Rahim ke dohe रहिमन एक दिन वे रहे, बीच न सोहत हार।

Rahim ke dohe in Hindi:

रहिमन एक दिन वे रहे, बीच न सोहत हार।
वायु जो ऐसी बह गई, बीच परे पहार।।

Rahiman ek din ve rahe, beech na sohat haar
Vayu jo aisi bah gai, beech pare pahaar

रहीम के दोहे का अर्थ:

कभी तो ऐसा वक्त था कि दोनों के मध्य छाती का हार भी अच्छा नहीं लगता था। आज ऐसा वक्त आया है, ऐसी वायु बह चली है कि मध्य में पहाड़ जैसी दूरी हो गई है।

रहीम कहते हैं कि समय ही सबसे बड़ा बलवान है। जब समय सही होता है तो दो व्यक्तियों में ऐसा प्रेम, ऐसा स्नेह, ऐसी मित्रता होती है कि गले में पड़ा हार भी बढ़ा प्रतीत होता है। वहीं समय प्रतिकूल होने पर वही दोनों व्यक्ति इतने दूर हो जाते हैं जैसे दोनों के मध्य में पहाड़ आ खड़ा हुआ हो। यानी एक दूसरे के शत्रु हो जाते हैं।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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