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Vayu pradushan par samvad- Samvad Lekhan

अरुण : सोमेश, आजकल तो साँस लेना भी दूभर हो गया है ।

सोमेश : हाँ अरुण, हवा में इतना प्रदूषण है कि क्या बताओ ?

अरुण : लोग विकास के नाम पर और अपने लाभ के लिए इस वायु को कितना प्रदूषित कर रहे हैं ।

सोमेश : पर क्या फायदा ऐसे विकास और लाभ का ? जब हम शुद्ध वायु ही नहीं ले पायेंगे और प्रदूषित वायु से अपने फेफड़ों को साँस लेने लायक भी नहीं रख पाएंगे ।

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अरुण : हाँ सबको पता है जिन्दा रहने के लिए वायु कितनी आवश्यक है । इसी के कारण हम साँस ले पाते हैं । लेकिन तब भी इंसान लालच में अंधा होकर ऐसे काम कर रहा है कि वायु प्रदूषित हो रही है ।

सोमेश : तुम्हे पता है अरुण हर वर्ष हमारे देश में तेरह लाख मौत सिर्फ वायु प्रदुषण के कारण ही होती हैं ।

अरुण : बढ़ती हुई आबादी और उसके ऊपर बढ़ता हुआ औद्योगीकरण । यही तो कारण हैं वायु प्रदुषण के ।

सोमेश : वायु प्रदुषण का प्रभाव सिर्फ इंसानों पर ही नहीं बल्कि जीव-जंतुओं और वनस्पति पर भी पढता है । इसकी वजह से ही कई जीव-जंतुओं और वनस्पति की प्रजातियों की कमी हो रही है ।

अरुण : हाँ, और इसकी वजह से पर्यावरण भी असंतुलित हो जाता है ।

सोमेश : सही कह रहे हो अरुण । इससे निपटने के लिए जहाँ सख्त कानून की आवश्यकता है वहीँ निजी स्तर पर भी हमें कदम उठाने चाहियें ।

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