कैफी आज़मी Shayari in Hindi आवारा सजदे (इक यही सोज़-ए-निहाँ)

Kaifi Azmi shayari – Aawara sajde

इक यही सोज़-ए-निहाँ कुल मेरा सरमाया है
दोस्तो मैं किसे ये सोज़-ए-निहाँ नज़र करूँ
कोई क़ातिल सर-ए-मक़्तल नज़र आता ही नहीं
किस को दिल नज़र करूँ और किसे जाँ नज़र करूँ?

तुम भी महबूब मेरे तुम भी हो दिलदार मेरे
आशना मुझ से मगर तुम भी नहीं तुम भी नहीं
ख़त्म है तुम पे मसीहानफ़सी चारागरी
मेहरम-ए-दर्द-ए-जिगर तुम भी नहीं तुम भी नहीं

अपनी लाश आप उठाना कोई आसान नहीं
दस्त-ओ-बाज़ू मेरे नाकारा हुए जाते हैं
जिन से हर दौर में चमकी है तुम्हारी दहलीज़
आज सजदे वही आवारा हुए जाते हैँ

दूर मंज़िल थी मगर ऐसी भी कुछ दूर न थी
लेके फिरती रही रास्ते ही में वहशत मुझ को
एक ज़ख़्म ऐसा न खाया के बहार आ जाती
दार तक लेके गया शौक़-ए-शहादत मुझ को

राह में टूट गये पाँव तो मालूम हुआ
जुज़ मेरे और मेरा रहनुमा कोई नहीं
एक के बाद ख़ुदा एक चला आता था
कह दिया अक़्ल ने तंग आके ‘ख़ुदा कोई नहीं’

कैफी आज़मी के ये बेहतरीन 25 शेर आपके दिल को गहराइयों तक छू लेंगे

Kaifi Azmi Poetry – Aawara sajde

ik yahi soj-e-nihaan kul mera saramaaya hai
dosto main kise ye soj-e-nihaan najr karoon
koi kaatil sar-e-maktal najr aata hi nahin
kis ko dil najr karoon aur kise jaan najr karoon?

tum bhi mahaboob mere tum bhi ho diladaar mere
aashana mujh se magar tum bhi nahin tum bhi nahin
khtm hai tum pe masihaanafsi chaaraagari
meharam-e-dard-e-jigar tum bhi nahin tum bhi nahin

apani laash aap uthaana koi aasaan nahin
dast-o-baajoo mere naakaara hue jaate hain
jin se har daur men chamaki hai tumhaari dahalij
aaj sajade vahi aavaara hue jaate hain

door manjil thi magar aisi bhi kuchh door n thi
leke firati rahi raaste hi men vahashat mujh ko
ek jkhm aisa n khaaya ke bahaar a jaati
daar tak leke gaya shauk-e-shahaadat mujh ko

raah men toot gaye paanv to maaloom huaa
juj mere aur mera rahanuma koi nahin
ek ke baad khuda ek chala aata thaa
kah diya akl ne tang aake ‘khuda koi nahin’

Kaifi Azmi – Aawara sajde (in Urdu)

اِکَ یَہِی سوزَ-اے-نِہاں کُلَ میرا سَرَمایا ہَے
دوسْتو مَیں کِسے یے سوزَ-اے-نِہاں نَزَرَ کَرُوں
کوئی قاتِلَ سَرَ-اے-مَقْتَلَ نَزَرَ آتا ہِی نَہِیں
کِسَ کو دِلَ نَزَرَ کَرُوں اَورَ کِسے جاں نَزَرَ کَرُوں؟

تُمَ بھِی مَہَبُوبَ میرے تُمَ بھِی ہو دِلَدارَ میرے
آشَنا مُجھَ سے مَگَرَ تُمَ بھِی نَہِیں تُمَ بھِی نَہِیں
خَتْمَ ہَے تُمَ پے مَسِیہانَفَسِی چاراگَرِی
میہَرَمَ-اے-دَرْدَ-اے-جِگَرَ تُمَ بھِی نَہِیں تُمَ بھِی نَہِیں

اَپَنِی لاشَ آپَ اُٹھانا کوئی آسانَ نَہِیں
دَسْتَ-او-بازُو میرے ناکارا ہُئے جاتے ہَیں
جِنَ سے ہَرَ دَورَ میں چَمَکِی ہَے تُمْہارِی دَہَلِیزَ
آجَ سَجَدے وَہِی آوارا ہُئے جاتے ہَیں

دُورَ مَںزِلَ تھِی مَگَرَ اَیسِی بھِی کُچھَ دُورَ نَ تھِی
لیکے پھِرَتِی رَہِی راسْتے ہِی میں وَہَشَتَ مُجھَ کو
ایکَ زَخْمَ اَیسا نَ کھایا کے بَہارَ آ جاتِی
دارَ تَکَ لیکے گَیا شَوقَ-اے-شَہادَتَ مُجھَ کو

راہَ میں ٹُوٹَ گَیے پاںوَ تو مالُومَ ہُءآ
جُزَ میرے اَورَ میرا رَہَنُما کوئی نَہِیں
ایکَ کے بادَ خُدا ایکَ چَلا آتا تھا
کَہَ دِیا اَقْلَ نے تَںگَ آکے ‘خُدا کوئی نَہِیں’

Kaifi Azmi – Aawara sajde (in Punjabi)

ਇਕ ਯਹੀ ਸੋਜ-ਏ-ਨਿਹਾ ਕੁਲ ਮੇਰਾ ਸਰਮਾਯਾ ਹੈ
ਦੋਸ੍ਤੋ ਮੈੰ ਕਿਸੇ ਯੇ ਸੋਜ-ਏ-ਨਿਹਾ ਨਜਰ ਕਰੂ
ਕੋਈ ਕਾਤਿਲ ਸਰ-ਏ-ਮਕ੍ਤਲ ਨਜਰ ਆਤਾ ਹੀ ਨਹੀੰ
ਕਿਸ ਕੋ ਦਿਲ ਨਜਰ ਕਰੂ ਔਰ ਕਿਸੇ ਜਾ ਨਜਰ ਕਰੂ?

ਤੁਮ ਭੀ ਮਹਬੂਬ ਮੇਰੇ ਤੁਮ ਭੀ ਹੋ ਦਿਲਦਾਰ ਮੇਰੇ
ਆਸ਼ਨਾ ਮੁਝ ਸੇ ਮਗਰ ਤੁਮ ਭੀ ਨਹੀੰ ਤੁਮ ਭੀ ਨਹੀੰ
ਖਤ੍ਮ ਹੈ ਤੁਮ ਪੇ ਮਸੀਹਾਨਫਸੀ ਚਾਰਾਗਰੀ
ਮੇਹਰਮ-ਏ-ਦਰ੍ਦ-ਏ-ਜਿਗਰ ਤੁਮ ਭੀ ਨਹੀੰ ਤੁਮ ਭੀ ਨਹੀੰ

ਅਪਨੀ ਲਾਸ਼ ਆਪ ਉਠਾਨਾ ਕੋਈ ਆਸਾਨ ਨਹੀੰ
ਦਸ੍ਤ-ਓ-ਬਾਜੂ ਮੇਰੇ ਨਾਕਾਰਾ ਹੁਏ ਜਾਤੇ ਹੈੰ
ਜਿਨ ਸੇ ਹਰ ਦੌਰ ਮੇੰ ਚਮਕੀ ਹੈ ਤੁਮ੍ਹਾਰੀ ਦਹਲੀਜ
ਆਜ ਸਜਦੇ ਵਹੀ ਆਵਾਰਾ ਹੁਏ ਜਾਤੇ ਹੈ

ਦੂਰ ਮੰਜਿਲ ਥੀ ਮਗਰ ਐਸੀ ਭੀ ਕੁਛ ਦੂਰ ਨ ਥੀ
ਲੇਕੇ ਫਿਰਤੀ ਰਹੀ ਰਾਸ੍ਤੇ ਹੀ ਮੇੰ ਵਹਸ਼ਤ ਮੁਝ ਕੋ
ਏਕ ਜਖ੍ਮ ਐਸਾ ਨ ਖਾਯਾ ਕੇ ਬਹਾਰ ਆ ਜਾਤੀ
ਦਾਰ ਤਕ ਲੇਕੇ ਗਯਾ ਸ਼ੌਕ-ਏ-ਸ਼ਹਾਦਤ ਮੁਝ ਕੋ

ਰਾਹ ਮੇੰ ਟੂਟ ਗਯੇ ਪਾਵ ਤੋ ਮਾਲੂਮ ਹੁਆ
ਜੁਜ ਮੇਰੇ ਔਰ ਮੇਰਾ ਰਹਨੁਮਾ ਕੋਈ ਨਹੀੰ
ਏਕ ਕੇ ਬਾਦ ਖੁਦਾ ਏਕ ਚਲਾ ਆਤਾ ਥਾ
ਕਹ ਦਿਯਾ ਅਕ੍ਲ ਨੇ ਤੰਗ ਆਕੇ ‘ਖੁਦਾ ਕੋਈ ਨਹੀੰ’

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