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कहि ‘सुन्दर’ नंद कुमार लिए, तन को तनकौ नहिं चैन कहूँ। में कौन सा अलंकार है?

कहि ‘सुन्दर’ नंद कुमार लिए, तन को तनकौ नहिं चैन कहूँ। में कौन सा अलंकार है?

kahi sundar nand kumar liye tanko tanko nahin chain kahun mein kaun sa alankar hai

कहि ‘सुन्दर’ नंद कुमार लिए, तन को तनकौ नहिं चैन कहूँ।

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प्रस्तुत पंक्ति में में यमक अलंकार है। जब किसी काव्य पद में शब्द की आवृति हो और प्रत्येक बार शब्दके अर्थ अलग अलग हो तो वहाँ यमक अलंकार होता है। इस पंक्ति में तन को का अर्थ शरीर से है और तनको का अर्थ थोड़े से है।

प्रस्तुत पंक्ति में यमक अलंकार का भेद:

इस पद में सभंग पद यमक अलंकार का प्रयोग हुआ है। इस पंक्ति में शब्दों का प्रयोग तोड़ मरोड़ कर प्रकिया गया इसलिए इसमें सभंग पद यमक अलंकार है।

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यमक अलंकार का अन्य उदाहरण:

आप यमक अलंकार को अच्छी तरह से समझ सकें इसलिए यमक अलंकार के कुछ अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:

काली घटा का घमंड घटा ।

“ तेरी बरछी ने बर छीने है खलनके “ यहाँ बरछी के दो अर्थ है – तलवार और बल को हरनेवाला।

काव्य पंक्ति में अन्य अलंकार –

अनुप्रास अलंकार।

अलंकार के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर जाएँ:

अलंकार – परिभाषा, भेद एवं उदाहरण 

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