तो अब हर महीने बढ़ सकता है ट्रेनों का किराया

आने वाले दिनों में रेल किराया बढ़ सकता है। इस इजाफे के लिए रेलवे के सामने पांच तरह के प्रस्ताव आए हैं। इन प्रस्तावों में हर महीने एक फीसदी किराया बढ़ाने से लेकर एकमुश्त दस फीसदी किराया बढ़ाने की सिफारिश की गई है।

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प्रस्तावों में राजधानी, शताब्दी और दुरंतो ट्रेनों में फ्लेक्सी फेयर को खत्म करने या घटाने के लिए भी कहा गया है। हालांकि, किराया किस फॉर्म्युले पर बढ़ाया जाए, इस पर आखिरी फैसला रेलमंत्री ही लेंगे। रेलवे बोर्ड के एक अफसर ने कहा, ‘बोर्ड के सामने किराया बढ़ाने से संबंधित पांच प्रस्ताव आए हैं। इसका मकसद है कि रेलवे के यात्री किरायों से होने वाली आमदनी में बढ़ोतरी की जाए। हालांकि अभी इस मामले में फैसला नहीं लिया गया है।’

1. हर महीने बढ़े 1% किराया

रेलवे सूत्रों का कहना है कि इस बात पर विचार किया जा रहा है कि एकमुश्त किराया बढ़ाने के बजाय यह नियम बना दिया जाए कि हर महीने किराये में एक फीसदी बढ़ोतरी होगी। इससे यात्रियों की जेब पर एक ही झटके में बोझ नहीं बढ़ेगा। साथ ही रेलवे की आलोचना भी नहीं होगी। इसका फायदा यह होगा कि साल भर में किराया बढ़ोतरी लगभग 15 फीसदी तक हो जाएगी।

2. फ्लेक्सी फेयर बंद हो

एक प्रस्ताव फ्लेक्सी फेयर हटाने का भी है। हालांकि रेलवे को इससे सालाना लगभग छह सौ करोड़ का फायदा हो रहा है। लेकिन इस वजह से उसे नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है। बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि फ्लेक्सी फेयर को पूरी तरह से हटाया या फिर उसे कम किया जा सकता है। यानी दस फीसदी सीटों पर दस फीसदी किराया बढ़ाने की जगह पांच फीसदी बढ़ोतरी की जाए।

3. एकमुश्त 10% बढ़े किराया

तीसरा प्रस्ताव है कि अगर फ्लेक्सी फेयर खत्म किया जाता है तो सभी तरह की ट्रेनों की सभी श्रेणियों में दस फीसदी किराया बढ़ा दिया जाए। रेलवे को अभी यात्री किराये से लगभग 45 हजार करोड़ रुपये की आमदनी होती है। अगर दस फीसदी किराया बढ़ता है तो साढ़े चार हजार करोड़ की अतिरिक्त कमाई होगी। एक प्रस्ताव के मुताबिक, किराया पांच फीसदी तक बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है।

4. सेकंड क्लास के यात्रियों पर न डाला जाए बोझ 

एक प्रस्ताव यह भी है कि सेकंड क्लास के यात्रियों पर बोझ न डाला जाए। पीएम नरेंद्र मोदी लगातार गरीब कल्याण की बात कर रहे हैं। ऐसे में रेलवे नहीं चाहता कि ऐसा नजर आए कि वह गरीबों को नजरंदाज कर रहा है। हालांकि रेलवे में एक राय यह भी है कि सेकंड क्लास में भले ही बेहद कम किराया बढ़ाया जाए लेकिन इसमें भी बढ़ोतरी होनी चाहिए।

5. थर्ड एसी को बख्शा जाए

रेलवे के आंकड़ों को देखें तो उसे थर्ड एसी के अलावा हर क्लास में घाटा होता है। मसलन, एसी चेयरकार में उसका हर पैसेंजर पर खर्च एक रुपये 13 पैसे प्रति किमी. आता है। लेकिन आमदनी एक रुपये चार पैसे ही होती है। वहीं थर्ड एसी में यही खर्च 93 पैसे होता है और आमदनी एक रुपये चार पैसे। इसलिए थर्ड एसी छोड़कर बाकी क्लास से कमाई करने का तरीका निकालने की चर्चा है।