विवादित जगह से 42 किलोमीटर के रेडियस के अंदर मस्जिद मंज़ूर नहीं….

Advertisement

अयोध्या विवाद काफी पुराना हैं. कोर्ट ने इस विवाद को आम सहमति से सुलझाने की पेशकश रखी थी. इसी सिलसिले में श्री श्री रविशंकर ने दोनों पक्षों में समझौता करवाने की पहल की है.

फिलहाल अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हिंदू साधु-संत और भारतीय जनता पार्टी के नेता मस्जिद निर्माण के लिए सहमत नहीं हैं.

Advertisement

जबकि श्री श्री रविशंकर चाहते हैं की विवादित स्थल पर मंदिर-मस्जिद दोनों बन जाए. इस सिलसिले में वे हिन्दू -मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ-साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिले हैं.

श्री श्री ने समझौते का अपना कोई फ़ॉर्मूला पेश नहीं किया है. लेकिन अयोध्या में साधु-संतों को राजी करने की कोशिश ज़रूर कर रहे हैं.

श्री श्री चाहते हैं कि विवादित जगह पर ही मंदिर-मस्जिद दोनों साथ-साथ बन जाए.यूपी में श्री श्री के भक्तों के साथ- साथ उनसे बात करने वालो मे निर्मोही अखाड़े के सदस्य, हिन्दू महा सभा और शिया धर्म गुरु भी मौजूद थे.

दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास को 14 कोसी परिक्रमा यानी विवादित जगह से 42 किलोमीटर के रेडियस के अंदर मस्जिद मंज़ूर नहीं.

Advertisement
learn ms excel in hindi

अब तक के उठाये गए कदम
उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट:30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन को मामले से जुड़े 3 पक्षों में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था.

तीन पक्ष:
पहला -निर्मोही अखाड़ा: विवादित जमीन का एक-तिहाई हिस्सा यानी राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह।
दूसरा – रामलला विराजमान: एक-तिहाई हिस्सा यानी रामलला की मूर्ति वाली जगह.
तीसरा – सुन्नी वक्फ बोर्ड: विवादित जमीन का बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा.

मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राम मंदिर विवाद का कोर्ट के बाहर निपटारा होना चाहिए। इस पर सभी संबंधित पक्ष मिलकर बैठें और आम राय बनाएं. बातचीत नाकाम रहती है तो हम दखल देंगे.

मार्च में सुब्रमण्‍यम स्वामी ने कहा था, मंदिर और मस्जिद दोनों बननी चाहिए. मसला हल होना चाहिए. मस्जिद सरयू नदी के दूसरी तरफ बनना चाहिए जबकि मंदिर वहीं बनना चाहिए. राम जन्मभूमि तो पूरी तरह राम मंदिर के लिए ही है.राम का जन्मस्थल नहीं बदल सकते.

8 अगस्त 2017 को शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, अयोध्या में मस्जिद विवादित जगह से कुछ दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में बनाई जा सकती है। बाबरी मस्जिद शिया वक्फ ही ऐसी संस्था है, जो इस विवाद के शांतिपूर्ण हल के लिए दूसरे पक्षों से बातचीत कर सकती है.

Advertisement