Samvad Lekhan दो मित्रों के बीच प्रदूषण पर संवाद- संवाद लेखन

Do mitraon ke beech pradushan par samvad- Samvad Lekhan

आयूष : आकाश आजकल तो मेरा सुबह-शाम सैर करने का मन ही नहीं करता ।

आकाश : ऐसा क्यों भला ?

आयूष : तुमने देखा नहीं, सुबह उठो तो भी हवा में प्रदूषण ही रहता है और शाम को किसी भी सड़क पर निकल जाओ भीड़-भाड़ और गाड़ियों का हो-हल्ला ही रहता है । अब ऐसे प्रदूषित वातावरण में सैर करने का भला क्या फायदा ?

आकाश : सही कह रहे हो तुम आयूष । हवा और आवाज के प्रदूषण के अलावा जगह-जगह पर सड़कों पर कूड़े का ढेर लगा रहता है । अब ऐसे में कोई सैर पर निकले तो कैसे ? या फिर किसी ऐसी जगह जाया जाए जहाँ इतना प्रदूषण ना हो ।

आयूष : अब किसी खुले स्थान पर जाने के लिए तो ऐसी प्रदूषित जगहों से ही हो कर जाना पड़ेगा ना ।

आकाश : लोग घर चमका कर कूड़ा बाहर डाल देते हैं और दुकानदार सड़कों या नालियों में ।

आयूष : अब देखो बरसात आते ही सारी नालियों की गन्दगी सड़कों पर आ जायेगी ।

आकाश : फिर अपनी गलती के लिए लोग सरकार को ही कोसेंगे ।

आयूष : कुछ लोग तो इतनी भी सभ्यता नहीं दिखाते कि जिन जगहों पर नो-हॉर्न जोन है वहाँ हॉर्न ना बजाएं ।

आकाश : तुम सही कहते तो आयूष । कुछ लोगों की नासमझी पूरे समाज को भुगतनी पड़ती है ।

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