Rahim ke dohe रहिमन अब वे बिरछ कहं, जिनकी छांह गंभीर।

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Rahim ke dohe in Hindi:

रहिमन अब वे बिरछ कहं, जिनकी छांह गंभीर।
बागन विच विच देखिअत, सेहुड़ कुंज शरीर।।

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Rahiman ab ve birachh kahan, jinki chhanh ganbheer
Baagan vich vich dekhiyat, sehud kunj sharer

रहीम के दोहे का अर्थ:

इस दोहे में रहीम सामाजिक दुरावस्था देखकर अफसोस जताते हैं। उनका कथन है कि समाज में पहले जैसे महापुरूष और गुणीजन नहीं रहे, जिनकी छत्रछाया में बैठकर जीवन के सार्थक मूल्यों और आदर्शों का सारगर्भित ज्ञान प्राप्त होता था। अब तो चारों ओर भ्रष्टचारियों, धूर्तों, कामियों और विधर्मियों की धूम मची हुई है, जिनके अपकर्मों से निर्दोष जनता त्राहि त्राहि कर रही है।

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रहीम कहते हैं, अब ऐसे वृक्ष कहीं देखने को नहीं मिलते जिनकी घनी छांव के नीचे बैठकर थके मांदे व संतप्त जनों को चैन और शांति मिलती थी। अब तो बागों में जहां तहां सेहुड़ (एक पौधा जिसके पत्ते बड़े होते हैं), कुंज (जंगली लताएं) और करीर (करील के झाड़ झंखाड़) आदि उगे हैं, जिनसे किसी को लाभ नहीं होता और जो देखने मं भी भले नहीं लगते।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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