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Mahilayen mangalsutra kyon pahanti hain?

हिंदु धर्म में कई प्रथाएं प्रचलित है, जिनमें कुछ प्रथाएं विवाह से पूर्व महत्वपूर्ण होती है तो कुछ विवाह के बाद। स्त्रियों के संबंध में विवाह के बाद सबसे महत्वपूर्ण परंपरा है मंगलसूत्र पहनना। मंगलसूत्र ही किसी भी विवाहित स्त्री की खास निशानी होती है। यह मात्र श्रृंगार का आभूषण नहीं है। इसके साथ कई धार्मिक महत्व भी जुड़े हुए हैं।
मंगलसूत्र पहनने के पीछे कई धार्मिक, मनोवैज्ञानिक कारण छूपे हुए हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मंगलसूत्र धारण करने से स्त्री के पति की आयु में वृद्धि होती है। यह सुहाग की निशानी है। मंगलसूत्र खोना या टूटना अशुभ माना जाता है, इसी वजह से इसे बहुत संभालकर रखा जाता है।
मंगलसूत्र धागे में पिरोए काले मोती और सोने के पेंडिल से बना होता है। मंगलसूत्र से ही पति के अच्छे स्वास्थ्य और कुशलता को भी जोड़ा गया है।
विवाह के बाद स्त्री को सभी प्रकार के नकारात्मक विचारों से बचाने में मंगलसूत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके काले मोतियों की पवित्रता के प्रभाव से स्त्री के आस पास नकारात्मक शक्तियां सक्रिय नहीं हो पाती है। इसके अलावा मंगलसूत्र में पिरोया हुआ सोना भी स्त्री को ऊर्जावान और सक्रिय बनाता है। उस सोने के प्रभाव से स्त्री के चेहरे पर भी सोने के समान ही चमक बनी रहती है।

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