Rahim ke dohe रहिमन थोरे दिनन को, कौन करे मुंह स्याह।

Rahim ke dohe in Hindi:

रहिमन थोरे दिनन को, कौन करे मुंह स्याह।
नहीं छलन को पर तिया, नहीं करन को ब्याह।।

Rahiman thore dinan ko, kaoun kare munh syaah,
Nahin chhalan ko par tiya, nahin karan ko byaah

रहीम के दोहे का अर्थ:

प्रौढ़ावस्था में रहीम जब विधुर हो गए थे तो मित्र उन्हें दूसरा विवाह करने की सलाह देते थे, जिसे वह कभी स्वीकार नहीं कर सके। उनका विचार था, सारे कामों का एक सुनिश्चित समय होता है, अतः उम्र के अनुकूल ही कोई भी कार्य करना चाहिए।

रहीम कहते हैं, अब जीवन के थोड़े से दिन शेष रह गए हैं, ऐसा कौन है जो अपने मुंह को स्याह करे। वृद्धावस्था में अकरणीय कर्म करके कौन अपकीर्ति का भागीदार बनना चाहेगा। अतः न परनारी को छलना चाहिए और न ही वृद्धावस्था में ब्याह करने की भूल करना उचित है।

Rahim ke dohe रहीम के 25 प्रसिद्ध दोहे अर्थ व्याख्या सहित

25 Important परीक्षा में पूछे जाने वाले रहीम के दोहे :

अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यालयी परीक्षाओं में रहीम के दोहे संबन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें मार्क्स लाना आसान होता है किन्तु सही जानकारी और अभ्यास के अभाव में अक्सर विद्यार्थी रहीम के दोहों के प्रश्न में अंक लाने में कठिनाई अनुभव करते हैं। हमने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रहीम के दोहों को अर्थ एवं व्याख्या सहित संग्रहीत किया है जिनका अभ्यास करके आप पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।

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