वैसे तो फरवरी-मार्च 2017 में जिन 5 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं उनमें से उत्तरप्रदेश सबसे महत्वपूर्ण है और सभी की निगाहें यूपी विधानसभा चुनाव के नतीजों पर टिकी हुई है, फिर भी जिस राज्य के चुनाव को सबसे ज्यादा रोचक और नाटकीय माना जा रहा है वह है पंजाब का चुनाव. दरअसल जहाँ पंजाब में कांग्रेस अपने दम पर वापसी करने का मौका देख रही है (उत्तरप्रदेश की तरह समाजवादी पार्टी की साइकिल पर बैठ कर नहीं !) वहीँ अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी दिल्ली से बाहर पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त किसी महत्वपूर्ण राज्य में सरकार बनाने का अवसर अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहती. देखा जाए तो दिल्ली विधानसभा में ऐतिहासिक जीत से पहले पंजाब में लोकसभा की 4 सीट जीतकर आप ने पहली बार इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराई थी. लोकसभा की चार सीटों से बढ़ती हुई आप की राजनीतिक महत्वाकांक्षा 2017 के विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार बनाने तक आ पहुंची है.

will AAP make government in Punjabलेकिन क्या आम आदमी पार्टी वास्तव में पंजाब में सरकार बना सकती है? आइये आपको ऐसे 6 कारणों के बारे में बताते हैं जिनकी वजह से पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने का ख्वाब एक हक़ीक़त में बदल सकता है.

1. पंजाब में वर्तमान अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के दिन पूरे हो चुके हैं यह एक ओपन सीक्रेट है. पंजाब में युंवाओं की ज़िन्दगी बर्बाद करता नशे का मुद्दा, चरमराता हुआ औद्योगिक ढांचा और बेरोज़गारी आदि की बढ़ती समस्या को लेकर लोग पंजाब की वर्तमान अकाली-भाजपा सरकार को बदलने का मन बना चुके हैं. 10 साल से सत्ता में सरकार के रहने के कारण एंटी-इनकंबेंसी का फैक्टर काम कर रहा है सो अलग. अब सवाल केवल यह है कि सरकार किसकी बनेगी. स्वाभाविक तौर पर आप और कांग्रेस दो ही ऑप्शन लोगों के सामने हैं.

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2. आप ने पंजाब में इलेक्शन की तैयारी लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद ही शुरू कर दी थी वहीँ कांग्रेस इस मामले में पिछड़ गयी. यहां तक कि अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा जाएगा इसका फैसला भी बहुत देर से हुआ. राहुल और अमरिंदर सिंह की बिगड़ी कैमिस्ट्री इसके पीछे का मुख्य कारण रहे. हालांकि इलेक्शन के एक सप्ताह पहले राहुल ने अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री का चेहरा भी घोषित कर दिया लेकिन कांग्रेस चुनावी तैयारियों में आप से पिछड़ तो चुकी ही है.

3. कांग्रेस की केंद्र सरकार बदले अभी बहुत वक़्त नहीं हुआ है और अकाली-भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे होने आरोप लगाती कांग्रेस भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पंजाब की जनता को कन्विंस कर पायेगी, ऐसा मुश्किल लगता है. ऐसे में बेदाग़ नयी पारी शुरू करती आप पंजाब में भ्रष्टाचार के मुद्दे का लाभ उठाने की सबसे अच्छी स्थिति में नजर आ रही है.

4. आप की सरकार बनने की सूरत में पहली बार पंजाब के दलितों को सत्ता में अपनी भागीदारी नजर आ रही है. अरविन्द केजरीवाल पहले ही घोषित कर चुके हैं कि आप के सरकार बनाने की सूरत में किसी दलित को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा. दशकों से कांग्रेस और अकाली सरकारों के दौरान अपर कास्ट जातियों और जाट-सिखों के वर्चस्व के शासन के बाद दलितों को यह सुनहरा मौक़ा दिखाई दे रहा है जिसे वे अपने हाथ से जाने नहीं देंगे.

5. एनआरआई पंजाबियों का पंजाब की राजनीति और अर्थव्यवस्था में अच्छा खासा प्रभाव है. ऐसी खबर है कि वर्तमान चुनाव के दौरान 10000 से ज्यादा एनआरआई पंजाबी पंजाब में वापस आ कर चुनाव प्रचार में सक्रिय रोल अदा कर रहे हैं. ज्यादातर NRI आम आदमी पार्टी के समर्थक माने जा रहे हैं. वापस आने वाले एनआरआई के अलावा विदेशों में रह रहे अनिवासी आप के कट्टर समर्थक हैं और इस चुनाव में चंदे आदि की भी अच्छी खासी मदद कर रहे हैं. अपने सामाजिक रुतबे के चलते एनआरआई तबके का समर्थन आम आदमी पार्टी की पंजाब चुनाव में जीत का अहम् कारण बनेगा.

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6. जानकारों की मानें तो अकाली वोटों के कांग्रेस के बजाय आप को पड़ने की संभावनाएं भी बड़े पैमाने पर जताई जा रही हैं. ऐसा अकाली दल की हाईकमान के आदेश पर होना बताया जा रहा है. इसका एक बड़ा कारण यह है कि पंजाब की राजनीति में कांग्रेस और अकाली परंपरागत प्रतिद्वंद्वी रहे हैं और अकाली दल सत्ता हाथ से जाने की स्थिति में कांग्रेस को सरकार बनाते नहीं देखना चाहता. विशेषकर उन सीटों पर जहाँ अकाली दल तीसरे और आप दूसरे स्थान पर है वहां वोटों के इस तरह से ट्रांसफर होने की स्थिति में बाज़ी आप के हाथ आ सकती है. अगर वास्तव में ऐसा होता है तो पंजाब में आप की सरकार बनना तय है.

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सरिता महर
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