Rahim ke dohe असमय परे रहीम कहि, मांगि जात तजि लाज।

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Rahim ke dohe in Hindi:

असमय परे रहीम कहि, मांगि जात तजि लाज।
ज्यों लछमन मांगन गए, पारासर के नाज।।

Asamay pare rahim kahi, maangi jat taji laaj,
Jyon lachhman maanagn gaye, paarasar ke naaj

रहीम के दोहे का अर्थ:

जब कुसमय आए तो अकड़ना नहीं चाहिए। भूखों मरने की स्थिति में यह अकड़ काम नहीं आती। ऐसे समय में यदि मांगना भी पड़े तो झिझकना नहीं चाहिए। मैं ऊंची जाति का हूं, मांगने से मेरी जाति भ्रष्ट हो जायेगी, यह सोचकर न मांगने वाला भूख, रोग और कुंठा से मृत्यु को प्राप्त होता है। हमेशा समयानुसार काम करना चाहिए। कुसमय में जीवन बचा रहा तो सुसमय को लाने का प्रयास किया जा सकता है। जीवन ही नहीं रहा तो कैसी भी आशा नहीं रह जाती।

रहीम कहते हैं, यदि कुसमय से ग्रस्त होना पड़े तो अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए कुछ भी करना अषोभनीय नहीं है। यदि मांगने का समय आए तो न अपनी जाति को आड़े देना चाहिए और न ही लज्जा का बोध करना चाहिए। भूख और अभाव की पीड़ा मृत्यु समान होती है, अतः मांगने से हिचकना कैसा? कुसमय में लक्ष्मण ने भी तो पाराशर से अनाज मांग कर पेट की भूख का शमन किया था।

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Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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