दुष्यंत कुमार Shayari in Hindi तूने ये हरसिंगार हिलाकर बुरा किया

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Dushyant Kumar shayari – Toone Ye Harasingaar Hilakar Bura Kiya

तूने ये हरसिंगार हिलाकर बुरा किया
पांवों की सब जमीन को फूलों से ढंक लिया

किससे कहें कि छत की मुंडेरों से गिर पड़े
हमने ही ख़ुद पतंग उड़ाई थी शौकिया

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अब सब से पूछता हूं बताओ तो कौन था
वो बदनसीब शख़्स जो मेरी जगह जिया

मुँह को हथेलियों में छिपाने की बात है
हमने किसी अंगार को होंठों से से छू लिया

घर से चले तो राह में आकर ठिठक गये
पूरी हूई रदीफ़ अधूरा है काफ़िया

मैं भी तो अपनी बात लिखूं अपने हाथ से
मेरे सफ़े पे छोड़ दो थोड़ा सा हाशिया

इस दिल की बात कर तो सभी दर्द मत उंडेल
अब लोग टोकते है ग़ज़ल है कि मरसिया

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Dushyant Kumar Poetry – Toone Ye Harasingaar Hilakar Bura Kiya

toone ye harasingaar hilaakar buraa kiyaa
paanvon kii sab jamiin ko foolon se dhank liyaa

kisase kahen ki chhat kii munderon se gir pade
hamane hii khud patang udaaii thii shaukiyaa

ab sab se poochhataa hoon bataao to kaun thaa
vo badanasiib shakhs jo merii jagah jiyaa

munh ko hatheliyon men chhipaane kii baat hai
hamane kisii angaar ko honthon se se chhoo liyaa

ghar se chale to raah men aakar thithak gaye
poorii hooii radiif adhooraa hai kaafiyaa

main bhii to apanii baat likhoon apane haath se
mere safe pe chhod do thodaa saa haashiyaa

is dil kii baat kar to sabhii dard mat undel
ab log tokate hai gjl hai ki marasiyaa

Dushyant Kumar– Toone Ye Harasingaar Hilakar Bura Kiya (in Urdu)

تُونے یے ہَرَسِںگارَ ہِلاکَرَ بُرا کِیا
پاںووں کِی سَبَ جَمِینَ کو پھُولوں سے ڈھَںکَ لِیا

کِسَسے کَہیں کِ چھَتَ کِی مُںڈیروں سے گِرَ پَڑے
ہَمَنے ہِی خُدَ پَتَںگَ اُڑائی تھِی شَوکِیا

اَبَ سَبَ سے پُوچھَتا ہُوں بَتاءاو تو کَونَ تھا
وو بَدَنَسِیبَ شَخْسَ جو میرِی جَگَہَ جِیا

مُںہَ کو ہَتھیلِیوں میں چھِپانے کِی باتَ ہَے
ہَمَنے کِسِی اَںگارَ کو ہوںٹھوں سے سے چھُو لِیا

گھَرَ سے چَلے تو راہَ میں آکَرَ ٹھِٹھَکَ گَیے
پُورِی ہُوئی رَدِیفَ اَدھُورا ہَے کافِیا

مَیں بھِی تو اَپَنِی باتَ لِکھُوں اَپَنے ہاتھَ سے
میرے سَفے پے چھوڑَ دو تھوڑا سا ہاشِیا

اِسَ دِلَ کِی باتَ کَرَ تو سَبھِی دَرْدَ مَتَ اُںڈیلَ
اَبَ لوگَ ٹوکَتے ہَے غَزَلَ ہَے کِ مَرَسِیا

Dushyant Kumar– Toone Ye Harasingaar Hilakar Bura Kiya (in Punjabi)

ਤੂਨੇ ਯੇ ਹਰਸਿੰਗਾਰ ਹਿਲਾਕਰ ਬੁਰਾ ਕਿਯਾ
ਪਾੰਵੋੰ ਕੀ ਸਬ ਜਮੀਨ ਕੋ ਫੂਲੋੰ ਸੇ ਢੰਕ ਲਿਯਾ

ਕਿਸਸੇ ਕਹੇੰ ਕਿ ਛਤ ਕੀ ਮੁੰਡੇਰੋੰ ਸੇ ਗਿਰ ਪਡੇ
ਹਮਨੇ ਹੀ ਖੁਦ ਪਤੰਗ ਉਡਾਈ ਥੀ ਸ਼ੌਕਿਯਾ

ਅਬ ਸਬ ਸੇ ਪੂਛਤਾ ਹੂੰ ਬਤਾਓ ਤੋ ਕੌਨ ਥਾ
ਵੋ ਬਦਨਸੀਬ ਸ਼ਖ੍ਸ ਜੋ ਮੇਰੀ ਜਗਹ ਜਿਯਾ

ਮੁਹ ਕੋ ਹਥੇਲਿਯੋੰ ਮੇੰ ਛਿਪਾਨੇ ਕੀ ਬਾਤ ਹੈ
ਹਮਨੇ ਕਿਸੀ ਅੰਗਾਰ ਕੋ ਹੋੰਠੋੰ ਸੇ ਸੇ ਛੂ ਲਿਯਾ

ਘਰ ਸੇ ਚਲੇ ਤੋ ਰਾਹ ਮੇੰ ਆਕਰ ਠਿਠਕ ਗਯੇ
ਪੂਰੀ ਹੂਈ ਰਦੀਫ ਅਧੂਰਾ ਹੈ ਕਾਫਿਯਾ

ਮੈੰ ਭੀ ਤੋ ਅਪਨੀ ਬਾਤ ਲਿਖੂੰ ਅਪਨੇ ਹਾਥ ਸੇ
ਮੇਰੇ ਸਫੇ ਪੇ ਛੋਡ ਦੋ ਥੋਡਾ ਸਾ ਹਾਸ਼ਿਯਾ

ਇਸ ਦਿਲ ਕੀ ਬਾਤ ਕਰ ਤੋ ਸਭੀ ਦਰ੍ਦ ਮਤ ਉੰਡੇਲ
ਅਬ ਲੋਗ ਟੋਕਤੇ ਹੈ ਗਜਲ ਹੈ ਕਿ ਮਰਸਿਯਾ

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