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Rahim ke dohe रहिमन निज संपति बिना, कोउ न बिपति सहाय।

Rahim ke dohe in Hindi:

रहिमन निज संपति बिना, कोउ न बिपति सहाय।
बिनु पानी ज्यों जलज को, नहिं रवि सकै बचाय।।

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Rahiman nij sampati bina, kou na bipati sahaay
Binu pani jyon jalaj ko, nahin ravi sakai bachaay

रहीम के दोहे का अर्थ:

सदैव अपने बाहुबल पर भरोसा करना चाहिए। कोई दूसरा किसी के लिए हाथ पैर नहीं चलाता। दुर्दिन में किसी से सहायता की आशा रखना व्यर्थ है। अपनी सहायता आप करके ही दुर्दिनों से उबरा जा सकता है। यदि संचित संपत्ति है तो संकटकाल में वही काम आती है। दूसरों से अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए कि संकट में वह वित्तीय सहायता देगा।

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रहीम कहते हैं, आपदाओं और विपदाओं से घिरा हुआ वही व्यक्ति उबर नहीं पाता, जो दूसरों की मदद की प्रत्याषा में बैठा रहता है। हमेशा खुद पर भरोसा रखना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि अपने पास समय-असमय में हमेशा थोड़ा बहुत धन होना चाहिए, क्योंकि निज संपत्ति के बिना विपत्ति में कोई सहायक नहीं। यदि संपत्ति है तो दूसरों की सहायता भी सहज ही उपलब्ध होती है। कमल पानी में खिलता है तो सूर्य उसे विकसित करता है किंतु यदि पानी ही सूख जाए तो सूर्य भी उसे बचा नहीं पाता।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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