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ऐसे दुरादुरी ही सों सुरत जे करैं जीव, साँचो तिन जीवन को जीवन है जग में। में कौन सा अलंकार है?

ऐसे दुरादुरी ही सों सुरत जे करैं जीव, साँचो तिन जीवन को जीवन है जग में। में कौन सा अलंकार है?

aise duraduri hi son surat je karain jeev sancho tin jeevan ko jeevan hai jag mein mein kaun sa alankar hai

ऐसे दुरादुरी ही सों सुरत जे करैं जीव, साँचो तिन जीवन को जीवन है जग में।

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प्रस्तुत पद में यमक अलंकार का प्रयोग हुआ है। जब काव्य में किसी पद का दो बार प्रयोग हो और दोनों बार भिन्न – भिन्न अर्थ प्रकट हो तो वहाँ यमक अलंकार होता है। इस काव्य पंक्ति में जीवन शब्द का प्रयोग दो बार हुआ है और दोनों ही बार उसका अर्थ भिन्न – भिन्न आया है इसलिए यहाँ यमक अलंकार है। एक जीवन का अर्थ जीव से है और दूसरे जीवन का अर्थ संसार से है।

प्रस्तुत पंक्ति में यमक अलंकार का भेद:

चूंकि इसमें शब्दों का प्रयोग ज्यों का त्यों हुआ है इसलिए इसमें अभंग पद यमक अलंकार है।

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यमक अलंकार का अन्य उदाहरण:

आप यमक अलंकार को अच्छी तरह से समझ सकें इसलिए यमक अलंकार के कुछ अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:

यमक अलंकार का अन्य उदाहरण है – रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सुन। पानी गए न उबरे बिन पानी सब सून। इस पंक्ति में पानी शब्द का प्रयोग दो बार हुआ है, लेकिन अर्थ दोनों ही बार अलग अलग है।

“काली घटा का घमंड घटा “इसमें घटा शब्द का प्रयोग दो बार हुआ है जिसके दो अर्थ है बादल और घटना।

काव्य पंक्ति में अन्य अलंकार –

अलंकार के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर जाएँ:

अलंकार – परिभाषा, भेद एवं उदाहरण 

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