Rahim ke dohe रहिमन जिहा बावरी, कहि गइ सरग पताल।

Rahim ke dohe in Hindi:

रहिमन जिहा बावरी, कहि गइ सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।।

Rahiman jihaa bavari, kahi gai sarag pataal
Aapu to kahi bheetar rahi, jooti khaat kapaal

रहीम के दोहे का अर्थ:

यह सर्वविदित है कि जीभ का कोई भरोसा नहीं, कभी भी कुछ भी कह देती है। यह भी नहीं सोचती कि उसका कहा सुनकर किसी को अच्छा लगेगा या बुरा। तभी तो विद्वानों ने सुझाव दिया है कि हमेशा सोच समझ कर बोलना चाहिए। मुख के बोल ही लोगों को मित्र बना सकते हैं और शत्रु भी।

रहीम कहते हैं, जीभ तो बावरी है, उस पर उसी का नियंत्रण नहीं होता। अनाप-शनाप कुछ भी कह जाती है। स्वयं तो बोलकर मुंह में दुबकी रहती है, परिणाम भुगतना पड़ता है सिर को। जीभ का तो कुछ नहीं बिगड़ता, लोगों की जूतियां बरसती हैं सिर पर।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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