – किवाड़
कपोत – कबूतर
कर्ण – कान
कर्तव्य – करतब
कर्पट – कपड़ा
कर्पूर – कपूर
कर्म – काम
कल्लोल – कलोल
काक – काग / कौआ
कार्तिक – कातिक
कार्य – काज / कारज
काष्ठ – काठ
कास – खाँसी
किंचित – कुछ
किरण – किरन
कीट – कीड़ा
कीर्ति – कीरति
कुंभकार – कुम्हार
कुक्कुर – कुत्ता
कुक्षि – कोख
कुपुत्र – कपूत
कुब्ज – कुबड़ा
कुमार – कुआँरा
कुमारी – कुँवारी
कुष्ठ – कोढ़
कूप – कुँआ
कृपा – किरपा
कृषक – किसान
कृष्ण – कान्हा / किसन
केवर्त – केवट
कोकिला – कोयल
कोटि – करोड़
कोण – कोना
कोष्ठिका – कोठी
क्लेश – कलेश

क्ष से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
क्षण – छिन
क्षत – छत
क्षति – छति
क्षत्रिय – खत्री
क्षार – खार
क्षीण – छीन
क्षीर – खीर
क्षेत्र – खेत

ख से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
खनि – खान

ग से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
गम्भीर – गहरा
गर्जर – गाजर
गर्त – गड्ढा
गर्दभ – गधा
गर्भिणी – गाभिन
गर्मी – घाम
गहन – घना
गात्र – गात
गायक – गवैया
गुण – गुन
गुम्फन – गूंथना
गुहा – गुफा
गृध – गीध
गृह – घर
गृहिणी – घरनी
गौ – गाय
गोधूम – गेंहू
गोपालक – ग्वाल
गोमय – गोबर
गोस्वामी – गुसाँई
गौत्र – गोत
गौर – गोरा
ग्रन्थि – गाँठ
ग्रहण – गहन
ग्राम – गाँव
ग्रामीण – गँवार
ग्राहक – गाहक
ग्रीवा – गर्दन
ग्रीष्म – गर्मी

घ से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
घंटिका – घंटी
घट – घडा
घटिका – घड़ी
घृणा – घिन
घृत – घी
घोटक – घोडा

च से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
चंचु – चोँच
चंद्र – चाँद
चंद्रिका – चाँदनी
चक्र – चक्कर / चाक
चतुर्थ – चौथ
चतुर्दश – चौदह
चतुर्दिक – चहुंओर
चतुर्विंश – चौबीस
चतुष्कोण – चौकोर
चतुष्पद – चौपाया
चर्म – चमडा / चमड़ी / चाम
चर्मकार – चमार
चवर्ण – चबाना
चिक्कण – चिकना
चित्रक – चीता
चित्रकार – चितेरा
चुंबन – चूमना
चूर्ण – चून / चूरन
चैत्र – चैत
चौर – चोर

छ से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
छत्र – छाता
छाया – छाँह
छिद्र – छेद

ज, झ से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
जंघा – जाँघ
जन्म – जनम
जव – जौ
जामाता – जँवाई
जिह्वा – जीभ
जीर्ण – झीना
ज्येष्ठ – जेठ
ज्योति – जोत
झरण – झर

त से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
तड़ाग – तालाब
तण्डुल – तन्दुल
तपस्वी – तपसी
तप्त – तपन
ताम्बूलिक – तमोली
ताम्र – ताँबा
तिथिवार – त्यौहार
तिलक – टीका
तीक्ष्ण – तीखा
तीर्थ – तीरथ
तुंद – तोंद
तृण – तिनका
तैल – तेल
त्रय – तीन
त्रयोदश – तेरह
त्वरित – तुरंत / तुरत

द से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
दंड – डंडा
दंत – दाँत
दंतधावन – दातुन
दक्ष – दच्छ
दक्षिण – दाहिना
दद्रु – दाद
दधि – दही
दाह – डाह
दिशान्तर – दिसावर
दीप – दीया
दीपशलाका – दीयासलाई
दीपावली – दिवाली
दुःख – दुख
दुग्ध – दूध
दुर्बल – दुबला
दुर्लभ – दूल्हा
दूर्वा – दूब
दृष्टि – दीठि
दौहित्र – दोहिता
द्वादश – बारह
द्विगुणा – दुगुना
द्वितीय – दूजा
द्विपट – दुपट्टा
द्विप्रहरी – दुपहरी
द्विवर – देवर

ध से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
धनश्रेष्ठी – धन्नासेठ
धरणी – धरती
धरित्री – धरती
धर्त्तूर – धतूरा
धर्म – धरम
धान्य – धान
धूम्र – धुँआ
धूलि – धूल
धृष्ठ – ढीठ
धैर्य – धीरज

न से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
नकुल – नेवला
नक्षत्र – नखत
नग्न – नंगा
नप्तृ – नाती
नम्र – नरम
नयन – नैन
नव – नौ
नवीन – नया
नापित – नाई
नारिकेल – नारियल
नासिका – नाक
निद्रा – नीँद
निपुण – निपुन
निम्ब – नीम
निम्बुक – नींबू
निर्वाह – निबाह
निशि – निसि
निष्ठुर – निठुर
नृत्य – नाच
नौका – नाव

प से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
पंक्ति – पंगत
पंच – पाँच
पंचदश – पन्द्रह
पक्व – पका / पक्का
पक्वान्न – पकवान
पक्ष – पंख
पक्षी – पंछी
पट्टिका – पाटी
पत्र – पत्ता
पथ – पंथ
पद्म – पदम
परमार्थ – परमारथ
परशु – फरसा
परश्वः – परसों
परीक्षा – परख
पर्पट – पापड़
पर्यंक – पलंग
पवन – पौन
पश्चाताप – पछतावा
पाद – पैर
पानीय – पानी
पाश – फन्दा
पाषाण – पाहन
पितृ – पितर / पिता
पितृश्वसा – बुआ
पिपासा – प्यास
पिप्पल – पीपल
पीत – पीला
पुच्छ – पूँछ
पुत्र – पूत
पुत्रवधू – पतोहू
पुष्कर – पोखर
पुष्प – पुहुप
पूर्ण – पूरा
पूर्णिमा – पूनम
पूर्व – पूरब
पृष्ठ – पीठ
पौत्र – पोता
पौष – पूस
प्रकट – प्रगट
प्रतिच्छाया – परछाई
प्रतिवासी – पड़ोसी
प्रत्यभिज्ञान – पहचान
प्रस्तर – पत्थर
प्रस्वेद – पसीना
प्रहर – पहर
प्रहरी – पहरेदार
प्रहेलिका – पहेली
प्रिय – पिय
फणी – फण
फाल्गुन – फागुन

ब से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
बंध – बांध
बंध्या – बांझ
बधिर – बहरा
बर्कर – बकरा
बलिवर्द – बैल
बालुका – बालू
बिंदु – बूंद
बुभुक्षित – भूखा

भ से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
भक्त – भगत
भगिनी – बहन
भद्र – भला
भल्लुक – भालू
भस्म – भसम
भागिनेय – भानजा
भाद्रपद – भादो
भिक्षा – भीख
भिक्षुक – भिखारी
भुजा – बाँह
भ्रत्जा – भतीजा
भ्रमर – भौंरा
भ्राता – भाई
भ्रातृजा – भतीजी
भ्रातृजाया – भौजाई
भ्रू – भौं

म से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
मकर – मगर
मक्षिका – मक्खी
मणिकार – मणिहार
मत्स्य – मछली
मदोन्मत्त – मतवाला
मद्य – मद
मनीचिका – मिर्च
मनुष्य – मानुष
मयूर – मोर
मरीच – मिर्च
मर्कटी – मकड़ी
मल – मैल
मशक – मच्छर
मशकहरी – मसहरी
मश्रु – मूंछ
मस्तक – माथा
महिषी – भैंस
मातुल – मामा
मातृ – माता
मार्ग – मारग
मास – माह
मित्र – मीत
मिष्ट – मीठा
मिष्ठान्न – मिठाई
मुख – मुँह
मुषल – मूसल
मुष्टि – मुट्ठी
मूत्र – मूत
मूल्य – मोल
मूषक – मूसा
मृग – मिरग
मृतघट – मरघट
मृत्तिका – मिट्टी
मृत्यु – मौत
मेघ – मेह
मौक्तिक – मोती

य से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
यजमान – जजमान
यत्न – जतन
यमुना – जमुना
यश – जस
यशोदा – जसोदा
युक्ति – जुगत
युवा – जवान
योग – जोग
योगी – जोगी
यौवन – जोबन

र से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
रक्षा – राखी
रज्जु – रस्सी
राजपुत्र – राजपूत
रात्रि – रात
राशि – रास
रिक्त – रीता
रुदन – रोना
रूष्ट – रूठा

ल से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
लक्ष – लाख
लक्षण – लक्खन
लक्ष्मण – लखन
लक्ष्मी – लछमी
लज्जा – लाज
लवंग – लौंग
लवण – नौन / नून
लवणता – लुनाई
लेपन – लीपना
लोक – लोग
लोमशा – लोमड़ी
लौह – लोहा
लौहकार – लुहार

व से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
वंश – बाँस
वंशी – बाँसुरी
वक – बगुला
वचन – बचन
वज्रांग – बजरंग
वट – बड
वणिक – बनिया
वत्स – बच्चा / बछड़ा
वधू – बहू
वरयात्रा – बरात
वर्ण – बरन
वर्ष – बरस
वर्षा – बरसात
वल्स – बछड़ा
वाणी – बानी
वानर – बंदर
वार्ता – बात
वाष्प – भाप
विंश – बीस
विकार – बिगाड़
विद्युत – बिजली
विवाह – ब्याह
विष्ठा – बीट
वीणा – बीना
वीरवर्णिनी – बीरबानी
वृक्ष – बिरख
वृद्ध – बुड्ढा / बूढ़ा
वृश्चिक – बिच्छू
वृषभ – बैल
वैर – बैर
व्यथा – विथा
व्याघ्र – बाघ

श, ष, श्र से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
शकट – छकड़ा
शत – सौ
शप्तशती – सतसई
शय्या – सेज
शर्करा – शक्कर
शलाका – सलाई
शाक – साग
श्राप – शाप
शिक्षा – सीख
शिर – सिर
शिला – सिल
शीतल – सीतल
शीर्ष – सीस
शुक – सुआ
शुण्ड – सूंड
शुष्क – सूखा
शूकर – सुअर
शून्य – सूना
श्मशान – मसान
श्मश्रु – मूँछ
श्मषान – समसान
श्यामल – सांवला
श्यालस – साला
श्याली – साली
श्रंखला – सांकल
श्रावण – सावन
श्रृंग – सींग
श्रृंगार – सिंगार
श्रृगाल – सियार
श्रेष्ठी – सेठ
श्वश्रु – सास
श्वसुर – ससुर
श्वास – साँस
षोडश – सोलह

स से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
संधि – सेंध
सत्य – सच
सन्ध्या – साँझ
सपत्नी – सौत
सप्त – सात
सरोवर – सरवर
सर्प – साँप
सर्सप – सरसों
साक्षी – साखी
सूची – सुई
सूत्र – सूत
सूर्य – सूरज
सौभाग्य – सुहाग
स्कन्ध – कंधा
स्तन – थन
स्तम्भ – खम्भा
स्थल – थल
स्थान – थान
स्थिर – थिर
स्नेह – नेह
स्पर्श – परस
स्फोटक – फोड़ा
स्वजन – साजन
स्वप्न – सपना
स्वर्ण – सोना
स्वर्णकार – सुनार
स्वसुर – ससुर

ह से तत्सम शब्द –

तत्सम-तद्भव
हंडी – हांडी
हट्ट – हाट
हरिण – हिरन
हरित – हरा
हरिद्रा – हल्दी
हर्ष – हरख
हस्त – हाथ
हस्ति – हाथी
हस्तिनी – हथिनी
हास्य – हँसी
हिन्दोला – हिण्डोला
हिरन – हरिण
हीरक – हीरा
हृदय – हिय
होलिका – होली

हिन्दी व्याकरण की सम्पूर्ण जानकारी 

तत्सम तद्भव शब्दों का वाक्य प्रयोग सहित उदाहरण:

अकस्मात (तत्सम) – अचानक (तद्भव)
अमन को अचानक (अकस्मात) अपने कमरे में सांप दिखाई दिया।
अकार्य (तत्सम) – अकाज (तद्भव)
मित्र तुम अकाज (अकार्य) इधर-उधर घूम कर अपना कीमती समय व्यर्थ कर रहे हो।
अक्षत (तत्सम) – अच्छत (तद्भव)
हिंदुओं की पूजा में अच्छत (अक्षत) का बहुत महत्व होता है।
अक्षर (तत्सम) – अच्छर (तद्भव)
रमा की लिखाई इतनी अच्छी है मानो एक-एक अच्छर (अक्षर) मोती में पिरोया हुआ हो।
अक्षि (तत्सम) – आँख (तद्भव)
पुत्र को नशे में देखकर पिता की आँख (अक्षि) खुली की खुली रह गई।
अक्षोट (तत्सम) – अखरोट (तद्भव)
रोहन ने क्रिसमस में अखरोट (अक्षोट) वाला केक बनाया।
अगणित (तत्सम) – अनगिनत (तद्भव)
आकाश के अनगिनत (अगणित) रहस्यों को जानने के लिए वैज्ञानिक खोज करते रहते हैं।
अगम्य (तत्सम) – अगम (तद्भव)
विश्व में कई ऐसे स्थान हैं जहाँ संसाधन तो उपलब्ध हैं लेकिन वे अगम (अगम्य) हैं।
अग्नि (तत्सम) – आग (तद्भव)
छोटी सी चिंगारी ने आग (अग्नि) का रूप ले कर खेत की तैयार फसल को राख कर दिया।
अग्र (तत्सम) – आगे (तद्भव)
समारोह में मुख्य अतिथि के आगे (अग्र) बच्चों ने नृत्य की बहुत सुन्दर प्रस्तुति दी।
अग्रणी (तत्सम) – अगाडी (तद्भव)
योगेश वैसे तो अगाड़ी (अग्रणी) बना फिरता है, लेकिन जब जरूरत पड़ी तो कहीं नजर ही नहीं आया।
अच्युत (तत्सम) – अचूक (तद्भव)
अर्जुन के तीर का निशाना अचूक (अच्युत) था।
अज्ञान (तत्सम) – अजान (तद्भव)
अंधविश्वास मनुष्य के अजान (अज्ञान) होने का मुख्य कारण है।
अट्टालिका (तत्सम) – अटारी (तद्भव)
राजस्थान की पुरानी इमारतों में अटारी (अट्टालिका) बहुत सुन्दर लगती हैं।
अद्य (तत्सम) – आज (तद्भव)
हमें आज (अद्य) का काम कल पर नहीं टालना चाहिए।
अन्धकार (तत्सम) – अँधेरा (तद्भव)
निशाचर जीव-जन्तु अंधेरा (अन्धकार) होने पर शिकार करते हैं।
अन्न (तत्सम) – अनाज (तद्भव)
इस साल भारत मे अनाज (अन्न) की फसल अच्छी हुई है।
अमावस्या (तत्सम) – अमावस (तद्भव)
अमावस (अमावस्या) की रात में चंद्रमा दिखाई नहीं देता है।
अमूल्य (तत्सम) – अमोल (तद्भव)
देश के सैनिक अपना अमोल (अमूल्य) जीवन देश के लिए कुर्बान कर देते हैं।
अमृत (तत्सम) – अमिय (तद्भव)
भगवान शिव ने अमिय (अमृत) को देवताओं में बाँटकर विष को ग्रहण किया था।
अम्बा (तत्सम) – अम्मा (तद्भव)
मेरी अम्मा (अम्बा) ने मेरी शिक्षा के लिए लोगों के घरों में काम तक किया है।
अम्लिका (तत्सम) – इमली (तद्भव)
ऋचा इतनी इमली (अम्लिका) खाती हैं कि उसका गला ही खराब हो गया।
अर्क (तत्सम) – आक (तद्भव)
आक (अर्क) का इस्तेमाल औषधियों में किया जाता है।
अर्द्ध (तत्सम) – आधा (तद्भव)
किशोर ने अपनी जमीन का आधा (अर्द्ध) हिस्सा खेती के लिए किराए पर दे दिया।
अर्पण (तत्सम) – अरपन (तद्भव)
राजा हरिश्चंद्र ने अपना सारा राज्य महर्षि विश्वामित्र को अरपन (अर्पण) कर दिया था।
अवगुण (तत्सम) – औगुण (तद्भव)
व्यक्ति के औगुण (अवगुण) उसकी तरक्की में बाधक होते हैं।
अवतार (तत्सम) – औतार (तद्भव)
भगवान विष्णु ने श्रीराम का औतार (अवतार) लेकर बहुत से राक्षसों का वध किया था।
अश्रु (तत्सम) – आँसू (तद्भव)
बेटे की दुर्घटना की खबर सुनते ही माँ की आँखो से आँसू (अश्रु) निकल गए।
अष्ट (तत्सम) – आठ (तद्भव)
हमारी ट्रेन आठ (अष्ट) बजे दिल्ली पहुँचेगी।
अष्टादश (तत्सम) – अठारह (तद्भव)
मेरे माता-पिता अठारह (अष्टादश) दिन की तीर्थ यात्रा पर जाएंगे।
आदित्यवार (तत्सम) – इतवार (तद्भव)
हमारे स्कूल के विद्यार्थी इतवार (आदित्यवार) को पुस्तक मेला देखने जाएंगे।
आभीर (तत्सम) – अहीर (तद्भव)
अहीर (आभीर) जाति के लोग अधिकतर गांय पालन का व्यवसाय करते हैं।
आमलक (तत्सम) – आँवला (तद्भव)
हर रोज आँवला (आमलक) खाना सेहत के लिए लाभदायक होता है।
आम्र (तत्सम) – आम (तद्भव)
आम (आम्र) एक बहुत ही स्वादिष्ट और रसीला फल है, तभी तो इसे फलों का राजा कहा जाता है।
आम्रचूर्ण (तत्सम) – अमचूर (तद्भव)
अमचूर (आम्रचूर्ण) का प्रयोग रसोई में मसालों के रूप में किया जाता है।
आरात्रिका (तत्सम) – आरती (तद्भव)
हरिद्वार में गंगा आरती (आरात्रिका) का दृश्य बहुत मनमोहक होता है।
आलस्य (तत्सम) – आलस (तद्भव)
आलस (आलस्य) के कारण व्यक्ति अपने महत्वपूर्ण अवसर से वंचित रह जाता है।
आशीष (तत्सम) – असीस (तद्भव)
बहू के गृह प्रवेश पर सभी बड़ों ने असीस (आशीष) दिए।
आश्चर्य (तत्सम) – अचरज (तद्भव)
जन्मदिन पर मोटरसाइकिल का उपहार पाकर मनोज को बहुत अचरज (आश्चर्य) हुआ।
आश्रय (तत्सम) – आसरा (तद्भव)
श्यामलाल ने अनाथ बच्चे को आसरा (आश्रय) देकर उसकी जिंदगी बना दी।
आश्विन (तत्सम) – आसोज (तद्भव)
आसोज (आश्विन) मास में बहुत से त्योहार मनाए जाते हैं।
इक्षु (तत्सम) – ईख (तद्भव)
इस बार हमारे खेत में ईख (इक्षु) की फसल बहुत अच्छी हुई है।
इष्टिका (तत्सम) – ईंट (तद्भव)
रमेश ने ईंट (इष्टिका) बनाने का व्यापार शुरु किया है।
ईप्सा (तत्सम) – इच्छा (तद्भव)
रोहन की इच्छा (ईप्सा) है कि वह सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करे।
ईर्ष्या (तत्सम) – इरषा (तद्भव)
हमें किसी के प्रति इरषा (ईर्ष्या) की भावना नहीं रखनी चाहिए।
उच्च (तत्सम) – ऊँचा (तद्भव)
पलक ने दसवीं की परीक्षा में जिले में प्रथम पाकर अपने स्कूल का नाम ऊँचा (उच्च) कर दिया।
उच्छवास (तत्सम) – उसास (तद्भव)
नीरू ने एक लंबी उसास (उच्छवास) ली और शोक सभा से चली गई।
उज्ज्वल (तत्सम) – उजला (तद्भव)
पंडित जी ने सोमेश की कुंडली देखकर कहा कि इसका भविष्य बहुत उजला (उज्ज्वल) है।
उत्साह (तत्सम) – उछाह (तद्भव)
परिवार में नया मेहमान के आने से दादा-दादी में ज्यादा उछाह (उत्साह) है।
उदघाटन (तत्सम) – उघाड़ना (तद्भव)
शहीद स्मारक को उघाड़ने (उदघाटन) के लिए मुख्यमंत्री गांव में आयेंगे।
उपालम्भ (तत्सम) – उलाहना (तद्भव)
ससुराल में मायके का उलाहना (उपालम्भ) मिलने पर बहू घर छोड़कर चली गई।
उलूक (तत्सम) – उल्लू (तद्भव)
मैंने पहली बार चिड़ियाघर में उल्लू (उलूक) देखा।
उलूखल (तत्सम) – ओखली (तद्भव)
प्राचीन समय में ओखली (उलूखल) में धान कूटा जाता था।
उष्ट्र (तत्सम) – ऊँट (तद्भव)
ऊँट (उष्ट्र) को मरुस्थल का जहाज भी कहते हैं।
ऊष्ण (तत्सम) – उमस (तद्भव)
आज मौसम में बहुत उमस (ऊष्ण) है।
ऋक्ष (तत्सम) – रीछ (तद्भव)
रीछ (ऋक्ष) ने लड़ाई में शेर को घायल कर दिया।
एकत्र (तत्सम) – इकट्ठा (तद्भव)
दिवाली के त्योहार पर सारे परिवार इकट्ठा (एकत्र) होकर त्यौहार मनाया।
एकादश (तत्सम) – ग्यारह (तद्भव)
मेरे लिए ग्यारह (एकादश) अंक बहुत शुभ है।
ओष्ठ (तत्सम) – ओँठ (तद्भव)
सुनील के ओंठ (ओष्ठ) पर कभी मुस्कुराहट नहीं आती।
कंकण (तत्सम) – कंगन (तद्भव)
मैंने मेले से लाख के कंगन (कंकण) खरीदे थे।
कच्छप (तत्सम) – कछुआ (तद्भव)
मैंने कल नदी किनारे एक बहुत बड़ा कछुआ (कच्छप) देखा।
कज्जल (तत्सम) – काजल (तद्भव)
रंजना हर समय अपनी आँखों में काजल (कज्जल) लगाए रहती है।
कटु (तत्सम) – कडवा (तद्भव)
करेला कड़वा (कटु) जरूर होता है पर यह स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है।
कण्टक (तत्सम) – काँटा (तद्भव)
बग़ीचे से फूल तोड़ते हुए मुझे काँटा (कण्टक) चुभ गया।
कदली (तत्सम) – केला (तद्भव)
मुकेश ने एक दर्जन केले (कदली) खाने की शर्त जीत ली।
कन्दुक (तत्सम) – गेंद (तद्भव)
कपिल ने इतनी तेज गेंद (कन्दुक)फेंकी कि जोशी जी की खिड़की का शीशा ही टूट गया।
कपाट (तत्सम) – किवाड़ (तद्भव)
भाई दूज के दिन केदारनाथ धाम के किवाड़ (कपाट) बंद होने पर केदारनाथ की यात्रा बंद हो जाती है।
कपोत (तत्सम) – कबूतर (तद्भव)
रहमान ने अपने घर में बहुत से कबूतर (कपोत) पाले हुए हैं।
कर्ण (तत्सम) – कान (तद्भव)
कान (कर्ण) के कच्चे व्यक्ति से दोस्ती करके मुकेश ने अपने लिए मुसीबत मोल ले ली है।
कर्तव्य (तत्सम) – करतब (तद्भव)
अमन के करतब (कर्तव्य) देखकर नहीं लगता कि वह इस बार पास हो पाएगा।
कर्पट (तत्सम) – कपड़ा (तद्भव)
मैंने अपने जन्मदिन के लिए रेशमी कपड़ा (कर्पट) खरीदा है।
कर्पूर (तत्सम) – कपूर (तद्भव)
कपूर (कर्पूर) का प्रयोग पूजा के लिए ही नहीं बल्कि आयुर्वेद में भी होता है।
कर्म (तत्सम) – काम (तद्भव)
मेहनत से काम (कर्म) करने पर ही सफलता मिलती है।
कल्लोल (तत्सम) – कलोल (तद्भव)
बच्चों का कलोल (कल्लोल) देख सभी को हंसी आ गई।
काक (तत्सम) – काग (तद्भव)
घर की मुंडेर पर जैसे ही काग (काक) का बोलना शुरू हुआ, दादी बोलीं कि महमान आने वाले हैं।
कार्तिक (तत्सम) – कातिक (तद्भव)
हिंदु धर्म में कातिक (कार्तिक) मास में दीप दान का बहुत महत्व होता है।
कार्य (तत्सम) – काज (तद्भव)
महेश अपनी पुत्री के विवाह का काज (कार्य) निपटा कर गंगा नहा लिया।
काष्ठ (तत्सम) – काठ (तद्भव)
पहाड़ी क्षेत्रों में काठ (काष्ठ) से मकान बनाए जाते हैं।
कास (तत्सम) – खाँसी (तद्भव)
दिलीप को रात भर इतनी खाँसी (कास) हुई कि वह सो नहीं पाया।
किंचित (तत्सम) – कुछ (तद्भव)
कोरोना के कारण शादी के समारोह में कुछ (किंचित) ही लोगों को बुलाया गया।
किरण (तत्सम) – किरन (तद्भव)
उदय होते हुए सूर्य की किरनें (किरण) हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक होती हैं।
कीट (तत्सम) – कीड़ा (तद्भव)
विषेले कीड़े (कीट) के काटने से रमेश का पैर सूज गया।
कीर्ति (तत्सम) – कीरति (तद्भव)
सचिन तेंदुलकर ने बहुत कम समय में विश्व में अपनी कीरति (कीर्ति) स्थापित कर ली थी।
कुंभकार (तत्सम) – कुम्हार (तद्भव)
कुम्हार (कुंभकार) मिट्टी के बर्तन व मूर्तीयाँ बनाते हैं।
कुक्कुर (तत्सम) – कुत्ता (तद्भव)
हमारा कुत्ता (कुक्कुर) बहुत समझदार और वफादार है।
कुक्षि (तत्सम) – कोख (तद्भव)
डॉक्टर ने बताया कि राधा की कोख (कुक्षि) में दो बच्चे हैं।
कुपुत्र (तत्सम) – कपूत (तद्भव)
नशे में चूर बेटे को देख कर माँ बोली कि ऐसे कपूत (कुपुत्र) से तो बेऔलाद होना अच्छा है।
कुब्ज (तत्सम) – कुबड़ा (तद्भव)
सड़क पर कुबडा (कुब्ज) व्यक्ति मदद माँग रहा था।
कुमार (तत्सम) – कुआँरा (तद्भव)
रमेश ने जब अपने गुरु से संन्यास की दीक्षा ली तो उसने आजन्म कुआँरा (कुमार) रहने का व्रत भी लिया।
कुमारी (तत्सम) – कुँवारी (तद्भव)
हमारे गांव में अभी भी कुँवारी (कुमारी) लड़कियों को अंधेरा होने पर बाहर नहीं निकलने देते।
कुष्ठ (तत्सम) – कोढ़ (तद्भव)
डॉक्टर ने मरीज को समझाते हुए कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि अब कोढ़ (कुष्ठ) का इलाज संभव है।
कूप (तत्सम) – कुँआ (तद्भव)
हमारे गांव के घर में कुआँ (कूप) है जिसका पानी बहुत ठण्डा रहता है।
कृपा (तत्सम) – किरपा (तद्भव)
ईश्वर की किरपा (कृपा) से हमारे घर में सुख समृद्धि का वास है।
कृपा (तत्सम) – किसान (तद्भव)
किसान (कृपा) खेत में बहुत मेहनत करके फसल उगाता है।
कृष्ण (तत्सम) – कान्हा (तद्भव)
यशोदा माँ कान्हा (कृष्ण) के नटखटपन को देख कर आनन्दित रहती थीं।
केवर्त (तत्सम) – केवट (तद्भव)
श्री राम चंद्र जी ने केवट (केवर्त) की नांव में बैठकर गंगा पार की थी।
कोकिला (तत्सम) – कोयल (तद्भव)
बसंत ऋतु आते ही कोयल (कोकिला) की मधुर आवाज सुनाई देने लगती है।
कोटि (तत्सम) – करोड़ (तद्भव)
संतोष की एक करोड़ (कोटि) की लॉटरी लगी है।
कोण (तत्सम) – कोना (तद्भव)
मैने हर कोना (कोण) छान मारा लेकिन मुझे मेरी पायल नहीं मिली।
कोष्ठिका (तत्सम) – कोठी (तद्भव)
शहरों में बुजुर्ग लोग सुरक्षा के लिए कोठियाँ (कोष्ठिका) छोड़कर फ्लेटों में रह रहे हैं।
क्लेश (तत्सम) – कलेश (तद्भव)
रामसखा साड़ी कमाई शराब में लुटाने के बाद रोज घर में कलेश (क्लेश) करता है।
क्षण (तत्सम) – छिन (तद्भव)
विद्यार्थियों का हर छिन (क्षण) बहुत कीमती होता है, उसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।
क्षत (तत्सम) – छत (तद्भव)
खेतों में भालू के हमले से किसान का शरीर छत (क्षत) हो गया।
क्षति (तत्सम) – छति (तद्भव)
दुर्घटना में हमारी कार की बहुत छति (क्षति) हो गई।
क्षत्रिय (तत्सम) – खत्री (तद्भव)
तुम एक खत्री (क्षत्रिय) हो, तुम्हे कायरता शोभा नहीं देती।
क्षार (तत्सम) – खार (तद्भव)
समुद्र के पानी में खार (क्षार) होता है।
क्षीण (तत्सम) – छीन (तद्भव)
तुम्हारा शरीर दिन पर दिन छीन (क्षीण) होता जा रहा है, तुम्हे जाकर डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
क्षीर (तत्सम) – खीर (तद्भव)
मेरी माँ मखाने की बहुत स्वादिष्ट खीर (क्षीर) बनाती हैं।
क्षेत्र (तत्सम) – खेत (तद्भव)
खेत (क्षेत्र) को किसान अपनी माँ के समान पूजते हैं।
गम्भीर (तत्सम) – गहरा (तद्भव)
सुमन हर विषय पर गहरा (गम्भीर) सोचती है।
गर्जर (तत्सम) – गाजर (तद्भव)
नये साल के दिन मेरी माँ गाजर (गर्जर) गाजर का हलवा जरूर बनाती हैं।
गर्त (तत्सम) – गड्ढा (तद्भव)
बारिश में सड़क के गड्ढे (गर्त) दुर्घटनाओं का बहुत बड़ा कारण बन जाते हैं।
गर्दभ (तत्सम) – गधा (तद्भव)
मुकेश कभी भी अपनी बुद्धि का प्रयोग नहीं करता इसीलिए उसके पिताजी उसे गधा (गर्दभ) बोलते हैं।
गर्भिणी (तत्सम) – गाभिन (तद्भव)
हमारी बहू गाभिन (गर्भिणी) है इसलिए डॉक्टर ने उसे आराम करने को सलाह दी है।
गर्मी (तत्सम) – घाम (तद्भव)
तेज घाम (गर्मी) में खेलने से रवि के शरीर पर लाल चकत्ते पड़ गये।
गहन (तत्सम) – घना (तद्भव)
हमारे गाँव के पास एक बहुत घना (गहन) जंगल है जहाँ से कभी-कभी जंगली जानवर आकर खेतों को बर्बाद कर देते हैं।
गात्र (तत्सम) – गात (तद्भव)
गर्मी के मौसम में बच्चो के गात (गात्र) पर घमौरियाँ हो जाती हैं।
गायक (तत्सम) – गवैया (तद्भव)
गायन प्रतियोगिता में किशन को सर्वश्रेष्ठ गवैया (गायक) के लिए विजयी घोषित किया गया।
गुण (तत्सम) – गुन (तद्भव)
छोटे-छोटे बच्चों ने अपनी गायकी का गुन (गुण) दिखाकर लोगों को आश्चर्य में डाल दिया।
गुम्फन (तत्सम) – गूंथना (तद्भव)
मुझे अनेक प्रकार से चोटी गूंथना (गुम्फन) अच्छा लगता है।
गुहा (तत्सम) – गुफा (तद्भव)
बहुत से साधू हिमालय की गुफाओं (गुहा) में तपस्या में लीं रहते हैं।
गृध (तत्सम) – गीध (तद्भव)
गीध (गृध) की दृष्टि इतनी तेज होती है कि वह अपना भोजन बहुत दूर से भी देख लेता है।
गृह (तत्सम) – घर (तद्भव)
जिस घर (गृह) में एकता होती है वहाँ सुख-शांति बनी रहती है।
गृहिणी (तत्सम) – घरनी (तद्भव)
हमारे घर की नई बहू में घरनी (गृहिणी) में सभी गुण हैं।
गौ (तत्सम) – गाय (तद्भव)
हिंदू धर्म में गाय (गौ) की पूजा की जाती है।
गोधूम (तत्सम) – गेंहू (तद्भव)
भारत में गेहूं (गोधूम) की बहुत अच्छी फसल होती है।
गोपालक (तत्सम) – ग्वाल (तद्भव)
गाय पालने वालों को ग्वाल (गोपालक) कहते हैं।
गोमय (तत्सम) – गोबर (तद्भव)
हमारे गांव में घर-घर में गोबर (गोमय) से बायोगैस बना कर प्रयोग में लाई जाती है।
गोस्वामी (तत्सम) – गुसाँई (तद्भव)
राघव ने गुसाँई (गोस्वामी) से दीक्षा लेने के बाद अपना घर-बार छोड़ दिया।
गौत्र (तत्सम) – गोत (तद्भव)
हिन्दू धर्म में शादी करने से पहले लड़का और लड़की के माता-पिता का गोत् (गौत्र) देखा जाता है।
गौर (तत्सम) – गोरा (तद्भव)
रीना ने कहा कि वह गोरे (गौर) वर्ण के लड़के से ही शादी करेगी।
ग्रन्थि (तत्सम) – गाँठ (तद्भव)
डॉक्टर ने बहुत मुश्किल के बाद श्याम के पेट से रसौली की गांठ (ग्रन्थि) निकाली।
ग्रहण (तत्सम) – गहन (तद्भव)
स्कूल के वार्षिक उत्सव पर मैंने मुख्य अतिथि जी से पुरस्कार गहन (ग्रहण) किया था।
ग्राम (तत्सम) – गाँव (तद्भव)
सुमन को उसके गाँव (ग्राम) वालों ने सरपंच पद के लिए चुना है।
ग्रामीण (तत्सम) – गँवार (तद्भव)
रोहित पढ़ा-लिखा होकर भी गँवारों (ग्रामीण) की तरह रहता है।
ग्राहक (तत्सम) – गाहक (तद्भव)
सेठ जी गाहकों (ग्राहक) के साथ इतने प्रेम से बोलते हैं कि गाहक और किसी दुकान की और नहीं जाते।
ग्रीवा (तत्सम) – गर्दन (तद्भव)
झुक कर पढ़ने की आदत से रिया की गर्दन (ग्रीवा) में दर्द बैठ गया है।
ग्रीष्म (तत्सम) – गर्मी (तद्भव)
गर्मी (ग्रीष्म) की छुट्टियों में हम शिमला घूमने जायेंगे।
घंटिका (तत्सम) – घंटी (तद्भव)
आरती में बजती हुई घंटी (घंटिका) बहुत मधुर लगती है।
घट (तत्सम) – घडा (तद्भव)
मिट्टी के घड़े (घट) का पानी ठंडा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी स्वास्थ्यवर्धक होता है।
घटिका (तत्सम) – घड़ी (तद्भव)
मेरे जन्मदिन पर मेरे मित्र ने मुझे उपहार में घड़ी (घटिका) दी है।
घृणा (तत्सम) – घिन (तद्भव)
हमें गरीब और दिव्यांग लोगों से घिन (घृणा) नहीं करनी चाहिए।
घृत (तत्सम) – घी (तद्भव)
मन्नत पूरी होने पर श्यामा ने घी (घृत) के दिये जलाये।
घोटक (तत्सम) – घोडा (तद्भव)
मुझे घोड़े (घोटक) की सवारी करना बहुत पसंद है।
चंचु (तत्सम) – चोँच (तद्भव)
हरे रंग के तोते पर लाल चोंच (चंचु) उसकी सुंदरता बढ़ा देती है।
चंद्र (तत्सम) – चाँद (तद्भव)
चाँद (चंद्र) की रोशनी में ताज महल का दृश्य अद्भुत लगता है।
चंद्रिका (तत्सम) – चाँदनी (तद्भव)
शरद पूर्णिमा की चाँदनी (चंद्रिका) रात में आसमान से अमृत की वर्षा होती है।
चक्र (तत्सम) – चक्कर (तद्भव)
बुरी संगति के चक्कर (चक्र) में अमन नशा करने लगा है।
चतुर्थ (तत्सम) – चौथ (तद्भव)
गणेश चौथ (चतुर्थ) के दिन माताएँ अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
चतुर्दश (तत्सम) – चौदह (तद्भव)
अमन के माता-पिता की एक दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर उसे चौदह (चतुर्दश) वर्ष की आयु में पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
चतुर्दिक (तत्सम) – चहुंओर (तद्भव)
सूरज के उदय होते ही चहुंओर (चतुर्दिक) उजाला हो गया।
चतुर्विंश (तत्सम) – चौबीस (तद्भव)
रामलाल की डेयरी में चौबीस (चतुर्विंश) गाए हैं।
चतुष्कोण (तत्सम) – चौकोर (तद्भव)
मैंने भूमि का एक चौकोर (चतुष्कोण) टुकड़ा खरीदा है।
चतुष्पद (तत्सम) – चौपाया (तद्भव)
बसंत पंचमी में हमारे गाँव में चौपायों (चतुष्पद) की प्रदर्शनी लगती है।
चर्म (तत्सम) – चमडा (तद्भव)
पशुओं के चमड़े (चर्म) से बहुत सी चीज़े बनाई जाती है।
चर्मकार (तत्सम) – चमार (तद्भव)
बबलू चर्मकार (चमार) बहुत सुंदर जूते बनाता है।
चवर्ण (तत्सम) – चबाना (तद्भव)
भोजन को चबा (चवर्ण) कर खाने से वह शीघ्र हज़म हो जाता है।
चिक्कण (तत्सम) – चिकना (तद्भव)
कुशल को चिकने (चिक्कण) और चमकीले पत्थर जमा करने का बहुत शौक है।
चित्रक (तत्सम) – चीता (तद्भव)
चीता (चित्रक) बहुत तेज दौड़ने वाला जंगली जानवर है।
चित्रकार (तत्सम) – चितेरा (तद्भव)
रोहन एक बहुत ही अच्छा चितेरा (चित्रकार) है।
चुंबन (तत्सम) – चूमना (तद्भव)
माँ के चूमने (चुंबन) से रोता हुआ बच्चा एक दम चूप हो गया।
चूर्ण (तत्सम) – चून (तद्भव)
आयुर्वेदिक दवाइयों में चून (चूर्ण) का बहुत प्रयोग होता है।
चैत्र (तत्सम) – चैत (तद्भव)
माँ दुर्गा के नवरात्रे चेत (चैत्र) मास मे आते हैं।
चौर (तत्सम) – चोर (तद्भव)
चोर (चौर) ने नौकर को बंधक बनाकर घर में चोरी कर ली।
छत्र (तत्सम) – छाता (तद्भव)
छाता (छत्र) हमें बारिश और धूप दोनों से ही बचाता है।
छाया (तत्सम) – छाँह (तद्भव)
तेज गर्मी में चलता हुआ राहगीर पेड़ की छाँह (छाया) में बैठ गया।
छिद्र (तत्सम) – छेद (तद्भव)
पत्थर से टकराने के कारण नांव में छेद (छिद्र) हो गया।
जंघा (तत्सम) – जाँघ (तद्भव)
दुर्घटना के बाद से मोहन की जाँघ (जंघा) में दर्द रहता है।
जन्म (तत्सम) – जनम (तद्भव)
गुप्ता जी के घर में बहुत समय बाद कन्या ने जनम (जन्म) लिया।
जव (तत्सम) – जौ (तद्भव)
हिन्दू धर्म में पूजा के कई कार्यों में जौं (जव) का प्रयोग किया जाता है।
जामाता (तत्सम) – जँवाई (तद्भव)
भारतीय संस्कृति में जँवाई (जामाता) की ससुराल में बहुत आव भगत होती है।
जिह्वा (तत्सम) – जीभ (तद्भव)
हमें अपनी जीभ (जिह्वा) से किसी को कटु वचन नहीं बोलने चाहिए।
जीर्ण (तत्सम) – झीना (तद्भव)
भिकारी ने झीना (जीर्ण) कपड़ा पहना हुआ था।
ज्येष्ठ (तत्सम) – जेठ (तद्भव)
जेठ (ज्येष्ठ) के महीने में बहुत गर्मी पड़ती है।
ज्योति (तत्सम) – जोत (तद्भव)
नवरात्रों में लोग अपने घरों में माता रानी की अखंड जोत (ज्योति) जगाते हैं।
झरण (तत्सम) – झरना (तद्भव)
पहाड़ों में ऊँचे-ऊँचे झरनों (झरण) से पानी गिरने का दृश्य बहुत ही मनमोहक होता है।
झरन (तत्सम) – झरना (तद्भव)
गाँव में आज भी अनाज छानने के लिए झरन (झरने) का उपयोग किया जाता है।
तड़ाग (तत्सम) – तालाब (तद्भव)
हमारे गाँव में लोग छोटे छोटे तालाब (तड़ाग) बनाकर मछली पालन का व्यवसाय भी करते हैं।
तण्डुल (तत्सम) – तन्दुल (तद्भव)
भारतीय भोजन बिना तनदुल (तण्डुल) के अधूरा होता है।
तपस्वी (तत्सम) – तपसी (तद्भव)
कल हमने आश्रम जाकर एक बहुत बड़े तपसी (तपस्वी) से आशीर्वाद लिया।
तप्त (तत्सम) – तपन (तद्भव)
गर्मी की तपन (तप्त) से राजू का मुँह लाल हो गया।
ताम्बूलिक (तत्सम) – तमोली (तद्भव)
तमोली (ताम्बूलिक) का प्रयोग पूजा में भी किया जाता है।
ताम्र (तत्सम) – ताँबा (तद्भव)
ताँबा (ताम्र) एक धातु का नाम है जिसका प्रयोग बर्तन और बिजली की तार बनाने में प्रयोग किया जाता है।
तिथिवार (तत्सम) – त्यौहार (तद्भव)
भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश है जहाँ कोई भी महीना किसी त्यौहार (तिथिवार) के बिना नहीं होता।
तिलक (तत्सम) – टीका (तद्भव)
हिंदू परम्परा में किसी भी शुभ कार्य से पहले माथे पर टीका (तिलक) लगाया जाता है।
तीक्ष्ण (तत्सम) – तीखा (तद्भव)
कुसम तीखा (तीक्ष्ण) खाने की शौकीन है।
तीर्थ (तत्सम) – तीरथ (तद्भव)
योगेश अपने माता-पिता को तीरथ (तीर्थ) यात्रा पर ले गया।
तुंद (तत्सम) – तोंद (तद्भव)
गणेश जी को बड़ी तोंद (तुंद) के कारण लंबोदर कहा जाता है।
तृण (तत्सम) – तिनका (तद्भव)
अधिकतर पक्षी अपना घोसला तिनकों (तृण) से बनाते हैं।
तैल (तत्सम) – तेल (तद्भव)
उर्मिला को कितने भी तेल (तैल) वाले व्यंजन खिला लो, उसका मन नहीं भरता।
त्रय (तत्सम) – तीन (तद्भव)
मैं खेत को सीचने के लिए तीन (त्रय) दिन से वर्षा का इंतज़ार कर रहा हूँ पर बादल हैं कि बरसते ही नहीं।
त्रयोदश (तत्सम) – तेरह (तद्भव)
कुछ लोग तेरह (त्रयोदश) अंक को शुभ नहीं मानते।
त्वरित (तत्सम) – तुरंत (तद्भव)
जुगल मां की बिमारी की खबर सुनते ही तुरंत (त्वरित) घर के लिए रवाना हो गया।
दंड (तत्सम) – डंडा (तद्भव)
पुलिस ने चोर को पकड़ कर उसकी डंडे (दंड) से पिटाई की।
दंत (तत्सम) – दाँत (तद्भव)
मेरी दादी का एक भी दाँत (दंत) खराब नहीं है।
दंतधावन (तत्सम) – दतून (तद्भव)
नीम की दातुन (दंतधावन) करने से दाँत मजबूत रहते हैं।
दक्ष (तत्सम) – दच्छ (तद्भव)
केशव इंजिनियर है और वह अपने काम में बहुत दच्छ (दक्ष) है।
दक्षिण (तत्सम) – दाहिना (तद्भव)
अभिषेक की पत्नी उसका दाहिना (दक्षिण) हाथ बनकर व्यापार में उसकी मदद करती है।
दद्रु (तत्सम) – दाद (तद्भव)
मुशायरे में लोगों ने सीमा की शायरी पर बहुत दाद (दद्रु) दी।
दधि (तत्सम) – दही (तद्भव)
मेरे दादा जी घर की जमी दही (दधि) ही खाते हैं।
दाह (तत्सम) – डाह (तद्भव)
आज कल लड़कियाँ भी डाह (दाह) संस्कार में भाग लेने लगी हैं।
दिशान्तर (तत्सम) – दिसावर (तद्भव)
एक देश से दूसरे देश में जाने को दिसावर (दिशान्तर) कहते हैं।
दीप (तत्सम) – दीया (तद्भव)
कार्तिक माह में दिया (दीप) दान का बहुत महत्व होता है।
दीपशलाका (तत्सम) – दीयासलाई (तद्भव)
बच्चों ने खेल-खेल में पूरी दियासलाई (दीपशलाका) खत्म कर दी।
दीपावली (तत्सम) – दिवाली (तद्भव)
दिवाली (दीपावली) पर सभी लोग अपने घर की साफ़-सफाई कर उसे सजाते हैं।
दुःख (तत्सम) – दुख (तद्भव)
हमें किसी के दुख (दुःख) का कारण नहीं बनना चाहिए।
दुग्ध (तत्सम) – दूध (तद्भव)
गाय का दूध (दुग्ध) बच्चों के लिए लाभदायक होता है।
दुर्बल (तत्सम) – दुबला (तद्भव)
विनीत बिमारी की वजह से दुबला (दुर्बल) हो गया है।
दुर्लभ (तत्सम) – दूल्हा (तद्भव)
दूल्हा (दुर्लभ) पक्ष की तरफ़ से दहेज की माँग के कारण नीता ने शादी करने से मना कर दिया।
दूर्वा (तत्सम) – दूब (तद्भव)
भगवान गणेश को दूब (दूर्वा) बहुत प्रिय है।
दृष्टि (तत्सम) – दीठि (तद्भव)
मोतिया के कारण मेरी दादी जी की दीठि (दृष्टि) कमजोर हो गई है।
दौहित्र (तत्सम) – दोहिता (तद्भव)
हमारा दोहिता (दौहित्र) ने आई.ए.एस. की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है।
द्वादश (तत्सम) – बारह (तद्भव)
अमावस के दिन सूर्यग्रहण बारह (द्वादश) बजे लगा था।
द्विगुणा (तत्सम) – दुगुना (तद्भव)
विदेश से आकर दीपक ने अपने व्यपार को दुगना (द्विगुणा) कर लिया।
द्वितीय (तत्सम) – दूजा (तद्भव)
तुम्हारे इलावा यह काम ओर कोई दूजा (द्वितीय) नहीं कर सकता है।
द्विपट (तत्सम) – दुपट्टा (तद्भव)
पंजाब के फुलकारी के दुपट्टों (द्विपट) की बात ही अलग है।
द्विप्रहरी (तत्सम) – दुपहरी (तद्भव)
गर्मियों में दोपहरी (द्विप्रहरी) की धूप बहुत तेज होती है।
द्विवर (तत्सम) – देवर (तद्भव)
आज सुशीला के देवर (द्विवर) की शादी है।
धनश्रेष्ठी (तत्सम) – धन्नासेठ (तद्भव)
रमेश हमेशा एसी बातें करता है जैसे वह कहीं का धन्नासेठ (धनश्रेष्ठी) है।
धरणी (तत्सम) – धरती (तद्भव)
धरती (धरणी) की रक्षा के लिए हमारे देश के सैनिक अपनी जान तक कुर्बान कर देते हैं।
धरित्री (तत्सम) – धरती (तद्भव)
हमें अपनी धरणी पर वृक्ष लगाकर (धरित्री) प्रकृति का सम्मान करना चाहिए।
धर्त्तूर (तत्सम) – धतूरा (तद्भव)
जहाँ धतूरा (धर्त्तूर) जहर है वहीँ आयुर्वेद में धतूरे (धर्त्तूर) का प्रयोग औषधि में भी किया जाता है।
धर्म (तत्सम) – धरम (तद्भव)
कश्मीरा धरम (धर्म) और कर्म करने वाली स्त्री है।
धान्य (तत्सम) – धान (तद्भव)
हमारे खेत का धान (धान्य) बहुत ही खुशबूदार होता है।
धूम्र (तत्सम) – धुँआ (तद्भव)
हवन में गीली लकड़ी जलाने से कमरों के अन्दर धुँआ (धूम्र) हो गया।
धूलि (तत्सम) – धूल (तद्भव)
धूल (धूलि) भरे वातावरण से मुझे एलर्जी हो जाती है।
धृष्ठ (तत्सम) – ढीठ (तद्भव)
सूरज बहुत ढीठ (धृष्ठ) व्यक्ति है वह नुकसान उठा लेता है परन्तु किसी की बात नहीं मानता।
धैर्य (तत्सम) – धीरज (तद्भव)
डॉक्टर सोमेश को समझाते हुए कहा कि तुम्हारी बिमारी जल्द ही ठीक हो जाएगी, थोड़ा धीरज (धैर्य) रखो।
नकुल (तत्सम) – नेवला (तद्भव)
मैंने जंगल में नेवले (नकुल) और सांप की लड़ाई देखी।
नक्षत्र (तत्सम) – नखत (तद्भव)
तुम्हारे नखत (नक्षत्र) अच्छे नहीं चल रहे बना बनाया काम बिगड़ जाता है।
नग्न (तत्सम) – नंगा (तद्भव)
हमें पवित्र नदियों में नंगा (नग्न) नहीं बल्कि कोई कपड़ा पहन कर नहाना चाहिए।
नप्तृ (तत्सम) – नाती (तद्भव)
आज मेरे नाती (नप्तृ) का जन्मदिन है।
नम्र (तत्सम) – नरम (तद्भव)
नरम (नम्र) व्यवहार का व्यक्ति हर माहौल के अनुसार ढल जाता है।
नयन (तत्सम) – नैन (तद्भव)
मुझे नृत्य में नैनों (नयन) की भाव भंगिमा बहुत सुंदर लगती है।
नव (तत्सम) – नौ (तद्भव)
गरिमा गणित के विषय़ में नौ (नव) अंको से फेल हो गई।
नवीन (तत्सम) – नया (तद्भव)
गुप्ता जी ने नया (नवीन) मकान खरीदा है।
नापित (तत्सम) – नाई (तद्भव)
निशांत ने नाई (नापित) की दुकान खोली है।
नारिकेल (तत्सम) – नारियल (तद्भव)
नारियल (नारिकेल) का प्रत्येक भाग उपयोगी होता है।
नासिका (तत्सम) – नाक (तद्भव)
सड़क दुर्घटना में नैतिक (नासिका) को नाक पर चोट आई है ।
निद्रा (तत्सम) – नीँद (तद्भव)
भयानक सपना देख कर मेरी नींद (निद्रा) खुल गई।
निपुण (तत्सम) – निपुन (तद्भव)
हमारी लड़की क्या, लड़का भी गृह कार्य में निपुन (निपुण) है।
निम्ब (तत्सम) – नीम (तद्भव)
नीम (निम्ब) एक गुणकारी औषधि है।
निम्बुक (तत्सम) – नींबू (तद्भव)
नींबू (निम्बुक) न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि इसे कई प्रकार से खाने में भी प्रयोग किया जाता है।
निर्वाह (तत्सम) – निबाह (तद्भव)
आजकल के समय में एक व्यक्ति की कमाई पर परिवार का निबाह (निर्वाह) बहुत मुश्किल है।
निशि (तत्सम) – निसि (तद्भव)
कुछ पशु-पक्षी निसि (निशि) में शिकार करते हैं।
निष्ठुर (तत्सम) – निठुर (तद्भव)
केशव निठुर (निष्ठुर) मनुष्य है, वह किसी को संकट में देखकर उसकी मदद नहीं करता।
नृत्य (तत्सम) – नाच (तद्भव)
पुराने समय में मदारी बंदर-बंदरिया का नाच (नृत्य) दिखाते थे।
नौका (तत्सम) – नाव (तद्भव)
हमने नैनीताल की झील में नाव (नौका) चलाने का आनन्द लिया।
पंक्ति (तत्सम) – पंगत (तद्भव)
लंगर में अमीर लोग भी पंगत (पंक्ति) में बैठकर प्रशाद ग्रहण करते हैं।
पंच (तत्सम) – पाँच (तद्भव)
माता कुंती के पाँच (पंच) पुत्र थे जिन्हें पाण्डव के नाम से भी जाना जाता है।
पंचदश (तत्सम) – पन्द्रह (तद्भव)
हमारे विद्यालय में पन्द्रह (पंचदश) दिनों का शीतकालीन अवकाश होता है।
पक्व (तत्सम) – पका (तद्भव)
पका (पक्व) हुआ आम बहुत मीठा और रसीला होता है।
पक्वान्न (तत्सम) – पकवान (तद्भव)
मेरी बहन की शादी में बहुत से पकवान (पक्वान्न) बनाये गए।
पक्ष (तत्सम) – पंख (तद्भव)
बादल की गरज सुनते ही चिड़ियाघर में मोर अपने पंख (पक्ष) उठा कर नाचने लगा।
पक्षी (तत्सम) – पंछी (तद्भव)
सुबह-सुबह बगीचे में पंछियों (पक्षी) का चहचहाना बहुत अच्छा लगता है।
पट्टिका (तत्सम) – पाटी (तद्भव)
बुरी संगति की पाटी (पट्टिका) के कारण मदनलाल ने अपने पिता से झगड़ा किया।
पत्र (तत्सम) – पत्ता (तद्भव)
प्राचीन ऋषि भोज पत्तो (पत्र) पर श्लोक लिखते थे।
पथ (तत्सम) – पंथ (तद्भव)
हमें किसी के पंथ (पथ) का रोड़ा नहीं बनना चाहिए।
पद्म (तत्सम) – पदम (तद्भव)
पदम (पद्म) पुष्प लक्ष्मी जी को बहुत प्रिय होता है।
परमार्थ (तत्सम) – परमारथ (तद्भव)
मदर टेरेसा का सारा जीवन परमारथ (परमार्थ) कार्यों में ही बीता था।
परशु (तत्सम) – फरसा (तद्भव)
परशुराम जी हमेशा अपने साथ फरसा (परशु) रखते थे।
परश्वः (तत्सम) – परसों (तद्भव)
मेरी परीक्षा का परिणाम परसों (परश्वः) आएगा ।
परीक्षा (तत्सम) – परख (तद्भव)
रोहन को हीरे की परख (परीक्षा) तुमसे ज्य़ादा है।
पर्पट (तत्सम) – पापड़ (तद्भव)
दीपक पापड़ (पर्पट) और आचार का व्यापार करता है।
पर्यंक (तत्सम) – पलंग (तद्भव)
हमने व्यापार मेले से नया पलंग (पर्यंक) खरीदा है।
पवन (तत्सम) – पौन (तद्भव)
आज बहुत शीत पौन (पवन) चल रही है।
पश्चाताप (तत्सम) – पछतावा (तद्भव)
श्री राम को वनवास भेजने के बाद केकई को बहुत पछतावा (पश्चाताप) हुआ था।
पाद (तत्सम) – पैर (तद्भव)
सोहन के पैर (पाद) सड़क दुर्घटना में घायल हो गए।
पानीय (तत्सम) – पानी (तद्भव)
आज कल जलाशयों का पानी (पानीय) सूख रहा है।
पाश (तत्सम) – फन्दा (तद्भव)
शेर शिकारी के फन्दे (पाश) में फस गया।
पाषाण (तत्सम) – पाहन (तद्भव)
मंदिरों में पाहन (पाषाण) शिवलिंग की पूजा की जाती है।
पितृ (तत्सम) – पितर (तद्भव)
मेरे घर में कल पितर (पितृ) पूजा का अनुष्ठान है।
पितृश्वसा (तत्सम) – बुआ (तद्भव)
गर्मियों की छुट्टियों में हम बुआ (पितृश्वसा) के घर जाएंगे।
पिपासा (तत्सम) – प्यास (तद्भव)
खेलने के बाद जब मुझे प्यास (पिपासा) लगी तब मैने नारियल पानी पी लिया।
पिप्पल (तत्सम) – पीपल (तद्भव)
हिंदू धर्म में लोग शनिवार को पीपल (पिप्पल) की पूजा करते हैं।
पीत (तत्सम) – पीला (तद्भव)
बसंत उत्सव पर सभी ने पीले (पीत) वस्त्र धारण किए।
पुच्छ (तत्सम) – पूँछ (तद्भव)
लंगूर की पूँछ (पुच्छ) बहुत लंबी होती है।
पुत्र (तत्सम) – पूत (तद्भव)
सरपंच के घर पूत (पुत्र) होने पर उन्होंने सारे गांव में मिठाई बांटी।
पुत्रवधू (तत्सम) – पतोहू (तद्भव)
हमारी पतोहू (पुत्रवधू) बहुत संस्कारी है।
पुष्कर (तत्सम) – पोखर (तद्भव)
राजस्थान के पवित्र पोखरा (पुष्कर) में कार्तिक पूर्णिमा को स्नान करने का बहुत महत्व होता है।
पुष्प (तत्सम) – पुहुप (तद्भव)
चमेली के पुहुप (पुष्प) की गंध से सारा बगीचा महक रहा है।
पूर्ण (तत्सम) – पूरा (तद्भव)
समय से पहले काम पूरा (पूर्ण) करने पर मालिक ने नौकरों को इनाम दिया।
पूर्णिमा (तत्सम) – पूनम (तद्भव)
पूनम (पूर्णिमा) की रात में ताजमहल का दृश्य बहुत ही मनमोहक लगता है।
पूर्व (तत्सम) – पूरब (तद्भव)
पूरब (पूर्व) दिशा में बहुत सी पवित्र नदियाँ बहती हैं।
पृष्ठ (तत्सम) – पीठ (तद्भव)
फर्श पर फिसलने से रीना की पीठ (पृष्ठ) में चोट लग गई।
पौत्र (तत्सम) – पोता (तद्भव)
राजपाल का पोता (पौत्र) बहुत परिश्रमी व होनहार है, वह हर परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करता है।
पौष (तत्सम) – पूस (तद्भव)
पूस (पौष) मास में सूर्य नारायण देवता की पूजा का विशेष विधान है।
प्रकट (तत्सम) – प्रगट (तद्भव)
द्रुपद की पुत्री द्रौपदी अग्नि से प्रगट (प्रकट) हुई थी।
प्रतिच्छाया (तत्सम) – परछाई (तद्भव)
बच्चा अंधेरे में अपनी ही परछाई (प्रतिच्छाया) देखकर डर गया।
प्रतिवासी (तत्सम) – पड़ोसी (तद्भव)
हमारे पड़ोसी (प्रतिवासी) शिवलाल बहुत अच्छे इंसान हैं, वह सभी की सहायता करने के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं।
प्रत्यभिज्ञान (तत्सम) – पहचान (तद्भव)
कपिल शर्मा की पहचान (प्रत्यभिज्ञान) उसकी कॉमेडी के कारण है।
प्रस्तर (तत्सम) – पत्थर (तद्भव)
हीरा एक कीमती पत्थर होता है जिसके गहने बनते हैं।
प्रस्वेद (तत्सम) – पसीना (तद्भव)
जब मानिक का झूठ पकड़ा गया तो उसके पसीने (प्रस्वेद) छूट गए।
प्रहर (तत्सम) – पहर (तद्भव)
सन्यासी लोग प्रथम पहर (प्रहर) में गंगा स्नान करते हैं।
प्रहरी (तत्सम) – पहरेदार (तद्भव)
सैनिक देश के पहरेदार (प्रहरी) होते हैं।
प्रहेलिका (तत्सम) – पहेली (तद्भव)
अध्यापिका ने बच्चों से पहेली (प्रहेलिका) पूछी।
प्रिय (तत्सम) – पिय (तद्भव)
माता-पिता को अपने बच्चे बहुत पिय (प्रिय) लगते हैं।
फणी (तत्सम) – फण (तद्भव)
सांप का फण (फणी) बहुत डरावना होता है।
फाल्गुन (तत्सम) – फागुन (तद्भव)
फागुन (फाल्गुन) मास में वृंदावन की होली देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
बंध (तत्सम) – बांध (तद्भव)
सरकार बड़ी नदियों पर बांध (बंध) बनाकर बिजली बनाने की प्रयोजना बना रही है।
बंध्या (तत्सम) – बांझ (तद्भव)
गरिमा की सास उसे बच्चा न होने के कारण बांझ (बंध्या) कहकर बुलाती है।
बधिर (तत्सम) – बहरा (तद्भव)
बहरे (बधिर) बच्चों का स्कूल अलग होता है।
बर्कर (तत्सम) – बकरा (तद्भव)
मुस्लिम लोग ईद पर बकरे (बर्कर) की बली देते हैं।
बलिवर्द (तत्सम) – बैल (तद्भव)
गांव में बहुत से किसान अभी भी बैल (बलिवर्द) द्वारा खेत जोतते हैं।
बालुका (तत्सम) – बालू (तद्भव)
पुलिस ने सुखवीर को नदी से बालू (बालुका) की चोरी करते पकड़ लिया।
बिंदु (तत्सम) – बूंद (तद्भव)
डॉक्टर ने कहा कि बच्चे को पाँच बूंद (बिंदु) दवाई देनी है।
बुभुक्षित (तत्सम) – भूखा (तद्भव)
मेहनत और ईमानदारी से कर्म करने वाला व्यक्ति कभी भूखा (बुभुक्षित) नहीं मरता।
भक्त (तत्सम) – भगत (तद्भव)
हनुमान जी भगवान राम के भगत (भक्त) थे ।
भगिनी (तत्सम) – बहन (तद्भव)
भाई ने रक्षा बंधन के त्य़ौहार पर अपनी बहन (भगिनी) को उपहार दिया।
भद्र (तत्सम) – भला (तद्भव)
वह भला (भद्र) व्यक्ति था, जो मेरे दादाजी को घर तक छोड़ने आया।
भल्लुक (तत्सम) – भालू (तद्भव)
मैंने चिड़ियाघर में एक बहुत बड़ा भालू (भल्लुक) देखा।
भस्म (तत्सम) – भसम (तद्भव)
शिव योगी अपने शरीर पर भसम (भस्म) धारण करते हैं।
भागिनेय (तत्सम) – भानजा (तद्भव)
मेरा भानजा (भागिनेय) पुलिस ऑफिसर है।
भाद्रपद (तत्सम) – भादो (तद्भव)
कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार भादो (भाद्रपद) मास में आता है।
भिक्षा (तत्सम) – भीख (तद्भव)
सन्यासी धर्म में सन्यासी भीख (भिक्षा) मांग कर जीवन यापन करता है और सभी के हित के लिए कार्य करता है।
भिक्षुक (तत्सम) – भिखारी (तद्भव)
मैंने अंधे भिखारी (भिक्षुक) को भोजन कराया।
भुजा (तत्सम) – बाँह (तद्भव)
तैराक ने डूबते बच्चे की बाँह (भुजा) पकड़कर बच्चे को बचा लिया।
भ्रत्जा (तत्सम) – भतीजा (तद्भव)
मेरा भतीजा (भ्रत्जा) विदेश में डॉक्टर है।
भ्रमर (तत्सम) – भौंरा (तद्भव)
बगीचे में फूलों पर बहुत से भौंरे (भ्रमर) घूम रहे हैं।
भ्राता (तत्सम) – भाई (तद्भव)
मीरा के माता-पिता के देहांत के बाद उसके भाई (भ्राता) ने उसकी परवरिश की थी।
भ्रातृजा (तत्सम) – भतीजी (तद्भव)
मेरी भतीजी (भ्रातृजा) बहुत ही नटखट है।
भ्रातृजाया (तत्सम) – भौजाई (तद्भव)
मेरी नई भौजाई (भ्रातृजाया) ने अपने मधुर व्यवहार से परिवार के सभी सदस्यों का दिल जीत लिया।
भ्रू (तत्सम) – भौं (तद्भव)
नृत्य करते वक्त नर्तकी भौं (भ्रू) को नचाकर अनेक मुद्राएँ बनाती है।
मकर (तत्सम) – मगर (तद्भव)
मगर (मकर) एक ऐसा जीव है जो जमीन और पानी दोनों में रह सकता है।
मक्षिका (तत्सम) – मक्खी (तद्भव)
मक्खी (मक्षिक) गंदगी पर बैठती है और बहुत सी बीमारियां फैलाती है।
मणिकार (तत्सम) – मणिहार (तद्भव)
हमने अपनी बेटी को शादी के लिए मणिहार (मणिकार) से आभूषण खरीदे।
मत्स्य (तत्सम) – मछली (तद्भव)
मेरे पिताजी अपने घुटनों पर मछली (मत्स्य) के तेल की मालिश करते हैं।
मदोन्मत्त (तत्सम) – मतवाला (तद्भव)
जबसे गांव का जमींदार मंत्री बना है तब से वह मतवाला (मदोन्मत्त) होकर घूम रहा है।
मद्य (तत्सम) – मद (तद्भव)
शाम होते ही किशोर मद (मद्य) में मस्त हो जाता है।
मनीचिका (तत्सम) – मिर्च (तद्भव)
मिर्च (मनीचिका) का प्रयोग मसालों में किया जाता है्।
मनुष्य (तत्सम) – मानुष (तद्भव)
पृथ्वी पर सबसे बुद्धिमान प्राणी मानुष (मनुष्य) है जिसने नई – नई चीजों की खोज की है।
मयूर (तत्सम) – मोर (तद्भव)
मोर (मयूर) भारत का राष्ट्रीय पक्षी है।
मरीच (तत्सम) – मिर्च (तद्भव)
मिर्च (मरीच) भोजन के स्वाद को बढ़ा देती है।
मर्कटी (तत्सम) – मकड़ी (तद्भव)
मकड़ी (मर्कटी) अपने जाले में बहुत से कीट-पतंगों को फंसा कर मार डालती है।
मल (तत्सम) – मैल (तद्भव)
कई बिमारियों का मैल (मल) की जांच के बाद ही पता किया जाता है।
मशक (तत्सम) – मच्छर (तद्भव)
मच्छर (मशक) के काटने से मलेरिया, डेंगू जैसी भयंकर बीमारियाँ फैलती हैं।
मशकहरी (तत्सम) – मसहरी (तद्भव)
मच्छर से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए हमें मसहरी (मशकहरी) लगा कर सोना चाहिए।
मश्रु (तत्सम) – मूंछ (तद्भव)
सेना के अधिकारी लोग अधिकतर बड़ी-बड़ी मूछें (मश्रु) रखते हैं।
मस्तक (तत्सम) – माथा (तद्भव)
हाथी का माथा (मस्तक) बहुत बड़ा होता है।
महिषी (तत्सम) – भैंस (तद्भव)
मुकेश की भैंस (महिषी) एक दिन में सात लीटर दूध देती है।
मातुल (तत्सम) – मामा (तद्भव)
मेरे मामा (मातुल) का फार्म हाऊस बहुत बडा व सुंदर बना हुआ है।
मातृ (तत्सम) – माता (तद्भव)
मेरी माता (मातृ) जी तीर्थ यात्रा पर गई हुई हैं।
मार्ग (तत्सम) – मारग (तद्भव)
हमारी कॉलोनी के मारग (मार्ग) में बहुत हरे भरे पेड़ लगे हुए हैं।
मास (तत्सम) – माह (तद्भव)
हम पिछले साल दिसंबर माह (मास) में गोवा घूमने गए थे।
मित्र (तत्सम) – मीत (तद्भव)
सलोनी मेरी सबसे अच्छी मीत (मित्र) है।
मिष्ट (तत्सम) – मीठा (तद्भव)
मुझे भोजन खाने के बाद मीठा (मिष्ट) खाना बहुत पसंद है
मिष्ठान्न (तत्सम) – मिठाई (तद्भव)
चमन को मीठा इतना पसन्द है कि उसके आगे कोई भी मिठाई (मिष्ठान्न) हो वह एकदम खत्म कर देता है।
मुख (तत्सम) – मुँह (तद्भव)
शेर के मुँह (मुख) इंसान का खून लग गया है इसलिए गांव की ओर शिकार के लिए आता है।
मुषल (तत्सम) – मूसल (तद्भव)
गांव के लोग मूसल (मुषल) से धान कूटते हैं।
मुष्टि (तत्सम) – मुट्ठी (तद्भव)
पिता ने कम अंक लाने पर बेटे को डांटा तो बेटे ने गुस्से में अपनी मुट्ठी (मुष्टि) बंद कर ली।
मूत्र (तत्सम) – मूत (तद्भव)
आयुर्वेदिक दवाइयों में गाय़ के मूत (मूत्र) का अर्क डाला जाता है।
मूल्य (तत्सम) – मोल (तद्भव)
आजकल गांव में भी जमीन का मोल (मूल्य) बहुत अधिक है।
मूषक (तत्सम) – मूसा (तद्भव)
गणेश जी का वाहन मूसा (मूषक) है।
मृग (तत्सम) – मिरग (तद्भव)
शेर को देखते ही मिरग (मृग) भागकर जंगल में छुप गया।
मृतघट (तत्सम) – मरघट (तद्भव)
अघोरी सन्यासी मरघट (मृतघट) में जा कर पूजा करते हैं।
मृत्तिका (तत्सम) – मिट्टी (तद्भव)
हमारे खेत की मिट्टी (मृत्तिका) बहुत उपजाऊ है उस पर बहुत अच्छी फसल होती है।
मृत्यु (तत्सम) – मौत (तद्भव)
गौरी के माता पिता की विमान दुर्घटना में मौत (मृत्यु) हो गई।
मेघ (तत्सम) – मेह (तद्भव)
आधी रात को मेह (मेघ) बहुत तेज बरसे और बहुत से पेड़ गिर गए।
मौक्तिक (तत्सम) – मोती (तद्भव)
मेरी माता जी ने मुझे मेरे जन्मदिन पर मोतियों (मौक्तिक) का हार उपहार में दिया था।
यजमान (तत्सम) – जजमान (तद्भव)
पंडित जी ने अपने जजमान (यजमान) के यहाँ पूरे विधि-विधान से पूजा कर के जजमान को खुश कर दिया।
यत्न (तत्सम) – जतन (तद्भव)
पिता ने मुकुल को समझाते हुए कहा कि पढ़ाई में थोड़ा जतन (यत्न) करो नहीं तो आगे पछताओगे।
यमुना (तत्सम) – जमुना (तद्भव)
इलाहबाद में जमुना (यमुना) नदी का गंगा के साथ संगम होता है।
यश (तत्सम) – जस (तद्भव)
इंडियन आइडल का खिताब जीतकर सलमान अली को बहुत जस (यश) मिला।
यशोदा (तत्सम) – जसोदा (तद्भव)
जसोदा (यशोदा) माँ कन्हैया कि बाल लीला देख कर खुश होती थी।
युक्ति (तत्सम) – जुगत (तद्भव)
जुगत (युक्ति) लगाने से कुनाल को सरकारी नौकरी मिल गई।
युवा (तत्सम) – जवान (तद्भव)
जवान (युवा) पीढ़ी रुढ़िवादी विचारों को छोड़कर तर्कों पर आगे बढ़ती है।
योग (तत्सम) – जोग (तद्भव)
जोग (योग) करने से बहुत सी बीमारियाँ खत्म हो जाती हैं।
योगी (तत्सम) – जोगी (तद्भव)
जोगी (योगी) अपना सारा जीवन तपस्या और समाज की सेवा में लगा देता है।
यौवन (तत्सम) – जोबन (तद्भव)
शीला जोबन (यौवन) में ही विधवा हो गई थी।
रक्षा (तत्सम) – राखी (तद्भव)
मुसीबत में जब परिवार वालों ने सुशीला का साथ छोड़ दिया तो उसने कहा कि मेरा राखी (रक्षा) भगवान है।
रज्जु (तत्सम) – रस्सी (तद्भव)
उमेश ने रस्सी (रज्जु) की मदद से गड्ढे में गिरे बिल्ली के बच्चे की जान बचाई।
राजपुत्र (तत्सम) – राजपूत (तद्भव)
सारंग तो सिर्फ नाम का ही राजपूत है, जहाँ हिम्मत दिखाने का समय आता है वहाँ से एकदम गायब हो जाता है।
रात्रि (तत्सम) – रात (तद्भव)
आधी रात (रात्रि) को मेह बहुत तेज बरसे और बहुत से पेड़ गिर गए।
रिक्त (तत्सम) – रीता (तद्भव)
हमारी कंपनी में एक कर्मचारी का स्थान रीता (रिक्त) है।
रुदन (तत्सम) – रोना (तद्भव)
माँ को देखते ही बालक का रोना (रुदन) बंद हो गया।
रूष्ट (तत्सम) – रूठा (तद्भव)
सफाई करते हुए माँ से बच्चे का खिलौना टूट गया तो बच्चा माँ से रूठ (रूष्ट) गया।
लक्ष (तत्सम) – लाख (तद्भव)
सरकार द्वारा चलाई गई योजना लाखों (लक्ष) किसानों को लाभ पहुंचाएगी।
लक्षण (तत्सम) – लक्खन (तद्भव)
मदनलाल के बेटे को रात को देर से घर आते देख मुझे उसके लक्खन (लक्षण) ठीक नहीं लगे।
लक्ष्मण (तत्सम) – लखन (तद्भव)
जहाँ राम विनम्र और शांत स्वभाव के थे वहीँ लखन (लक्ष्मण) शीघ्र क्रोधित होने वाले और नटखट थे।
लक्ष्मी (तत्सम) – लछमी (तद्भव)
रमा अपनी बहू को लछमी (लक्ष्मी) मानती है क्योंकि जब से वह घर में आयी है उसके घर में खुशियाँ ही खुशियाँ हैं।
लज्जा (तत्सम) – लाज (तद्भव)
मुसीबत के समय जिस मित्र ने तुम्हारी सहायता की थी, आज तुम उसी की बुराई कर रहे हो, तुम्हे लाज (लज्जा) नहीं आती।
लवंग (तत्सम) – लौंग (तद्भव)
लौंग (लवंग) का तेल लगाते ही मेरा दाँत का दर्द एकदम ठीक हो गया।
लवण (तत्सम) – नौन (तद्भव)
व्यंजनों में नोन (लवण) की मात्रा संतुलित ना हो तो स्वाद नहीं आता।
लवणता (तत्सम) – लुनाई (तद्भव)
समुद्र के जल में लुनाई (लवणता) की मात्रा होने के कारण ही वह खारा होता है।
लेपन (तत्सम) – लीपना (तद्भव)
त्योहारों के अवसर पर गाय के गोबर से घर लीपना (लेपन) शुभ माना जाता है।
लोक (तत्सम) – लोग (तद्भव)
हमारी सोसाइटी की लोग (लोक) बहुत ही सहायता करने वाले हैं।
लोमशा (तत्सम) – लोमड़ी (तद्भव)
लोमड़ी (लोमशा) एक चालाक और बुद्धिमान जंगली जानवर है जो सर्वहारी है।
लौह (तत्सम) – लोहा (तद्भव)
ओमप्रकाश ने लोहे (लौह) का कारखाना खोला है।
लौहकार (तत्सम) – लुहार (तद्भव)
लुहार (लौहकार) एक व्यवसायिक जाति है जो औजार बनाती है।
वंश (तत्सम) – बाँस (तद्भव)
मेरे बगीचे में बाँस (वंश) से बनी छतरी लगी है।
वंशी (तत्सम) – बाँसुरी (तद्भव)
श्री कृष्ण को बाँसुरी (वंशी) बहुत प्रिय थी और वे हमेशा उसे अपने साथ रखते थे।
वक (तत्सम) – बगुला (तद्भव)
बगुला (वक) झीलों और तालाबों में रहने वाला लंबी चोच का पक्षी है, जो छोटी मछलियों का शिकार करता है।
वचन (तत्सम) – बचन (तद्भव)
कोकिला ने रोमिल को मदद करने का बचन (वचन) तो दे दिया लेकिन जरूरत के समय मुँह मोड़ लिया।
वज्रांग (तत्सम) – बजरंग (तद्भव)
हनुमान जी का शरीर वज्र के समान मजबूत होने के कारण उन्हें बजरंग (वज्रांग) भी कहा जाता है।
वट (तत्सम) – बड (तद्भव)
बड (वट) भारत का राष्ट्रीय पेड़ है।
वणिक (तत्सम) – बनिया (तद्भव)
बनिये (वणिक) वर्ण के लोग मुख्य रूप से व्यापार करना पसंद करते हैं।
वत्स (तत्सम) – बच्चा (तद्भव)
पंडित जी ने कुंडली देखते ही बता दिया कि तुम्हारा बच्चा (वत्स) बहुत होनहार है।
वधू (तत्सम) – बहू (तद्भव)
कपिल की बहू (वधू) बहुत पड़ी-लिखी, सुंदर और सुशील है।
वरयात्रा (तत्सम) – बरात (तद्भव)
मेरे भाई की बरात (वरयात्रा) बहुत धूमधाम से निकली।
वर्ण (तत्सम) – बरन (तद्भव)
कृष्ण का बरन (वर्ण) काला था इसलिए उनको श्याम भी कहते हैं।
वर्ष (तत्सम) – बरस (तद्भव)
भगवान श्री राम को चोदाह बरस (वर्ष) का वनवास मिला था।
वर्षा (तत्सम) – बरसात (तद्भव)
बरसात (वर्षा) के दिनों में हमारे मोहल्ले में पानी भर जाता है।
वल्स (तत्सम) – बछड़ा (तद्भव)
मेरी गाय ने काले और सफेद रंग का बछड़ा (वल्स) दिया है।
वाणी (तत्सम) – बानी (तद्भव)
मृदुला अपनी मधुर बानी (वाणी) के कारण सभी को अपना मित्र बना लेती है।
वानर (तत्सम) – बंदर (तद्भव)
बंदर (वानर) बहुत नटखट और शरारती होते हैं।
वार्ता (तत्सम) – बात (तद्भव)
सरपंच ने बात (वार्ता) करके गांव के लोगों का झगड़ा सुलझा दिया।
वाष्प (तत्सम) – भाप (तद्भव)
डॉक्टर ने कहा कि भाप (वाष्प) लेने से तुम्हारा गला ठीक हो जाएगा।
विंश (तत्सम) – बीस (तद्भव)
अनमोल की बीस (विंश) वर्ष में सरकारी नौकरी लग गई।
विकार (तत्सम) – बिगाड़ (तद्भव)
गरिष्ठ आहार खाने से सोनू ने अपना स्वास्थ्य बिगाड़ (विकार) लिया है।
विद्युत (तत्सम) – बिजली (तद्भव)
आंधी तूफान आने के कारण आज शहर में बिजली (विद्युत) नहीं है।
विवाह (तत्सम) – ब्याह (तद्भव)
मेरी बहन का ब्याह (विवाह) फाइव स्टार होटल में हुआ था।
विष्ठा (तत्सम) – बीट (तद्भव)
गर्मी से बचने के लिए मैं पेड़ के नीचे खड़ा हुआ, तभी पक्षी ने मेरे ऊपर बीट (विष्ठा) कर दी।
वीणा (तत्सम) – बीना (तद्भव)
मैंने अपने गुरुजी से बीना (वीणा) बजाने की शिक्षा ली है।
वीरवर्णिनी (तत्सम) – बीरबानी (तद्भव)
पश्चिम उत्तर प्रदेश और हरयाणा में महिलाओं को बीरबानी (वीरवर्णिनी) कहने का रिवाज है।
वृक्ष (तत्सम) – बिरख (तद्भव)
हमने अपने बगीचे में आम के बिरख (वृक्ष) लगाए हैं।
वृद्ध (तत्सम) – बुड्ढा (तद्भव)
मैने जब बुड्ढे (वृद्ध) व्यक्ति को बैठने के लिए स्थान दिया तो उन्होंने मुझे बहुत आशीर्वाद दिया।
वृश्चिक (तत्सम) – बिच्छू (तद्भव)
बिच्छू (वृश्चिक) का डंक बहुत दर्दनाक और जहरीला होता है।
वृषभ (तत्सम) – बैल (तद्भव)
गाँव में बैल (वृषभ) बैलगाड़ी चलाने व खेतों में हल जोतने के काम आता है।
वैर (तत्सम) – बैर (तद्भव)
हमें किसी से बैर (वैर) नहीं रखना चाहिए।
व्यथा (तत्सम) – विथा (तद्भव)
स्त्री की व्यथा (व्यथा) उसके शब्दो से नहीं उसकी आंखों से झलक रही थी।
व्याघ्र (तत्सम) – बाघ (तद्भव)
जंगल से गुजरते वक्त हमारी गाड़ी के आगे बाघ (व्याघ्र) आ गया।
शकट (तत्सम) – छकड़ा (तद्भव)
अभी भी गांव में लोग छकड़ा (शकट) गाड़ी से सामान ढोते हैं।
शत (तत्सम) – सौ (तद्भव)
जब विराट कोहली सौ (शत) रन बनाता है तो स्टेडियम तालियों से गूंज उठता है।
शप्तशती (तत्सम) – सतसई (तद्भव)
दुर्गा के नवरात्र में सब सतसई (शप्तशती) का पाठ करते हैं।
शय्या (तत्सम) – सेज (तद्भव)
अमीर लोगों को मखमली सेज (शय्या) पर भी नींद नहीं आती जबकि एक मजदूर पत्थरों की सेज पर भी सुख की नींद सोता है।
शर्करा (तत्सम) – शक्कर (तद्भव)
खीर में शक्कर (शर्करा) बहुत अधिक है।
शलाका (तत्सम) – सलाई (तद्भव)
साक्षी ने सलाई (शलाका) से बहुत सुंदर स्वेटर बनाया है।
शाक (तत्सम) – साग (तद्भव)
सर्दी के मौसम में साग (शाक) खाने से शरीर स्वस्थ रहता है।
श्राप (तत्सम) – शाप (तद्भव)
गणेश जी के शाप (श्राप) के कारण चंद्रमा घटता बढ़ता रहता है।
शिक्षा (तत्सम) – सीख (तद्भव)
बुजुर्गों की सीख (शिक्षा) में अनुभव शामिल होता है।
शिर (तत्सम) – सिर (तद्भव)
छत से गिरने के कारण रेखा के सिर (शिर) पर चोट लग गई है।
शिला (तत्सम) – सिल (तद्भव)
जब मैं अपने दोस्तों के साथ पिकनिक पर गया तो वहां हमने सिल (शीला) पर बैठकर प्रकृति का आनंद लिया।
शीतल (तत्सम) – सीतल (तद्भव)
बारिश होने के बाद पवन सीतल (शीतल) हो गई।
शीर्ष (तत्सम) – सीस (तद्भव)
हम गुरु पूर्णिमा पर शिर्डी साईं बाबा के चरणों में सीस (शीर्ष) नवाने जायेंगे।
शुक (तत्सम) – सुआ (तद्भव)
मैंने पहली बार अपने पड़ोसी के घर बोलने वाला सुआ (शुक) देखा।
शुण्ड (तत्सम) – सूंड (तद्भव)
हाथी के झुण्ड ने अपनी सूंड (शुण्ड) से गन्ने का खेत उजाड़ दिया।
शुष्क (तत्सम) – सूखा (तद्भव)
इस साल अच्छी बारिश ना होने के कारण बहुत सी जगह सूखा (शुष्क) पड़ गया।
शूकर (तत्सम) – सुअर (तद्भव)
मोहल्ले में गन्दगी होने के कारण अब वहाँ सूअर (शूकर) भी आने लगे हैं।
शून्य (तत्सम) – सूना (तद्भव)
गाँव में जैसे ही डाकू आये सारा गाँव सूना (शून्य) हो गया।
श्मशान (तत्सम) – मसान (तद्भव)
अघोरी सन्यासी मसान (श्मशान) में रह कर पूजा करते हैं।
श्मश्रु (तत्सम) – मूँछ (तद्भव)
कुछ लोगों का व्यक्तित्व मूछों (श्मश्रु) से अच्छा लगता है।
श्मषान (तत्सम) – समसान (तद्भव)
हिन्दू धर्म में अधिकतर महिलाएं श्मशान (श्मषान) में नहीं जाती।
श्यामल (तत्सम) – सांवला (तद्भव)
कृष्ण का सांवला (श्यामल) रंग बहुत आकर्षक लगता है।
श्यालस (तत्सम) – साला (तद्भव)
महेश का साला (श्यालस) जिला अधिकारी है।
श्याली (तत्सम) – साली (तद्भव)
सुनील की साली (श्याली) डॉक्टर है।
श्रंखला (तत्सम) – सांकल (तद्भव)
सभी बच्चे स्कूल में सांकल (श्रृंखला) बनाकर चलते हैं।
श्रावण (तत्सम) – सावन (तद्भव)
सावन (श्रावण) में लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं।
श्रृंग (तत्सम) – सींग (तद्भव)
बारहसिंघा की सुंदरता उसके सिंघो (श्रृंग) से होती है।
श्रृंगार (तत्सम) – सिंगार (तद्भव)
बांकेबिहारी मंदिर में राधा-कृष्ण का जैसा सिंगार (श्रृंगार) होता है वैसा मैंने कहीं नहीं देखा।
श्रृगाल (तत्सम) – सियार (तद्भव)
हमने सियार (श्रृगाल) के बच्चे को कुत्ता समझ कर पाल लिया।
श्रेष्ठी (तत्सम) – सेठ (तद्भव)
मधुसूदन पैसे का ही सेठ (श्रेष्ठी) नहीं है बल्कि बुद्धि का भी सेठ है।
श्वश्रु (तत्सम) – सास (तद्भव)
प्रीति की सास (श्वश्रु) सरकारी अध्यापिका है।
श्वसुर (तत्सम) – ससुर (तद्भव)
ज्योति के ससुर (श्वसुर) जी इस महीने रिटायर हो जाएंगे।
श्वास (तत्सम) – साँस (तद्भव)
जैसे ही मौसम बदलता है मेरी बुआ जी को साँस (श्वास) लेने में दिक्कत होती है।
संधि (तत्सम) – सेंध (तद्भव)
जब कोई राजा हारने लगता है तो वह दूसरे राजा से सेंध (संधि) कर लेता है।
सत्य (तत्सम) – सच (तद्भव)
कैदी के सच (सत्य) बोलने से उसकी सजा कम हो गई।
सन्ध्या (तत्सम) – साँझ (तद्भव)
पक्षी साँझ (सन्ध्या) होते ही अपने घोसलों में चले जाते हैं।
सपत्नी (तत्सम) – सौत (तद्भव)
सौत (सपत्नी) के आते ही पहली पत्नी ससुराल छोड़कर चली गई।
सप्त (तत्सम) – सात (तद्भव)
मुझे इंद्रधनुष के सात (सप्त) रंग बहुत सुंदर लगते हैं।
सरोवर (तत्सम) – सरवर (तद्भव)
गर्मियों के मौसम में हम पास के सरवर (सरोवर) में तैराकी करने जाते हैं।
सर्प (तत्सम) – साँप (तद्भव)
साँप (सर्प) के डसने से रामलाल की मृत्यु हो गई।
सर्सप (तत्सम) – सरसों (तद्भव)
गांव में हरे भरे सरसों (सर्सप) के खेत बहुत सुंदर लग रहे थे।
साक्षी (तत्सम) – साखी (तद्भव)
ईश्वर तुम्हारे कर्मों का साखी (साक्षी) है तुम्हे तुम्हारे पुण्यों का फल अवश्य मिलेगा।
सूची (तत्सम) – सुई (तद्भव)
माँ की नजर कमजोर होने के कारण वह सुई (सूची) में धागा नहीं डाल सकती हैं।
सूत्र (तत्सम) – सूत (तद्भव)
राघव गरीब है और वरुण अमीर, पर दोनों मित्र प्रेम के सूत (सूत्र) से बंधे हुए हैं।
सूर्य (तत्सम) – सूरज (तद्भव)
सूरज (सूर्य) के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
सौभाग्य (तत्सम) – सुहाग (तद्भव)
अपनी सुहाग (सौभाग्य) की रक्षा के लिए स्त्रियां करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
स्कन्ध (तत्सम) – कंधा (तद्भव)
पति की मृत्यु के बाद कंचन के कंधों (स्कन्ध) पर परिवार का बोझ आ गया।
स्तन (तत्सम) – थन (तद्भव)
बछड़ा गाय के थन (स्तन) को छोड़ना ही नहीं चाहता।
स्तम्भ (तत्सम) – खम्भा (तद्भव)
प्राचीन इमारतों में खम्भों (खम्भा) की अलग ही शोभा होती थी।
स्थल (तत्सम) – थल (तद्भव)
हमारी थल (स्थल) सेना बहुत चौकन्नी रहती है।
स्थान (तत्सम) – थान (तद्भव)
हमें धार्मिक थान (स्थान) को गंदा नहीं करना चाहिए।
स्थिर (तत्सम) – थिर (तद्भव)
सूरज थिर (स्थिर) है और धरती उसके चक्कर लगाती है।
स्नेह (तत्सम) – नेह (तद्भव)
राधा श्री कृष्ण से बहुत नेह (स्नेह) करती थी।
स्पर्श (तत्सम) – परस (तद्भव)
माँ का परस (स्पर्श) पाते ही रोता हुआ बच्चा चुप हो गया।
स्फोटक (तत्सम) – फोड़ा (तद्भव)
डॉक्टर ने कहा है कि तुम्हारे दादी जी के पेट में फोड़ा (स्फोटक) है।
स्वजन (तत्सम) – साजन (तद्भव)
हमें परिवार के साजनों (स्वजन) के साथ मिल जुलकर रहना चाहिए।
स्वप्न (तत्सम) – सपना (तद्भव)
बुरा सपना (स्वप्न) देखते ही मेरी नींद खुल गई।
स्वर्ण (तत्सम) – सोना (तद्भव)
मैंने अक्षय तृतीया पर सोने (स्वर्ण) की अंगूठी खरीदी।
स्वर्णकार (तत्सम) – सुनार (तद्भव)
हम कल सुनार (स्वर्णकार) की दुकान पर कंगन खरीदने जाएंगे।
स्वसुर (तत्सम) – ससुर (तद्भव)
पुष्पा के ससुर (स्वसुर) समाज सेवक हैं।
हंडी (तत्सम) – हांडी (तद्भव)
हमारी कालोनी में दही हांडी (हंडी) का उत्सव बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है।
हट्ट (तत्सम) – हाट (तद्भव)
हमारे पास के बाजार में रविवार को हाट (हट्ट) लगता है, जिसमें सस्ते दामों पर बहुत अच्छा सामान मिलता है।
हरिण (तत्सम) – हिरन (तद्भव)
हिरन (हिरण) शाकाहारी जानवर है और यह झुंड में रहते हैं।
हरित (तत्सम) – हरा (तद्भव)
हरा (हरित) रंग प्रकृति व समृद्धि का प्रतीक होता है ।
हरिद्रा (तत्सम) – हल्दी (तद्भव)
हल्दी (हरिद्रा) के गुणों के कारण लोगों ने कोरोना काल में इसका अधिक उपयोग करना शुरू कर दिया है।
हर्ष (तत्सम) – हरख (तद्भव)
लंबे समय के बाद मित्र से मिल कर मुझे बहुत हरख (हर्ष) हुआ।
हस्त (तत्सम) – हाथ (तद्भव)
मेंहदी वाली ने दुल्हन के हाथों (हस्त) में इतनी सुंदर मेहंदी लगाई कि सब देखते रह गये।
हस्ति (तत्सम) – हाथी (तद्भव)
एक हाथी (हस्ति) शहर में घुस आया और उसने वहाँ बहुत उत्पात मचाया।
हस्तिनी (तत्सम) – हथिनी (तद्भव)
मैंने चिड़ियाघर में हथिनी (हस्तिनी) और उसका बच्चा देखा था।
हास्य (तत्सम) – हँसी (तद्भव)
सर्कस में जोकर के करतब देख कर लोगों की हँसी (हास्य) ही नहीं रुकी।
हिन्दोला (तत्सम) – हिण्डोला (तद्भव)
मैं मेले में सिर्फ इसीलिए जाती हूँ कि हिण्डोले (हिन्दोला) में झूल सकूँ।
हिरन (तत्सम) – हिरण (तद्भव)
हिरण (हिरन) की आँखें इतनी सुन्दर होती हैं की उसकी उपमा दी जाती है।
हीरक (तत्सम) – हीरा (तद्भव)
हीरा (हीरक) एक कीमती पत्थर होता है जिसका प्रयोग गहने बनाने में किया जाता है।
हृदय (तत्सम) – हिय (तद्भव)
महेश की हिय (हृदय) आघात के कारण मृत्यु हो गई।
होलिका (तत्सम) – होली (तद्भव)
फागुन मास में वृंदावन की होली (होलिका) देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

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