पेरिस समझौते पर ट्रम्प ने भारत को लिया निशाने पर

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पेरिस जलवायु समझौते से ट्रम्प ने अमेरिका को बाहर कर लिए है जिससे पूरे विश्व खासकर विकासशील देश हतप्रभ हैं. भले ही विश्व भर में ट्रम्प की इस बार के लिए खिंचाई हो रही हो, ट्रम्प ने इस फैसले से भारत और चीन पर सीधा निशाना साधा है.

ट्रंप ने अपने बयान में भारत पर ये कहते हुए ताना मारा कि वो इसी वजह से इस समझौते से जुड़ा क्योंकि उसे उसके बदले अरबों डॉलर की मदद का आश्वासन दिया गया था. गौरतलब है कि पेरिस जलवायु समझौते के मुताबिक विकास शील देशों को विक्सित देशों के द्वारा जलवायु वित्तीय सहायता के नाम पर हर साल 100 अरब डॉलर की आर्थिक मदद की जाती है जिसका प्रयोग यह देश अपने यहाँ वैकल्पिक ऊर्जा श्रोत ढूंढने में तथा जलवायु को अनुकूल बनाने के लिए करते हैं.

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ट्रम्प ने भारत और चीन पर चर्चा करते हुए कहा कि जहां इस समझौते में यह कहा जा रहा है कि अमेरिका अपने कोयले के कारखाने बंद करे वहीँ भारत और चीन जैसे देशों पर कोई पाबंदी नहीं लगायी जा रही.

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हालाँकि ये बात अलग है कि भारत और चीन दोनों ने कार्बन उत्सर्जन काम करने को ले कर जो लक्ष्य रखा था उसे दोनों देशों ने समय से पहले पूरा कर लिया.

यदि भारत की बात की जाए तो भारत साल 2022 तक अपनी 40 प्रतिशत बिजली गैर-पारंपरिक श्रोतों से पैदा करने लगेगा जो पहले से तय लक्ष्य से आठ साल आगे है. पर इन सब के बावजूद भारत और चीन का विकास शायद ट्रम्प को खटक रहा है.

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वैसे भारतीयों के लिए डोनाल्ड ट्रम्प की यह नफरत नयी नहीं हैं, इससे पहले भी उन्होंने जोर शोर से यह मुद्दा उठाया था कि भारतीय कामगार अमेरिका के लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं.

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क्या है पेरिस जलवायु समझौता

  • पेरिस समझौते का मक़सद ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम कर दुनियाभर में बढ़ रहे तापमान को रोकना है.
  • वैश्विक तापमान को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना तथा यह कोशिश करना कि वो 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़े.
  • मानवीय कार्यों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को इस स्तर पर लाना की पेड़, मिट्टी और समुद्र उसे प्राकृतिक रूप से सोख लें. इसकी शुरुआत 2050 से 2100 के बीच करना.
  • हर पांच साल में गैस उत्सर्जन में कटौती में प्रत्येक देश की भूमिका की प्रगति की समीक्षा करना.
  • विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्तीय सहायता के लिए 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष देना और भविष्य में इसे बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता.

 

ज्ञात हो कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने चुनावी वादे में यह कहा था कि अगर वह जीतते हैं तो अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से बाहर कर देंगे.

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