Rahim ke dohe जो रहीम उत्तम प्रकृत्ति, का करि सकत कुसंग।

Rahim ke dohe in Hindi:

जो रहीम उत्तम प्रकृत्ति, का करि सकत कुसंग।
चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग।।

Jo rahim uttam prakruti, ka kari sakat kusang,
Chandan vish vyapat nahin, lipte rahat bhujang

रहीम के दोहे का अर्थ:

सुदृढ़ चरित्र के व्यक्ति का यह स्वभाविक गुण होता है कि उस पर संग-कुसंग का प्रभाव नहीं पड़ता। वह दूसरों द्वारा संचालित नहीं होता और अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करता। यदि उसे कोई अपने रंग में रंगना चाहे तो इसमे उसे सफलता नहीं मिलती। उसके रंग व प्रवृत्ति में कोई अंतर नहीं पड़ता।

रहीम के शब्दों में, जो उत्तम प्रवृत्ति और दृढ़ स्वभाव वाला होता है, कुसंगति उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। उसे अपने स्वभाव से कोई विचलित नहीं कर सकता। चंदन का वृक्ष भी उत्तम कोटि का होता है, भले ही उस पर सांप लिपटे रहें, किंतु उसका स्वभाव नहीं बदलता, उसकी सुगंध बनी रहती है।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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