Education Shiksha Essay in Hindi | शिक्षा पर निबंध

Education Shiksha Essay in Hindi for class 5/6 in 100 words शिक्षा पर निबंध

शिक्षा सभी के लिए बहुत आवश्यक है। पढ़ा-लिखा व्यक्ति जीवन में काफी-कुछ कर सकता है जो कि एक धनवान परन्तु अनपढ़ व्यक्ति नहीं कर सकता। इसीलिए कहा भी जाता है ज्ञान सबसे बड़ा धन है। एक ऐसा व्यक्ति जो पढ़ा-लिखा नहीं है परन्तु उसके पास धन बहुत है वह उस धन का दुरुपयोग कर सकता है लेकिन एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति कम धन होते हुए भी अपनी बुद्धि से धन का सदुपयोग कर के लाभ पा सकता है। शिक्षा से व्यक्ति को जीवन सही प्रकार से जीने का तरीका आता है। दूसरी ओर सब कुछ होते हुए भी एक अनपढ़ व्यक्ति जीवन में भटक जाता है।

Education Shiksha Essay in Hindi for class 7/8 in 200 words शिक्षा पर निबंध

शिक्षा से व्यक्ति को मात्र शिक्षित होने की उपाधि ही नहीं मिलती बल्कि उसके जीवन में ज्ञान का प्रकाश भी फैलता है। वह मात्र एक जानवर की तरह जीवन नहीं जीता बल्कि अपने जीवन का लक्ष्य तय कर उसे जीने लायक बनाता है। शिक्षा के माध्यम से वह अपने अन्दर क्षमतायें विकसित कर प्रगति के पथ पर चलता है।

शिक्षा लेने के तरीके एवं उसे उपयोग करने के तरीके भी बहुत हैं। लेकिन हमें ऐसी शिक्षा प्रदान एवं प्राप्त करनी चाहिये जिससे व्यक्ति अपने परिवेश से परिचित हो सके एवं उसके विकास के लिए कार्य कर सके। शिक्षा मात्र डिग्री प्राप्त कर नौकरी पाने तक ही सीमित नहीं होनी चाहिये बल्कि यह इस प्रकार से दी जानी चाहिये जिससे व्यक्ति के अन्दर आत्म विश्वास जागृत हो और वह मात्र धन कमाने तक ही सीमित न रहे।

शिक्षा के महत्व को देखते हुए सरकार द्वारा ऐसे कदम उठाने की आवश्यकता है जिससे हर व्यक्ति शिक्षा प्राप्त कर सके। क्योंकि कई स्थानों पर आज भी बाल मजदूर देखे जा सकते हैं जो अपने घर के पालन-पोषण के लिए शिक्षा को छोड़ बाल मजदूरी कर रहे हैं। यदि ऐसे बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ आवश्यक सुविधायें प्राप्त कराई जाये वे मात्र मजदूर बन कर ही नहीं बल्कि अन्य कई विकास कार्यक्रमों से जुड़कर समाज के साथ-साथ अपना भी विकास कर सकते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों को भी उज्जवल भविष्य प्रदान कर सकते हैं।

Education Shiksha Essay in Hindi for class 9/10 in 500 words शिक्षा पर निबंध

व्यक्ति जन्म लेने से लेकर मृत्यु तक जीवन में हर पग-पग पर कुछ न कुछ सीखता रहता है। प्राचीन समय में बच्चे गुरुकुल में रह कर शिक्षा अर्जित करते थे। बच्चे गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ अपने गुरुजनों की सेवा तथा अन्य कई काम भी करते थे जिससे उन्हें जीवन के अन्य पक्षों का भी ज्ञान होता था, जिसे हम आजकल व्यावहारिक शिक्षा के नाम से जानते हैं। शिक्षा प्राप्त करने के बाद ही अपने घर वापस आता था तथा ब्रह्मचर्य से गृहस्थाश्रम में प्रवेश करता था। वह शिक्षा का माध्यम से ही व्यक्ति प्रगति की ओर अग्रसर होता है। आजकल उस प्रकार के गुरुकुल तो नहीं हैं परन्तु कई सरकारी एवं गैर-सरकारी शिक्षण संस्थायें शिक्षा प्रदान करने का कार्य कर रही हैं। जहाँ बच्चों को कई विषयों की शिक्षा दी जाती है।

शिक्षा का अर्थ मात्र पढ़ना-लिखना जानना ही नहीं है। शिक्षा का अर्थ है सही-गलत में समझ विकसित कर निर्णय लेने की क्षमता। यदि इस प्रकार की शिक्षा प्राप्त न की जाये तो यह निरर्थक रुपयों एवं समय की बर्बादी है। यदि शिक्षा सही प्रकार से प्राप्त की जाये तो यह अमूल्य धरोहर है। यह ऐसा धन है जिसे चोर भी नहीं चुरा सकता बल्कि यह बांटने पर बढ़ता है। व्यक्ति शिक्षा से धन प्राप्त कर सकता है पर धन से शिक्षा नहीं। उसके लिए व्यक्ति के अन्दर शिक्षा प्राप्त करने की जिज्ञासा होनी चाहिये। क्योंकि कई ऐसे संस्थान हैं जो गरीब परन्तु शिक्षा के लिए जिज्ञासु बच्चों को शिक्षा प्रदान करते हैं।

शिक्षित व्यक्ति के अन्दर ही अच्छे एवं नये विचार जन्म लेते हैं तथा कुविचारों का अंत होता है। यदि व्यक्ति जीवन में उन्नति चाहता है तो उसे शिक्षा की सीढ़ी चढ़ना बहुत आवश्यक है। क्योंकि शिक्षा ही व्यक्ति का सही मार्ग प्रषस्त करती है। शिक्षित व्यक्ति को सभी लोग सम्मान की दॄष्टि से देखते हैं। शिक्षित व्यक्ति के आचार एवं विचार में शिक्षा की झलक दिखती है। शिक्षित व्यक्ति समाज को भी परोक्ष एवं प्रत्यक्ष से शिक्षित करने का कार्य करता है। शिक्षा के अभाव में हम दूसरे का तो क्या अपना भी भला नहीं कर सकते।

अन्य देशों की अपेक्षा भारत में शिक्षा का प्रतिशत कम है। इसी स्तर को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा शिक्षा प्राप्त करने सम्बन्धी कई योजनायें चलाई जा रही हैं जिससे गरीब, असहाय एवं किसी भी रूप से विक्लांग व्यक्ति शिक्षा से वंचित न रहे। क्योंकि यदि वह शिक्षा से वंचित रह गया तो अपने जीवन की एक कमजोरी के चलते वह कहीं अधिक पिछड़ जायेगा। गरीब बच्चों के लिए विद्यालय में ही भोजन की व्यवस्था भी की जाती है। क्योंकि यदि तन स्वस्थ होगा तभी बच्चे ठीक प्रकार से शिक्षा भी प्राप्त कर पायेंगे। आज के युग में शिक्षा से विहीन व्यक्ति जीवन में किसी भी प्रकार उन्नति नहीं कर सकता। ऐसा व्यक्ति डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, अध्यापक, वैज्ञानिक, राजनेता या अन्य कोई भी अधिकारी आदि बनने में सर्वथा असक्षम है। शिक्षा प्राप्त किये बगैर आप अपने देश , समाज या परिवार तो क्या अपना भी भला नहीं कर सकते। अतः शिक्षा को सर्वाधिक महत्व देते हुए इसे जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास अवश्य करना चाहिये। हमें ऐसे कदम उठाने चाहियें कि इक्कीसवीं सदी में हर व्यक्ति शिक्षित हो।