Rahim ke dohe रहिमन लाख भली करो, अगुनी अगुन न जाय।

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Rahim ke dohe in Hindi:

रहिमन लाख भली करो, अगुनी अगुन न जाय।
राग सुनत तय पिअत ह्, सांप सहज धरि खाय।।

Rahiman lakh bhalee karo, aguni agun na jay,
Raag sunat tay piyat hva, saamp sahaj dhari khaay

रहीम के दोहे का अर्थ:

सबका अपना अपना स्वभाव होता है और अपने स्वभाव से मुक्त हो पाना अत्यंत कठिन होता है। जैसे चोर चोरी करना भले ही छोड़ दे किंतु हेरा फेरी नहीं छोड़ेगा। झूठ बोलने वाला भी सच के महत्व को जानता है, किंतु वह स्वार्थ पूर्ति हेतु झूठ का आलंबन लेगा। दुष्प्रवृत्ति वालों से कितना ही सदव्यवहार करो, वह अपनी करनी से कभी नहीं चूकता।

रहीम कहते हैं, आप लाख भला करें, किंतु यदि सामने प्रपंची खड़ा होगा तो इस भलाई का आपको कोई फल मिलने वाला नहीं। दुष्टजन वैसे ही अपने अवगुण का त्याग नहीं कर पाते, जैसे अवगुणी का अवगुण नहीं जाता। सांप सांप ही होता है, उसे खूब लाड़ दुलार से पालने पर भी वह अपने कपट को तज नहीं सकता। उसे सपेरा बड़े प्रेम से दूध पिलाता है, किंतु वह अवसर मिलते ही उसे भी डंसने में नहीं हिचकता।

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Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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