कैफी आज़मी Shayari in Hindi दोशीज़ा मालिन (लो पौ फटी वह छुप गई तारों की अंज़ुमन)

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Kaifi Azmi shayari – Doshijaa Maalin

लो पौ फटी वह छुप गई तारों की अंज़ुमन
लो जाम-ए-महर से वह छलकने लगी किरन

खुपने लगा निगाह में फितरत का बाँकपन
जलवे ज़मीं पे बरसे ज़मीं बन गई दुल्हन

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गूँजे तराने सुबह के इक शोर हो गया
आलम तमाम रस में सराबोर हो गया

फूली शफ़क फ़ज़ा में हिना तिलमिला गई
इक मौज़-ए-रंग काँप के आलम पे छा गई

कुल चाँदनी सिमट के गिलो में समा गई
ज़र्रे बने नुजूम ज़मीं जगमगा गई

छोड़ा सहर ने तीरगी-ए-शब को काट के
उड़ने लगी हवा में किरन ओस चाट के

मचली जबीने-शर्क पे इस तरह मौज-ए-नूर
लहरा के तैरने लगी आलम में बर्क-ए-तूर

उड़ने लगी शमीय छलकने लगा सुरूर
खिलने लगे शिगूके चहकने लगे तयूर

झोंके चले हवा के शजर झूमने लगे
मस्ती में फूल काँटों का मुँह चूमने लगे

थम थम के जूफ़िशाँ हुआ ज़र्रों पे आफ़ताब
छिड़का हवा ने सब्जा-ए-ख्वाबीदा पर गुलाब

मुरझायी पत्तियों में मचलने लगा शबाब
लर्ज़िश हुई गुलों में बरसने लगी शराब

रिन्दाने-मस्त और भी बदमस्त हो गये
थर्रा के होंठ ज़ाम में पेवस्त हो गये

दोशीज़ा एक खुशकदो-खुशरंगो-खूबरू
मालिन की नूरे-दीद गुलिस्ताँ की आबरू

महका रही है फूलों से दामान-ए-आरजू
तिफ़ली लिये है गोद में तूफ़ाने-रंगो-बू

रंगीनियों में खेली, गुलों में पली हुई
नौरस कली में कौसे-कज़ह है ढली हुई

मस्ती में रुख पे बाल-ए-परीशाँ किये हुये
बादल में शमा-ए-तूर फ़रोज़ाँ किये हुये

हर सिम्त नक्शे-पा से चरागाँ किये हुये
आँचल को बारे-गुल से गुलिस्ताँ किये हुये

लहरा रही है बादे-सहर पाँव चूम के
फिरती है तीतरी सी गज़ब झूम झूम के

ज़ुल्फ़ों में ताबे-सुंबुले-पेचाँ लिये हुये
आरिज़ पे शोख रंगे-गुलिस्ताँ लिये हुये

आँखों में बोलते हुये अरमाँ लिये हुये
होठों पे आबे-लाले-बदख्शाँ लिये हुये

फितरत ने तौल तौल के चश्मे-कबूल में
सारा चमन निचोड़ दिया एक फूल में

ऐ हुस्ने-बेनियाज़ खुदी से न काम ले
उड़ कर शमीमे-गुल कहीं आँचल न थाम ले

कलियों का ले पयाम गुलों का सलाम ले
कैफ़ी से हुस्ने-दोस्त का ताज़ा कलाम ले

शाइर का दिल है मुफ़्त में क्यों दर्दमंद हो
इक गुल इधर भी नज़्म अगर यह पसंद हो

कैफी आज़मी के ये बेहतरीन 25 शेर आपके दिल को गहराइयों तक छू लेंगे

Kaifi Azmi Poetry –Doshijaa Maalin

lo pau fatii vah chhup gaii taaron kii anjuman
lo jaam-e-mahar se vah chhalakane lagii kiran

khupane lagaa nigaah men fitarat kaa baankapan
jalave jmiin pe barase jmiin ban gaii dulhan

goonje taraane subah ke ik shor ho gayaa
aalam tamaam ras men saraabor ho gayaa

foolii shafk fjaa men hinaa tilamilaa gaii
ik mauj-e-rang kaanp ke aalam pe chhaa gaii

kul chaandanii simat ke gilo men samaa gaii
jrre bane nujoom jmiin jagamagaa gaii

chhodaa sahar ne tiiragii-e-shab ko kaat ke
udne lagii havaa men kiran os chaat ke

machalii jabiine-shark pe is tarah mauj-e-noor
laharaa ke tairane lagii aalam men bark-e-toor

udne lagii shamiiy chhalakane lagaa suroor
khilane lage shigooke chahakane lage tayoor

jhonke chale havaa ke shajar jhoomane lage
mastii men fool kaanton kaa munh choomane lage

tham tham ke joofishaan huaa jrron pe aaftaab
chhidkaa havaa ne sabjaa-e-khvaabiidaa par gulaab

murajhaayii pattiyon men machalane lagaa shabaab
larjish huii gulon men barasane lagii sharaab

rindaane-mast aur bhii badamast ho gaye
tharraa ke honth jaam men pevast ho gaye

doshiijaa ek khushakado-khusharango-khoobaroo
maalin kii noore-diid gulistaan kii aabaroo

mahakaa rahii hai foolon se daamaan-e-aarajoo
tiflii liye hai god men toofaane-rango-boo

rangiiniyon men khelii, gulon men palii huii
nauras kalii men kause-kajh hai dhalii huii

mastii men rukh pe baal-e-pariishaan kiye huye
baadal men shamaa-e-toor frojaan kiye huye

har simt nakshe-paa se charaagaan kiye huye
aanchal ko baare-gul se gulistaan kiye huye

laharaa rahii hai baade-sahar paanv choom ke
firatii hai tiitarii sii gajb jhoom jhoom ke

julfon men taabe-sunbule-pechaan liye huye
aarij pe shokh range-gulistaan liye huye

aankhon men bolate huye aramaan liye huye
hothon pe aabe-laale-badakhshaan liye huye

fitarat ne taul taul ke chashme-kabool men
saaraa chaman nichod diyaa ek fool men

ai husne-beniyaaj khudii se n kaam le
ud kar shamiime-gul kahiin aanchal n thaam le

kaliyon kaa le payaam gulon kaa salaam le
kaifii se husne-dost kaa taajaa kalaam le

shaair kaa dil hai muft men kyon dardamand ho
ik gul idhar bhii najm agar yah pasand ho

Kaifi Azmi–Doshijaa Maalin (in Urdu)

لو پَو پھَٹِی وَہَ چھُپَ گاِی تاروں کِی اَںزُمَنَ
لو جامَ-اے-مَہَرَ سے وَہَ چھَلَکَنے لَگِی کِرَنَ

کھُپَنے لَگا نِگاہَ میں پھِتَرَتَ کا باںکَپَنَ
جَلَوے زَمِیں پے بَرَسے زَمِیں بَنَ گاِی دُلْہَنَ

گُوںجے تَرانے سُبَہَ کے اِکَ شورَ ہو گَیا
آلَمَ تَمامَ رَسَ میں سَرابورَ ہو گَیا

پھُولِی شَفَکَ فَزا میں ہِنا تِلَمِلا گاِی
اِکَ مَوزَ-اے-رَںگَ کاںپَ کے آلَمَ پے چھا گاِی

کُلَ چاںدَنِی سِمَٹَ کے گِلو میں سَما گاِی
زَرّے بَنے نُجُومَ زَمِیں جَگَمَگا گاِی

چھوڑا سَہَرَ نے تِیرَگِی-اے-شَبَ کو کاٹَ کے
اُڑَنے لَگِی ہَوا میں کِرَنَ اوسَ چاٹَ کے

مَچَلِی جَبِینے-شَرْکَ پے اِسَ تَرَہَ مَوجَ-اے-نُورَ
لَہَرا کے تَیرَنے لَگِی آلَمَ میں بَرْکَ-اے-تُورَ

اُڑَنے لَگِی شَمِییَ چھَلَکَنے لَگا سُرُورَ
کھِلَنے لَگے شِگُوکے چَہَکَنے لَگے تَیُورَ

جھوںکے چَلے ہَوا کے شَجَرَ جھُومَنے لَگے
مَسْتِی میں پھُولَ کاںٹوں کا مُںہَ چُومَنے لَگے

تھَمَ تھَمَ کے جُوفِشاں ہُءآ زَرّوں پے آفَتابَ
چھِڑَکا ہَوا نے سَبْجا-اے-کھْوابِیدا پَرَ گُلابَ

مُرَجھایِی پَتِّیوں میں مَچَلَنے لَگا شَبابَ
لَرْزِشَ ہُئی گُلوں میں بَرَسَنے لَگِی شَرابَ

رِنْدانے-مَسْتَ اَورَ بھِی بَدَمَسْتَ ہو گَیے
تھَرّا کے ہوںٹھَ زامَ میں پیوَسْتَ ہو گَیے

دوشِیزا ایکَ کھُشَکَدو-کھُشَرَںگو-کھُوبَرُو
مالِنَ کِی نُورے-دِیدَ گُلِسْتاں کِی آبَرُو

مَہَکا رَہِی ہَے پھُولوں سے دامانَ-اے-آرَجُو
تِفَلِی لِیے ہَے گودَ میں تُوفانے-رَںگو-بُو

رَںگِینِیوں میں کھیلِی، گُلوں میں پَلِی ہُئی
نَورَسَ کَلِی میں کَوسے-کَزَہَ ہَے ڈھَلِی ہُئی

مَسْتِی میں رُکھَ پے بالَ-اے-پَرِیشاں کِیے ہُیے
بادَلَ میں شَما-اے-تُورَ فَروزاں کِیے ہُیے

ہَرَ سِمْتَ نَکْشے-پا سے چَراگاں کِیے ہُیے
آںچَلَ کو بارے-گُلَ سے گُلِسْتاں کِیے ہُیے

لَہَرا رَہِی ہَے بادے-سَہَرَ پاںوَ چُومَ کے
پھِرَتِی ہَے تِیتَرِی سِی گَزَبَ جھُومَ جھُومَ کے

زُلْفوں میں تابے-سُںبُلے-پیچاں لِیے ہُیے
آرِزَ پے شوکھَ رَںگے-گُلِسْتاں لِیے ہُیے

آںکھوں میں بولَتے ہُیے اَرَماں لِیے ہُیے
ہوٹھوں پے آبے-لالے-بَدَکھْشاں لِیے ہُیے

پھِتَرَتَ نے تَولَ تَولَ کے چَشْمے-کَبُولَ میں
سارا چَمَنَ نِچوڑَ دِیا ایکَ پھُولَ میں

اَے ہُسْنے-بینِیازَ کھُدِی سے نَ کامَ لے
اُڑَ کَرَ شَمِیمے-گُلَ کَہِیں آںچَلَ نَ تھامَ لے

کَلِیوں کا لے پَیامَ گُلوں کا سَلامَ لے
کَیفِی سے ہُسْنے-دوسْتَ کا تازا کَلامَ لے

شاءاِرَ کا دِلَ ہَے مُفْتَ میں کْیوں دَرْدَمَںدَ ہو
اِکَ گُلَ اِدھَرَ بھِی نَزْمَ اَگَرَ یَہَ پَسَںدَ ہو

Kaifi Azmi–Doshijaa Maalin (in Punjabi)

ਲੋ ਪੌ ਫਟੀ ਵਹ ਛੁਪ ਗਈ ਤਾਰੋੰ ਕੀ ਅੰਜੁਮਨ
ਲੋ ਜਾਮ-ਏ-ਮਹਰ ਸੇ ਵਹ ਛਲਕਨੇ ਲਗੀ ਕਿਰਨ

ਖੁਪਨੇ ਲਗਾ ਨਿਗਾਹ ਮੇੰ ਫਿਤਰਤ ਕਾ ਬਾਕਪਨ
ਜਲਵੇ ਜਮੀੰ ਪੇ ਬਰਸੇ ਜਮੀੰ ਬਨ ਗਈ ਦੁਲ੍ਹਨ

ਗੂਜੇ ਤਰਾਨੇ ਸੁਬਹ ਕੇ ਇਕ ਸ਼ੋਰ ਹੋ ਗਯਾ
ਆਲਮ ਤਮਾਮ ਰਸ ਮੇੰ ਸਰਾਬੋਰ ਹੋ ਗਯਾ

ਫੂਲੀ ਸ਼ਫਕ ਫਜਾ ਮੇੰ ਹਿਨਾ ਤਿਲਮਿਲਾ ਗਈ
ਇਕ ਮੌਜ-ਏ-ਰੰਗ ਕਾਪ ਕੇ ਆਲਮ ਪੇ ਛਾ ਗਈ

ਕੁਲ ਚਾਦਨੀ ਸਿਮਟ ਕੇ ਗਿਲੋ ਮੇੰ ਸਮਾ ਗਈ
ਜਰ੍ਰੇ ਬਨੇ ਨੁਜੂਮ ਜਮੀੰ ਜਗਮਗਾ ਗਈ

ਛੋਡਾ ਸਹਰ ਨੇ ਤੀਰਗੀ-ਏ-ਸ਼ਬ ਕੋ ਕਾਟ ਕੇ
ਉਡਨੇ ਲਗੀ ਹਵਾ ਮੇੰ ਕਿਰਨ ਓਸ ਚਾਟ ਕੇ

ਮਚਲੀ ਜਬੀਨੇ-ਸ਼ਰ੍ਕ ਪੇ ਇਸ ਤਰਹ ਮੌਜ-ਏ-ਨੂਰ
ਲਹਰਾ ਕੇ ਤੈਰਨੇ ਲਗੀ ਆਲਮ ਮੇੰ ਬਰ੍ਕ-ਏ-ਤੂਰ

ਉਡਨੇ ਲਗੀ ਸ਼ਮੀਯ ਛਲਕਨੇ ਲਗਾ ਸੁਰੂਰ
ਖਿਲਨੇ ਲਗੇ ਸ਼ਿਗੂਕੇ ਚਹਕਨੇ ਲਗੇ ਤਯੂਰ

ਝੋੰਕੇ ਚਲੇ ਹਵਾ ਕੇ ਸ਼ਜਰ ਝੂਮਨੇ ਲਗੇ
ਮਸ੍ਤੀ ਮੇੰ ਫੂਲ ਕਾਟੋੰ ਕਾ ਮੁਹ ਚੂਮਨੇ ਲਗੇ

ਥਮ ਥਮ ਕੇ ਜੂਫਿਸ਼ਾ ਹੁਆ ਜਰ੍ਰੋੰ ਪੇ ਆਫਤਾਬ
ਛਿਡਕਾ ਹਵਾ ਨੇ ਸਬ੍ਜਾ-ਏ-ਖ੍ਵਾਬੀਦਾ ਪਰ ਗੁਲਾਬ

ਮੁਰਝਾਯੀ ਪਤ੍ਤਿਯੋੰ ਮੇੰ ਮਚਲਨੇ ਲਗਾ ਸ਼ਬਾਬ
ਲਰ੍ਜਿਸ਼ ਹੁਈ ਗੁਲੋੰ ਮੇੰ ਬਰਸਨੇ ਲਗੀ ਸ਼ਰਾਬ

ਰਿਨ੍ਦਾਨੇ-ਮਸ੍ਤ ਔਰ ਭੀ ਬਦਮਸ੍ਤ ਹੋ ਗਯੇ
ਥਰ੍ਰਾ ਕੇ ਹੋੰਠ ਜਾਮ ਮੇੰ ਪੇਵਸ੍ਤ ਹੋ ਗਯੇ

ਦੋਸ਼ੀਜਾ ਏਕ ਖੁਸ਼ਕਦੋ-ਖੁਸ਼ਰੰਗੋ-ਖੂਬਰੂ
ਮਾਲਿਨ ਕੀ ਨੂਰੇ-ਦੀਦ ਗੁਲਿਸ੍ਤਾ ਕੀ ਆਬਰੂ

ਮਹਕਾ ਰਹੀ ਹੈ ਫੂਲੋੰ ਸੇ ਦਾਮਾਨ-ਏ-ਆਰਜੂ
ਤਿਫਲੀ ਲਿਯੇ ਹੈ ਗੋਦ ਮੇੰ ਤੂਫਾਨੇ-ਰੰਗੋ-ਬੂ

ਰੰਗੀਨਿਯੋੰ ਮੇੰ ਖੇਲੀ, ਗੁਲੋੰ ਮੇੰ ਪਲੀ ਹੁਈ
ਨੌਰਸ ਕਲੀ ਮੇੰ ਕੌਸੇ-ਕਜਹ ਹੈ ਢਲੀ ਹੁਈ

ਮਸ੍ਤੀ ਮੇੰ ਰੁਖ ਪੇ ਬਾਲ-ਏ-ਪਰੀਸ਼ਾ ਕਿਯੇ ਹੁਯੇ
ਬਾਦਲ ਮੇੰ ਸ਼ਮਾ-ਏ-ਤੂਰ ਫਰੋਜਾ ਕਿਯੇ ਹੁਯੇ

ਹਰ ਸਿਮ੍ਤ ਨਕ੍ਸ਼ੇ-ਪਾ ਸੇ ਚਰਾਗਾ ਕਿਯੇ ਹੁਯੇ
ਆਚਲ ਕੋ ਬਾਰੇ-ਗੁਲ ਸੇ ਗੁਲਿਸ੍ਤਾ ਕਿਯੇ ਹੁਯੇ

ਲਹਰਾ ਰਹੀ ਹੈ ਬਾਦੇ-ਸਹਰ ਪਾਵ ਚੂਮ ਕੇ
ਫਿਰਤੀ ਹੈ ਤੀਤਰੀ ਸੀ ਗਜਬ ਝੂਮ ਝੂਮ ਕੇ

ਜੁਲ੍ਫੋੰ ਮੇੰ ਤਾਬੇ-ਸੁੰਬੁਲੇ-ਪੇਚਾ ਲਿਯੇ ਹੁਯੇ
ਆਰਿਜ ਪੇ ਸ਼ੋਖ ਰੰਗੇ-ਗੁਲਿਸ੍ਤਾ ਲਿਯੇ ਹੁਯੇ

ਆਖੋੰ ਮੇੰ ਬੋਲਤੇ ਹੁਯੇ ਅਰਮਾ ਲਿਯੇ ਹੁਯੇ
ਹੋਠੋੰ ਪੇ ਆਬੇ-ਲਾਲੇ-ਬਦਖ੍ਸ਼ਾ ਲਿਯੇ ਹੁਯੇ

ਫਿਤਰਤ ਨੇ ਤੌਲ ਤੌਲ ਕੇ ਚਸ਼੍ਮੇ-ਕਬੂਲ ਮੇੰ
ਸਾਰਾ ਚਮਨ ਨਿਚੋਡ ਦਿਯਾ ਏਕ ਫੂਲ ਮੇੰ

ਐ ਹੁਸ੍ਨੇ-ਬੇਨਿਯਾਜ ਖੁਦੀ ਸੇ ਨ ਕਾਮ ਲੇ
ਉਡ ਕਰ ਸ਼ਮੀਮੇ-ਗੁਲ ਕਹੀੰ ਆਚਲ ਨ ਥਾਮ ਲੇ

ਕਲਿਯੋੰ ਕਾ ਲੇ ਪਯਾਮ ਗੁਲੋੰ ਕਾ ਸਲਾਮ ਲੇ
ਕੈਫੀ ਸੇ ਹੁਸ੍ਨੇ-ਦੋਸ੍ਤ ਕਾ ਤਾਜਾ ਕਲਾਮ ਲੇ

ਸ਼ਾਇਰ ਕਾ ਦਿਲ ਹੈ ਮੁਫ੍ਤ ਮੇੰ ਕ੍ਯੋੰ ਦਰ੍ਦਮੰਦ ਹੋ
ਇਕ ਗੁਲ ਇਧਰ ਭੀ ਨਜ੍ਮ ਅਗਰ ਯਹ ਪਸੰਦ ਹੋ

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