निगाहें

निगाहें तेरी बेगानी थी, नज़रें मैं मिलाया करता था
संवरते थे तुम औरों के लिए, आईना मैं दिखाया करता था

ना जाने कब साथ तेरा हमसे छूट गया यूँ ही
राह तुम चलते थे, मंज़िलें मैं दिखाया करता था

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