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Rahim ke dohe in Hindi:

रहिमन अपने गोत को, सबै चहत उत्साह।
मृग उछरत आकाश को, भूमी खनत बराह।।

Rahiman apne got ko, sabai chata utsaah
Mrug uchharat aakaash ko, bhumi khana baraah

रहीम के दोहे का अर्थ:

अपने वंश की परंपरा पर किसे गर्व नहीं होता। सब चाहते है कि वंश की पंरपरा का सफलतापूर्वक निर्वाह हो। रघुकुल की पंरपरा थी कि प्राण जाए, पर वचन न जाए। रघुकुल सदा अपनी इसी परंपरा पर कायम रहा।

रहीम इस तथ्य को प्रतीक के माध्यम से इस प्रकार रेखांकित करते हैं, अपनी वंश परंपरा को सभी चाहते हैं और उत्साह से उसका अनुसरण करते हैं। यही कारण है कि मृग अपनी वंश परंपरा के अनुसार सदैव आकाश की ओर उछलता है, जबकि सूअर हमेशा भूमि खनन में लगा रहता है। (पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रमा के रथ का संवाहक मृग है, अतः मृग का आकाश की ओर उछलना स्वाभाविक है। विष्णु ने वराह लिया था और हिराण्याक्ष का वध करके पाताल से पृथ्वी वापस लाए थे। यही कारण है कि वराह जमीन खोदता रहता है।)

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Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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