योगी आदित्यनाथ ने समाप्त की समाजवादी पेंशन योजना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली एसपी सरकार की समाजवादी पेंशन योजना को खत्म कर दिया है। योगी ने अधिकारियों को यह भी पता लगाने के लिए एक जांच कराने का निर्देश दिया है कि क्या योजना के तहत लाभ प्राप्त करने वाले पेंशन के लिए योग्य हैं या नहीं| उन्होंने एक महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रस्तुतीकरण के दौरान मुख्यमंत्री ने यह निर्णय लिया। योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी योजनाओं और कार्यक्रमों के लाभार्थियों की जांच करें| साथ ही केंद्र सरकार की योजनाओं से जुड़ें ताकि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

पेंशन को किया जायेगा दोगुना- योगी आदित्यनाथ

दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से शारीरिक रूप से विकलांग, विधवा और बुजुर्ग व्यक्तियों को दिए गए पेंशन की मासिक राशि को दोगुना करने के लिए योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा के बाद कैबिनेट में एक प्रस्ताव पेश करने को कहा है। ज्ञात हो कि पिछले साल, अखिलेश यादव सरकार ने समाजवादी पेंशन योजना का शुभारंभ किया था। इसका उद्देश्य गरीब महिलाओं को 500 रुपये प्रति माह देकर यूपी में कम से कम 50 लाख लाभार्थियों को कवर करना था।

राज्य के नए मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि अनुसूचित जातियों के लड़कियों के सामूहिक विवाह के आयोजन की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए| जिससे दहेज जैसी कुप्रथा वाले विवाह को मिटाया जा सके। उन्होंने एसपी सरकार की शदी अनुदान योजना का नाम कन्यादान योजना के रूप में बदलने का आदेश दिया।

योगी आदित्यनाथ ने दिए नए आदेश

योगी ने आदेश दिया है कि अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं में कमी की जानी चाहिए| अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस योजना के बारे में कोई शिकायत न मिले। अगर ऐसा होता है तो सम्बंधित अधिकारियो के खिलाफ एक्शन लिया जायेगा| मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि शारीरिक हिंसा और शोषण के शिकार लोगों को वित्तीय सहायता देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस सुविधा का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा। चार्जशीट दाखिल करने के बाद ही पीड़ित को सहायता दी जानी चाहिए।

राज्य के विभिन्न जिलों में रहने वाले थारू जनजाति और अन्य जनजातियों के लोगों की सहायता के लिए योगी ने अधिकारियों से कहा कि वे एक विशेष कल्याणकारी योजना तैयार करें| जिसमे उनके बच्चों की शिक्षा के लिए भी व्यवस्था हो।

यूपी में टूट सकते हैं साइकिल ट्रैक्स

उत्तर प्रदेश में साइकिल ट्रैक भी टूट सकता है। यह काम लखनऊ में एक योजना के साथ शुरू हुआ था| पूर्ण परियोजना उद्देशय था कि शहर में भारत का सबसे बड़ा साइकिल पथ नेटवर्क देगी| जिसमें 270 किलोमीटर तक की कवरेज होगी। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सितंबर 2014 में एम्स्टर्डम का दौरा किया। उन्होंने कहा कि नीदरलैंड्स में साइक्लिंग परिवहन का एक सामान्य तरीका है। वापस आने के बाद, परिवहन अधिकारियों को परिवहन के लिए हरियाली दृष्टिकोण लाने के लिए साइक्लिंग कॉरिडोर की योजना बनाने के लिए निर्देश दिए। 1 मार्च 2015 को लखनऊ में पहला साइकिल ट्रैक कालिदास मार्ग में बना।

अब खबर आ रही है अगर सड़क के चौड़ीकरण में साइकिल ट्रैक बढ़ा उत्पन्न करेगा| तो हमें न चाहते हुए भी इसे तोडना पड़ेगा- मुख्यमंत्री, यूपी| योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि केवल वही साइकिल ट्रैक टूट सकते है जो सड़क को बढ़ने में बीच में आएंगे| साइकिल ट्रैक अच्छा ऑप्शन है परन्तु आज की जरुरत चौड़ी सड़क है|