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Tirupati Balaji mein dan ka itna mahatv kyon hai?

तिरूपती बालाजी का मंदिर सबसे धनी मंदिरों में से एक है। यहां भक्तों द्वारा काफी धन, सोना-चांदी, हीरे-मोती आदि अर्पित किए जाते हैं। आंध्र प्रदेश के चित्तुर जिले में धन और वैभव के प्रतीक भगवान विष्णु यानी श्री तिरूपति बाला जी का मंदिर स्थित है। ऐसा माना जाता है यहां साक्षात् भगवान श्रीहरि विराजमान हैं। यहां बाला जी की करीब 7 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है।
तिरूपति बालाजी एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान को सबसे अधिक धन, सोना, चांदी और जवाहरात अर्पित किये जाते हैं। यह धन चढ़ाने के संबंध में एक कथा प्रचलित है।
एक बार सभी ऋषियों में यह बहस शुरू हुई कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में सबसे बड़ा देवता कौन है। त्रिदेव की परीक्षा के लिए ऋषि भृगु को नियुक्त किया गया। इस कार्य के लिए भृगु ऋषि भी तैयार हो गए। ऋषि सबसे पहले ब्रह्मा के समक्ष पहुंचे और उन्होनें परम पिता को प्रणाम तक नहीं करा, इस पर ब्रह्मा जी भृगु ऋषि पर क्रोधित हो गए।
अब ऋषि शिव जी की परीक्षा लेने पहुंचे। कैलाश पहुंचकर भृगु बिना महादेव की आज्ञा के उनके सामने उपस्थित हो गए और शिव पार्वती का अनादर कर दिया। इससे शिव जी अति क्रोधित हो गए और भृगु ऋषि का अपमान कर दिया।
अंत में ऋषि भृगु भगवान विष्णु के सामने क्रोधित अवस्था में पहुंचे और श्रीहरि की छाती पर लात मार दी। इस पर भगवान विष्णु ने विनम्रतापूर्वक पूछा कि मेरी छाती व्रज की तरह कठोर है अतः आपके पैर को चोट तो नहीं लगी? यह सुनकर भृगु ऋषि समझ गए कि श्रीहरि ही सबसे, बड़े देवता है।
यह सब माता लक्ष्मी देख रही थी और वे अपने पति का अपमान सहन नहीं कर सकी और तपस्या में बैठ गईं। लंबे समय के बाद देवी लक्ष्मी ने शरीर त्याग दिया और पुनः एक दरिद्र ब्राहमण के यहां जन्म लिया। जब विष्णु को यह ज्ञात हुआ तो वे माता लक्ष्मी से विवाह करने पहुंचे, परंतु देवी लक्ष्मी के गरीब पिता ने विवाह के लिए विष्णु से काफी धन मांगा। लक्ष्मी के जाने के बाद विष्णु के पास इतना धन नहीं था। तब देवी लक्ष्मी से विवाह के लिए उन्होंने देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव से धन उधार लिया। इस उधार लिए धन की वजह से विष्णु लक्ष्मी का पुनः विवाह हो सका। कुबेर देव धन चुकाने के संबंध में यह शर्त रख दी कि जब तक मेरा कर्ज नहीं उतर जाता आप माता लक्ष्मी के साथ तिरूपति में रहेंगे। बस, तभी से तिरूपति अर्थात् भगवान विष्णु वहां विराजित हैं।
कुबेर से लिए गए उधार धन को उतारने के लिए भगवान के भक्तों द्वारा तिरूपति में धन चढ़ाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह कुबेर देव को प्राप्त होता है और भगवान विष्णु का कर्ज कम होता है।

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