Lokoktiyan in Hindi class 8 (Proverbs in Hindi Class 8)

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हिन्दी लोकोक्तियाँ क्लास 8, Lokoktiyan for class 8  

कक्षा 8 के विद्यार्थियों के लिए हमने कुछ प्रमुख लोकोक्तियाँ संकलित की हैं जो परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी हैं। विद्यार्थी इन लोकोक्तियों का अभ्यास कर परीक्षा में पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

 क्लास 8 हिन्दी लोकोक्तियाँ    

  1. लोकोक्तिपांचों उंगलियां बराबर नहीं होती
    अर्थसभी एक समान नहीं हो सकते ।
    वाक्य प्रयोग- तुम उसके जैसा बनने का प्रयास क्यों करते हो, क्या पांचों उंगलियां बराबर हैं किसी में कोई गुण होता है तो किसी ने कोई ।

    2. लोकोक्तिएक अनार सौ बीमार
    अर्थवस्तु एक और पाने वाले अनेक ।
    वाक्य प्रयोग- नौकरी के लिए साक्षात्कार का आयोजन किया गया ।सैकड़ों की भीड़ देखकर प्रबंधक ने कहा यहां तो एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति हो गई है।

    3. लोकोक्तिलातों के भूत बातों से नहीं मानते
    अर्थदुष्ट व्यक्ति के साथ दुष्टता ही करना आवश्यक है ।
    वाक्य प्रयोग -प्यार से तो तुम्हें समझना है ही नहीं लातों के भूत भला बातों से कहा मानते हैं ।

    4. लोकोक्तिअंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा
    अर्थअयोग्य शासक होने पर अव्यवस्था ही होगी ।
    वाक्य प्रयोग- एक बड़े शहर में महंत ने  मिठाई वाले को प्रत्येक मिठाई का दाम एक ही जैसा बताते हुए देखकर कहा यहां आनंद रहेगा क्योंकि यहां टके सेर भाजी टके सेर खाजा अंधेर नगरी चौपट राजा वाली स्थिति है।

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    5. लोकोक्तिअंधी पीसे कुत्ता खाए
    अर्थकाम करने वाले को फल मिलकर किसी और को प्राप्त हो।
    वाक्य प्रयोग- किसानों की स्थिति अंधी पीसे कुत्ता खाए वाली है रात दिन मेहनत करके फसल वो उगाएऔर मुनाफा महाजन को मिले।

    6. लोकोक्तिईश्वर की माया धूप कहीं छाया
    अर्थविधाता के नियम विचित्र है ।
    वाक्य -प्रयोग- समाज में विचित्र विसंगति है, कोई मेहनत करके भी एक एक पैसे के लिए मोहताज है और कई लोग आराम से पैसों में खेल रहे हैं, ईश्वर की माया धूप कहीं छाया।

    7. लोकोक्तिअपना हाथ जगन्नाथ
    अर्थजो काम हम खुद करते हैं वही सबसे अच्छा होता है।
    वाक्य प्रयोग – मैं किसी दूसरे पर विश्वास नहीं करता। उसमें कई गलतियां हो जाती हैं । मुझे तो यह कहावत बहुत अच्छा लगता है  किअपना हाथ जगन्नाथ।

    8. लोकोक्तिघर की मुर्गी दाल बराबर
    अर्थआसानी से मिलने वाली वस्तु का महत्व कम होता है ।
    वाक्य प्रयोग- पढ़ा-लिखा और काबिल होकर भी रोहन के  परिवार में उसका कोई महत्व नहीं है जबकि  दसवीं पास रोहन उसके छोटे भाई को पढ़ाने आता है । रोहन मन में यही सोचता है कि घर की मुर्गी दाल बराबर ।

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    9.लोकोक्तिखिसियानी बिल्ली खंभा नोचे
    अर्थअसफल होने  या शर्मिंदा होने पर खीझ दूसरों पर निकालना ।
    वाक्य प्रयोग-  बॉस से झूठ बोलकर राम दिल्ली घूमने चला तो गया पर जब बॉस का फोन उसकी पत्नी के पास आया तब सच्चाई का पता चला। यह जानकर राम बॉस को ही भला बुरा कहने लगा, नौकरी छोड़ देने की बात कहने लगा तब उसकी पत्नी ने कहा बहाने ना बनाओ मै खूब समझती हूं । तुम्हारा यह व्यवहार खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे जैसा है।

    10. लोकोक्तिखग जाने खग ही की भाषा
    अर्थसाथ वाला ही साथी की बात समझ सकता है।
    वाक्य प्रयोग-  प्रतिमा के चेहरे की रंगत देखकर उसके पति सारा माजरा समझ गये और उन्होंने बाहर घूमने का प्रोग्राम रद्द कर दिया। यह कहावत बिल्कुल सही है कि खग जाने खग  ही की भाषा ।

    11. लोकोक्तिकहां राजा भोज कहां गंगू तेली
    अर्थरहनसहन में अंतर होना
    वाक्य प्रयोग-बेचारा सुखिया जमींदार की तुलना कैसे कर सकता है। जमीदार ने अपने बेटे को बाहर पढ़ने को भेजा लेकिन वह थोड़ी ही ना  अपने बेटे को भेज सकता है चाहे वह कितना भी काबिल  क्यूं न हो । कहां राजा भोज कहां गंगू तेली ।

    12. लोकोक्तिका वर्षा जब कृषि सुखाने
    अर्थसमय रहते ही किसी की मदद करना लाभकारी होता है।
    वाक्य – प्रयोग -आग में जब रामू का पूरा घर जलकर स्वाहा हो गया तब दमकल  की गाड़ियां  पों फोन  बजाते हुए गली में आई ,लेकिन अब क्या फायदा अब तो रामू बर्बाद हो चुका था का वर्षा जब कृषि सुखाने।

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