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Kaun se nakshatra hani dene vale hain?

आजकल बढ़ते अपराध के चलते कई इंसानों के साथ प्रतिदिन चोरी या लूट जैसी वारदात हो जाती हैं। इसके पीछे कई बार बेरोजगारी भी जिम्मेवार होती है। पैसों की कमी से त्रस्त लोग भी चोरी या लूट के अपराध में लिप्त हो जाते हैं। ये लोग प्रतिदिन कई लोगों को अपना शिकार बनाते हैं और उन्हें धन की हानि पहुंचाते हैं।
कुछ परिस्थितियों में पुलिस इन चोरों का पकड़ भी लेती है और लोगों का चोरी गया सामान वापस भी मिल जाता है। वहीं अधिकतर चोरी गया धन या ज्वेलरी वापस नहीं मिलती है। ज्योतिष के अनुसार कुछ विशेष नक्षत्र बताए गए हैं, इस समय में चोरी या लूट होने पर व्यक्ति का धन वापस नहीं मिलता।
ज्योतिषशास्त्र में 27 नक्षत्र बताए गए हैं, इनमें कुछ नक्षत्रों के समय विशेष सावधानी रखने की आवश्यकता होती है। इस संबंध में वेद पुराण में एक श्लोक दिया गया है –
ऊ गुन पू गुन वि अज कृम आ भ अ मू गुनु साथ।
हरो धरो गाड़ो दिया धन फिरि चढ़ई न हाथ ।।
इस श्लोक का अर्थ है ‘उ’ अक्षर से आरंभ होने वाले नक्षत्र (उत्तराफाल्गुनी, उत्तराशाढ़ा, उत्तराभाद्रपद), ‘प’ अक्षर से आरंभ होने वाले नक्षत्र (पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाशाढ़ा, पूर्वाभाद्रपद), वि (विषाखा), अज (रोहिणी), कृ (कृतिका), म (मघा), आ (आद्र्रा), भ (भरणी), अ (अष्लेशा) और (मूल) भी इन्हीं नक्षत्रों के साथ शामिल हैं। इन चैदह नक्षत्रों में हरा हुआ धन, चोरी गया पैसा, लूटा गया पैसा और सोना, किसी के यहां अमानत के रूप में रखा पैसा, कहीं गाडा हुआ पैसा या धन, किसी को उधार दिया गया धन वापस मिलने की संभावनाएं बहुत कम होती हैं। अतः इन विशेष नक्षत्रों के समय धन के संबंध में पूरी सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

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