निबंध – कहो नहीं, कर के दिखाओ

Hindi Essay Kaho nahi karke dikhao

हम में से अधिकतर लोग यह जानते हैं कि भिन्न भिन्न क्षेत्रों में शिखर पर कौन लोग हैं, परन्तु यह बहुत ही कम लोग जानते हैं कि ये सफल लोग शिखर तक कैसे पहुंचे? हम शायद ही इन सफल लोगों का उन्हीं की भांति दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ अनुसरण करते हों। भले ही हम प्रयास पूरी लगन के साथ न कर रहे हों फिर भी हमें यही लगता है किसी न किसी तरह हम सफल हो जायेंगे। जबकि शायद ही इस संसार में कोई व्यक्ति बिना मेहनत किये सफल हो पाया हो।

Hindi Essay Kaho nahi karke dikhaoहाथ पर हाथ धर बैठे रहने से कोई भी सफल नहीं होता। लोगों को सलाह देना इस दुनिया में सबसे आसान काम है लेकिन जब उन्ही उपदेशों पर खुद अमल करने का समय आता है तो प्राय: सभी लोग कहीं कोनों में दुबक कर बैठ जाते हैं। कहीं मैं असफल ना हो जाऊं, इसी भय से व्यक्ति के सोचने का तरीका भी नकारात्मक हो जाता है। लेकिन ऐसे में हमें हेनरी फोर्ड की यह पंक्तियाँ याद करनी चाहिए – “असफलता को किसी चुनौती की तरह लें और अधिक चतुराई के साथ फिर से प्रयास करें।”

सफलता के सूत्रों या सलाह पर काम करते हुए व्यक्ति को अथक प्रयास, साहस और योग्यता की जरुरत होती है ताकि वह राह में आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकें। क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए – ऐसी बातों में ज्यादा समय व्यर्थ न करते हुए सत्यनिष्ठ व्यक्ति प्रयास करने में जी-जान से जुट जाता है और अपने प्रयास के पूरा होने पर यह बता पाटा है कि मैं क्यों सफल हो पाया या नहीं हो पाया।

गाँधी जी, भगवान बुद्ध और महावीर जैसी महानता को प्राप्त करने के लिए कठोर साधना और मनोबल की आवश्यकता होती है। आपको पहले कठिनाई भरे मार्ग पर चल कर सफल हो कर दिखाना पड़ता है तब कहीं जा कर आप दुनिया को सीख देने के योग्य बन पाते हैं। इतिहास साक्षी है कि संसार उन्हीं के क़दमों में झुका है जिन्होंने जीवन भर सत्य और परिश्रम का रास्ता नहीं छोड़ा।

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भारतीय स्वाधीनता का संग्राम भी ऐसे ही अनेकों उदाहरणों से भरा हुआ है जिनसे पता चलता है कि जमीन पर काम करके दिखाना हवाई बातें करने से बहुत अधिक कठिन है किन्तु श्रेष्ठ है। भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद और राम प्रसाद बिस्मिल जैसे अनेकों क्रांतिकारियों ने दृढ इच्छा-शक्ति के साथ ब्रिटिश राज्य की जड़ों पर हमला कर आम जनमानस को यह सन्देश दिया कि विदेशी ताकत से स्वतन्त्रता पाने के लिए यदि अपने प्राण भी न्योछावर करने पड़ें तो ख़ुशी ख़ुशी कर देने चाहियें। यही कारण है कि आज भी देश इन महान वीर स्वतंत्रता सेनानियों के सामने नत-मस्तक है। उनकी शहादत का ही परिणाम है कि जिन अंग्रेजों के राज में कभी सूरज नहीं डूबता था उन्हें भी भारत से अपना बोरिया बिस्तर समेत कर जाना पड़ा।

इसी तरह जब हम एडिसन जैसे महान आविष्कारकों के बारे में पढ़ते हैं तो हमें पता चलता है खाली सोचने के बजाय उन्होंने अपने मन में आने वाले अनोखे विचारों को प्रयोगों की परीक्षा से गुजारा और हजारों बार असफल होने के बाद भी आखिर अनेकों ऐसे आविष्कार किये जिनके लिए मानव जाति सदैव उनकी ऋणी रहेगी।

इसलिए हमें फिर से खुद को यह एहसास दिलाना होगा कि जीवन में सफल होने के लिए कहना नहीं करना महत्वपूर्ण है – कहो नहीं, कर के दिखाओ !